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Sunday, 31 May 2015

इस प्रकार सजी थाली को देखकर प्रसन्न होती है महालक्ष्मी



लक्ष्मी पूजन पूरे विधि-विधान से किया जाना अति आवश्यक है। तभी देवी लक्ष्मी की कृपा तुरंत ही प्राप्त होती है। पूजन के समय सबसे जरूरी है कि पूजा की थाली शास्त्रों के अनुसार सजाई जाए। पूजा की थाली के संबंध में शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि लक्ष्मी पूजन में तीन थालियां सजानी चाहिए।
पहली थाली में 11 दीपक समान दूरी पर रखें कर सजाएं।

दूसरी थाली में पूजन सामग्री इस क्रम में सजाएं- सबसे पहले धानी (खील), बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चंदन का लेप, सिंदूर कुमकुम, सुपारी और थाली के बीच में पान रखें।

तीसरी थाली में इस क्रम में सामग्री सजाएं- सबसे पहले फूल, दूर्वा, चावल, लौंग, इलाइची, केसर-कपूर, हल्दी चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।
इस तरह थाली सजा कर लक्ष्मी पूजन करें।

शिव पूजा में इस आसान उपाय से कमाएंगे भरपूर पैसा



भौतिक सुखों को पाने के लिए धन की कामना भी अहम होती है। जिसे पूरा करने के लिए व्यावहारिक कर्मों के साथ धार्मिक कर्मों से ईश्वर की शरणागति भी सुखदायी मानी गई है। शास्त्रों के मुताबिक सुखों के ही देवता माने गए हैं - शिव।

धार्मिक आस्था है कि खुशहाली की कामना से जो शिव की शरण लेकर शुभ कर्म करता है। उसे शिव कृपा से सभी सुख प्राप्त होते हैं। शिव पुराण के मुताबिक सोमवार के दिन शिव पूजा में विशेष पूजा सामग्रियों के साथ-साथ तरह-तरह के अनाज चढ़ाने से भी कामनासिद्धी होती है। जिनमें धन कामना भी एक है।

जानते हैं शिव पूजा में किस तरह के अनाज चढ़ाकर धन कामना के अलावा कौन-से सुखों की इच्छा पूरी होती है?
- देव पूजा में अक्षत यानी चावल का चढ़ावा बहुत ही शुभ माना जाता है। शिव पूजा में भी महादेव या शिवलिंग के ऊपर चावल, जो टूटे न हो चढ़ाने से लक्ष्मी की कृपा यानी धन लाभ होता है।

शिव की गेंहू चढ़ाकर की गई पूजा से संतान सुख मिलता है।
शिव की तिल से पूजा करने पर मन, शरीर और विचारों के दोष का अंत हो जाता है।
जौ चढ़ाकर शिव की पूजा अंतहीन सुख देती है।
शिव को मूंग चढ़ाने से विशेष मनोरथ पूरे होते हैं।
अरहर के पत्तों से शिव पूजा अनेक तरह के दु:ख दूर करती है।

महाशिवरात्रि पर रुद्राक्ष का यह छोटा-सा प्रयोग देगा बड़े-बड़े सुख



हर इंसान की चाहत और कोशिश होती है जीवन सुखों से सराबोर हो। जिनको पाने के लिए तन, मन और धन से संपन्नता यानी तन निरोगी रखने, मन शांत और संतुलित होने और सुख-साधनों को पाने के लिए भरपूर आमदनी को तरजीह दी जाती है। धर्म का नजरिया इन सभी सुखों को पाने के लिए सत्य और पावनता को हर रूप में अपनाने पर ही जोर देता है।

हिन्दू धर्म में सत्य और पवित्रता से सुखद जीवन के लिए रुदा्रक्ष धारण करना और गंगा स्नान बहुत ही पुण्यदायी और पापनाशक माने गए हैं। क्योंकि रुद्राक्ष शिव का ही साक्षात् स्वरूप माना गया है। यही नहीं सत्य ही शिव का रूप और भक्ति कही गई है।

वहीं गंगा देव नदी ही नहीं बल्कि मां के रूप में पूजनीय है। क्योंकि पौराणिक मान्यताओं में गंगा स्वर्ग से भूमि पर राजा भगीरथी के घोर तप से आई। इस दौरान गंगा के वेग को भगवान शंकर ने अपनी जटाओं से काबू किया। यही कारण है रुद्राक्ष व गंगा जल स्पर्श मात्र ही सारे सुख और समृद्धि देने वाला माना गया है।

ऐसे ही आस्थावान लोगों के लिए महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बताया जा रहा है शास्त्रों में बताया रुद्राक्ष का एक छोटा-सा प्रयोग, जो गंगा स्नान का पुण्य और फल देता है। यह उपाय शिव भक्ति के खास मौकों व शुभ घड़ी में न चूकें। 

जानिए वास्तु व जीवन में बाँसुरी की महत्वपूर्ण भूमिका—-



बाँसुरी को शान्ति, शुभता एवं स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. यह उन्नति, प्रगति एवं सकारात्मक गुणों की वृद्धि की सूचक भी होती है. फेंगशुई और हमारे शास्त्रों में शुभ वस्तुओं में बाँसुरी का अत्यधिक महत्व है. फेंगशुई

बाँसुरी  के उपायों का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि वास्तु शास्त्र में जहां कहीं किसी दोष से पूर्णतः मुक्ति के लिए अशुभ निर्माण कार्य को तोड़ना आवश्यक होता है, वहीं फेंगशुई में अशुभ निर्माण को तोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं होती है. अपितु पैगोडा, बाँसुरी आदि सकरात्मक वस्तुओं का प्रयोग कर के उस दोष से मुक्ति पा लेते है.

बाँसुरी का निर्माण बाँस के ताने से होता है. सभी वनस्पतियों में बाँस सबसे तेज गति से बढ़ने वाला पौधा होता है.इसी कारण से यह विकास का प्रतीक है.और किसी भी वातावरण में यह अपना अस्तित्व बनाए रखने की क्षमता इसमें होती है. यदि किसी भी दूकान या व्यवसाय स्थल पर इसके पौधे को लगाया जाए तो जैसे बाँस के पौधे की वृद्धि तेज गति से होगी, वैसे ही उस दूकान या व्यवसाय स्थल के मालिक की भी प्रगति होगी. बाँस के पौधे के ये सभी गुण बाँसुरी में भी विद्यमान होते है.

बाँसुरी का उपयोग न केवल फेंगशुई में, वरन वास्तु शास्त्र एवं ग्रह दोष निवारण में बहुत ही उपयोगी है. वास्तु में बीम संबंधी दोष, द्वार वेध, वृक्ष वेध, वीथी वेध आदि सभी वेधो के निराकरण में और अशुभ निर्माण संबंधी वास्तु दोषों में बाँसुरी का प्रयोग होता है. ग्रह दोषों के अंतर्गत शनि, राहू आदि पाप ग्रहों से सम्बन्धित दोषों के निवारण में बाँसुरी का कोई विपरीत प्रभाव नहीं होता है.

लेकिन बाँसुरी के प्रयोग में एक सावधानी अवश्य रखनी चाहिए वह यह है कि, जहां कहीं भी इसे लगाया जाए, वहां इसे बिलकुल सीधा नहीं लगा कर थोड़ा तिरछा लगाना चाहिए तथा इसका मुंह नीचे की तरफ होना चाहिए.

जापान, चीन, हांगकांग, मलेशिया और मध्य एशिया में इसका प्रयोग बहुतायत में किया जाता है. यदि किसी के विकास में अनेक प्रयास करने के बाद भी बाधाए उत्पन्न हो रही हो तो इस बाँसुरी का प्रयोग अवश्य ही करना चाहिए.वैसे तो ”बाँसुरी एक फायदे अनेक है”. लेकिन यहां मै इस लेख मेंबाँसुरी के आसान और अचूक रामबाण उपाय दे रहा हूं जो कि पग पग पर हमारे लिए सहायक बनते है, और हमारी समस्याओं का पूर्ण रूप से समाधान करते है.

१:- बाँसुरी बाँस के पौधे से निर्मित होने के कारण शीघ्र उन्नतिदायक प्रभाव रखती है अतः जिन व्यक्तियों को जीवन में पर्याप्त सफलता प्राप्त नहीं हो पा रही हो, अथवा शिक्षा, व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो, तो उसे अपने बैडरूम के दरवाजे पर दो बाँसुरियों को लगाना चाहिए.

२:- यदि घर में बहुत ही अधिक वास्तु दोष है, या दो या तीन दरवाजे एक सीध में है, तो घर के मुख्यद्वार के ऊपर दो बाँसुरी लगाने से लाभ मिलता है तथा वास्तु दोष धीरे धीरे समाप्त होने लगता है.

३:- यदि आप आध्यात्मिक रूप से उन्नति चाहते है, या फिर किसी प्रकार की साधना में सफलता चाहते है तो, अपने पूजा घर के दरवाजे पर भी बाँसुरिया लगाए. शीघ्र ही सफलता प्राप्त होगी.

४:- बैडरूम में पलंग के ऊपर अथवा डाइनिंग टेबल के ऊपर बीम हो तो, इसका अत्यंत खराब प्रभाव पड़ता है. इस दोष को दूर करने के लिए बीम के दोनों ओर एक एक बाँसुरी लाल फीते में बाँध कर लगानी चाहिए. साथ ही यह भी ध्यान रखे कि बाँसुरी को लगाते समय बाँसुरी का मुंह नीचे की ओर होना चाहिए.

५:- यदि बाँसुरी को घर के मुख हाल में या प्रवेश द्वार पर तलवार की तरह “क्रास” के रूप में लगाया जाए, तो आकस्मिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है.

६:- घर के सदस्य यदि बीमार अधिक हों अथवा अकाल मृत्यु का भय या अन्य कोई स्वास्थ्य से सम्बन्धित समस्या हो, तो प्रत्येक कमरें के बाहर और बीमार व्यक्ति के सिरहाने बाँसुरी का प्रयोग करना चाहिए इससे अति शीघ्र लाभ प्राप्त होने लगेगा.

७:- यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में शनि सातवें भाव में अशुभ स्थिति में होकर विवाह में देर करवा रहे हो, अथवा शनि की साढ़ेसती या ढैया चल रही हो, तो एक बाँसुरी में चीनी या बूरा भरकर किसी निर्जन स्थान में दबा देना लाभदायक होता है इससे इस दोष से मुक्ति मिलती है.

८:- यदि मानसिक चिंता अधिक तेहती हो अथवा पति-पत्नी दोनों के बीच झगड़ा रहता हो, तो सोते समय सिरहाने के नीचे बाँसुरी रखनी चाहिए.

९:- यदि आप एक बाँसुरी को गुरु-पुष्य योग में शुभ मुहूर्त में पूजन कर के अपने गल्ले में स्थापित करते है तो इसके कारण आपके कार्य-व्यवसाय में बढोत्तरी होगी, और धन आगमन के अवसर प्राप्त होंगे.

१०:- पाश्चात्य देशो में इसे घरों में तलवार की तरह से भी लटकाया जाता है.इसके प्रभाव स्वरुप अनिष्ट एवं अशुभ आत्माओं एवं बुरे व्यक्तियों से घर की रक्षा होती है.
११:- घर और अपने परिवार की सुख समृधि और सुरक्षा के लिए एक बाँसुरी लेकर श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात बारह बजे के बाद भगवान श्री कृष्ण के हाथों में सुसज्जित कर दे तो इसके प्रभाव से पूरे वर्ष आपकी और आपके परिवार की रक्षा तो होगी ही तथा सभी कष्ट व बाधाए भी दूर होती जायेगी.
बाँसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब बाँसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है, तो बुरी आत्माएं दूर हो जाति है. और जब इसे बजाया जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि घरों में शुभ चुम्बकीय प्रवाह का प्रवेश होता है.

इस प्रकार बाँसुरी प्रकृति का एक अनुपम वरदान है. यदि सोच समझ कर इसका उपयोग किया जाए तो वास्तु दोषों का बिना किसी तोड़ फोड के निवारण कर अशुभ फलो से बचा जा सकता है. जहां रत्न धारण, रुद्राक्ष, यंत्र, हवन, आदि श्रमसाध्य और खर्चीले उपाय है, वहीं बाँसुरी का प्रयोग सस्ता, सुगम और प्रभावी होता है. अपनी आवश्यकता के अनुसार इसका प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है.

Saturday, 30 May 2015

झाड़ू पर पैर लगने से बढ़ती है पैसों की तंगी, पढ़िए क्यों और कैसे...



घर में कई वस्तुएं होती हैं कुछ बहुत सामान्य रहती है। इनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। ऐसी चीजों में से एक है झाड़ू। जब भी साफ-सफाई करना हो तभी झाड़ू का काम होता है। अन्यथा इसकी ओर कोई ध्यान नहीं देता। शास्त्रों के अनुसार झाड़ू के संबंध कई महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं।

शास्त्रों के अनुसार झाड़ू को धन की देवी महालक्ष्मी का ही प्रतीक रूप माना जाता है। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि झाड़ू ही हमारे घर से गरीबी रूपी कचरे को बाहर निकालती है और साफ-सफाई बनाए रखती है। घर यदि साफ और स्वच्छ रहेगा तो हमारे जीवन में धन संबंधी कई परेशानियां स्वत: ही दूर हो जाती हैं।

प्राचीन परंपराओं को मानने वाले लोग आज भी झाड़ू पर पैर लगने के बाद उसे प्रणाम करते हैं क्योंकि झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। विद्वानों के अनुसार झाड़ू पर पैर लगने से महालक्ष्मी का अनादर होता है। झाड़ू घर का कचरा बाहर करती है और कचरे को दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। जिस घर में पूरी साफ-सफाई रहती है वहां धन, संपत्ति और सुख-शांति रहती है। इसके विपरित जहां गंदगी रहती है वहां दरिद्रता का वास होता है। ऐसे घरों में रहने वाले सभी सदस्यों को कई प्रकार की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण घर को पूरी तरह साफ  रखने पर जोर दिया जाता है ताकि घर की दरिद्रता दूर हो सके और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सके।

घर से दरिद्रता रूपी कचरे को दूर करके झाड़ू यानि महालक्ष्मी हमें धन-धान्य, सुख-संपत्ति प्रदान करती है। जब घर में झाड़ू का कार्य न हो तब उसे ऐसे स्थान पर रखा जाता है जहां किसी की नजर न पड़े। इसके अलावा झाड़ू को अलग रखने से उस पर किसी का पैर नहीं लगेगा जिससे देवी महालक्ष्मी का निरादर नहीं होगा। यदि भुलवश झाड़ू को पैर लग जाए तो महालक्ष्मी से क्षमा की प्रार्थना कर लेना चाहिए।

विवाह में सात फेरे और सात वचन ही क्यों लिए जाते हैं. ...



अधिकाँश लोग सिर्फ इतना ही जानते हैं कि विवाह में पति-पत्नी एक साथ सात फेरे लेते हैं, पर ये कम ही लोग जानते हैं कि सात ही फेरे क्यों और इन सातों फेरों के पीछे कौन से अर्थ छिपे होते हैं? हिन्दू विवाह में सात फेरों का कुछ ख़ास ही महत्व है. सात बार वर-वधू साथ-साथ कदम से कदम मिलाकर फौजी सैनिकों की तरह आगे बढ़ते हैं. रीतियों के अनुसार सात चावल की ढेरी या कलावा बँधे हुए सकोरे रख दिये जाते हैं, इन लक्ष्य-चिह्नों को पैर लगाते हुए दोनों एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं, रुक जाते हैं और फिर अगला कदम बढ़ाते हैं. इस प्रकार सात कदम बढ़ाये जाते हैं. प्रत्येक कदम के साथ एक-एक मन्त्र बोला जाता है. पर हमारे समाज में पंडितों को नियमों की अपुष्ट जानकारी होने के कारण उनके द्वारा सात फेरे अलग-अलग तरहों से कराये जाते हैं, पर एक बात तो होती ही है और वो है - सात फेरे.

आइये बताते हैं कि हिन्दू विवाह में सात फेरे ही क्यों लिए जाते हैं. सात फेरों में पहला कदम अन्न के लिए उठाया जाता है, दूसरा बल के लिए, तीसरा धन के लिए, चौथा सुख के लिए, पाँचवाँ परिवार के लिए, छठवाँ ऋतुचर्या के लिए और सातवाँ मित्रता के लिए उठाया जाता है. मतलब यह कि पति-पत्नी के रिश्तों में ईश्वर को साक्षी मानकर दोनों प्रण करते हैं कि एक दूसरे के लिए अन्न संग्रह, धन संग्रह करेंगे और मित्रता स्थापित करते हुए एक-दूजे की ताकत बनेंगे. ऋतुचर्या का पालन करते हुए न सिर्फ एक-दूसरे को सुख देने का प्रयास करेंगे, बल्कि एक-दूसरे के परिवार को भी सुखी रखने के लिए हमेशा प्रयासरत रहेंगे.
          
हालांकि शादी के दौरान जाने-अनजाने तो सभी सात फेरे लगा लेते हैं, पर यदि आपसी तालमेल बिठाने में पति-पत्नी सफल न हो सके तो सात फेरे लेने के बावजूद सात जनम तक साथ रहने की बात तो दूर,सात कदम भी साथ चलना पति-पत्नी के लिए दूभर हो जाता है.मित्रो हिन्दू मैं जब विवाह होता है तो भावी पति अपनी सात जन्मो तक साथ निभाने वाली संगनी को सात वचन देता है ,,इस सूत्र मैं हम देखेगे की वो सात वचन कोन से है तथा उनका अर्थ क्या है ।
सबसे पहले .....................
कन्या वर से यह सात वचन मांगती है​
पहला वचन: यज्ञ आदि शुभ कार्य आप मेरी सम्मति के बाद ही करेंगे और मुझे भी इसमें शामिल करेंगे.
दूसरा वचन: दान आदि के समय भी आप मेरी सहमती प्राप्त करेंगे.
तीसरा वचन: युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था में आप मेरा पालन-पोषण करेंगे.
चौथा वचन: धन आदि का गुप्त रूप से संचय आप मेरी सम्मति से करेंगे.
पांचवा वचन: तमाम तरह के पशुओं की खरीदारी करते या बेचते समय आप मेरी सहमति लेंगे.
छठा वचन: वसंत, गर्मी, बारिश, शरद, हेमंत, और शिशिर जैसी सभी ऋतुओं में मेरे पालन-पोषण की व्यवस्था आप ही करेंगे.
सातवाँ वचन: आप मेरी सहेलियों के सामने कभी मेरी हंसी नहीं उड़ायेंगे और न ही कटु वचनों का प्रयोग करेंगे.

वर द्वारा कन्या से लिए गए वचन
पहला वचन: आप मेरी अनुमति के बिना किसी निर्जन स्थान, उद्यान या वन में नहीं जायेंगे.
दूसरा वचन: शराब का सेवन करने वाले मनुष्य के सामने उपस्थित नहीं होंगी.
तीसरा वचन: जब तक मैं आज्ञा न दूँ, तब तक आप बाबुल के घर भी नहीं जायेंगे.
चौथा वचन: धर्म और शास्त्रों के अनुसार मेरी किसी भी आज्ञा का उल्लंघन नहीं करेंगे.
पांचवा वचन: उपरोक्त वचनों को देने के बाद ही आप मेरे वामांग में स्थित हो सकती हैं.

अब आप ही उपरोक्त दिए गए वर-वधु के इन सातों वचनों को गौर से पढ़ कर देखिये आपने कि किस प्रकार ईश्वर को साक्षी मानकर किए गए इन सप्त संकल्प रूपी स्तम्भों पर सुखी गृ्हस्थ जीवन का भार टिका हुआ है........ !

Friday, 29 May 2015

रोज ये 3 काम करने से विवाहित पुरुष नहीं होता धनहीन, रोगी या कमजोर

शादीशुदा इंसान जिम्मेदारियों को पूरा करने के दौरान कई मर्तबा अशांति और तनावों से भी घिर जाता है। ऐसी दशाएं मन व कामों पर भी बुरा असर डालती हैं। यही नहीं, ये बातें उसके व्यक्तित्व, चरित्र व सेहत में भी बड़े बदलाव लाकर गृहस्थी व रिश्तों का तालमेल भी बिगाड़ सकती है। यही वजह है कि शास्त्रों में गृहस्थ धर्म में मर्यादा और अनुशासन के पालन को सफल और सुखी जीवन का मंत्र माना गया है।

शास्त्रों में हर गृहस्थ खासकर पुरुष के लिए सुबह से लेकर रात को सोने तक कुछ खास कामों को करना जरूरी बताया गया है ताकि खुद के साथ परिवार भी तनावमुक्त, खुशहाल और हर तरह से संपन्न बना रहे। जानिए, शास्त्रों के नजरिए से किसी शादीशुदा पुरुष के लिए सुबह जागने के बाद अहम उन कामों को, जो व्यावहारिक तौर से अपनाना आसान भी हैं व सेहतमंद, ताकतवर, धनी व सफल बनने की चाहत को पूरा करने में मददगार व असरदार भी।

गृहस्थ को आलस्य छोड़कर ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के पहले जागकर धर्म व अर्थ दो बातों का ध्यान रख आगे की दिनचर्या नियत करना चाहिए।

इसी कड़ी में शरीर और मन की शुद्धि को अहम माना गया है। शरीर की पवित्रता के लिए पहले दांतों को साफ कर स्नान करना चाहिए। सुबह स्नान का यह महत्व यही बताया गया है कि चूंकि, शरीर से कई रूपों में दूषित पदार्थ बाहर निकलते रहते हैं, जो रोगी बनाते हैं। रोग मन को कमजोर करता है। इसलिए स्नान कर शरीर की पवित्रता से रोग, शोक व दु:ख दूर होते हैं। गंगा स्नान हो तो वह सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

विवाहित पुरुष को मन की शुद्धि के लिए संध्या उपासना या सूर्य पूजा, गायत्री मंत्र का जप, तर्पण और देव उपासना या इन में से कोई भी एक उपाय जरूरी अपनाना चाहिए। यह न केवल धार्मिक रूप से पुण्य देने वाले कर्म माने गए हैं, बल्कि व्यावहारिक तौर से भी तनाव और कलह को दूर रखने में कारगर होते हैं।

इस तरह शरीर शुद्धि बाहरी रूप से, तो देव स्मरण के उपाय अन्दर से शक्ति, ऊर्जा और स्वास्थ्य देने वाले होते हैं। आज के तेज रफ्तार भरे जीवन में वक्त निकालकर हर गृहस्थ यह नियम और संयम अपनाए, तो यह घर और परिवार के अन्य सदस्यों के लिये भी सकारात्मक और प्रेरणादायी वातावरण बनाता है, जिससे गृहस्थी में मेलजोल, प्रेम, विश्वास और सहयोग का भाव कायम रहता है। इससे मिली सकारात्मक ऊर्जा निश्चित तौर पर किसी भी पुरुष को सही कार्यक्षेत्र चुनने, पैसा व सफलता पाने की चाहत पूरी करने में मददगार होती है।

सुंदरकांड का पाठ क्यों किया जाता है, जानिए खास बातें



अक्सर शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। जब भी किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां हों, कोई काम नहीं बन रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं। कई ज्योतिषी और संत भी विपरीत परिस्थितियों में सुंदरकांड का पाठ करने की सलाह देते हैं। यहां जानिए सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता है?

सुंदरकांड के लाभ से मिलता है मनोवैज्ञानिक लाभ
वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है। सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का कांड है। मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड है। सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।

हनुमानजी जो कि वानर थे, वे समुद्र को लांघकर लंका पहुंच गए और वहां सीता की खोज की। लंका को जलाया और सीता का संदेश लेकर श्रीराम के पास लौट आए। यह एक भक्त की जीत का कांड है, जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है। सुंदरकांड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं। इसलिए पूरी रामायण में सुंदरकांड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता है। इसी वजह से सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।

सुंदरकांड के लाभ से मिलता है धार्मिक लाभ
हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है। बजरंग बली बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं, इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकांड का पाठ करना है। सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार की परेशानी हो, सुंदरकांड के पाठ से दूर हो जाती है। यह एक श्रेष्ठ और सबसे सरल उपाय है। इसी वजह से काफी लोग सुंदरकांड का पाठ नियमित रूप करते हैं।

हनुमानजी के पूजन में ध्यान रखें ये सामान्य नियम
हर युग में श्रीराम के अनन्य भक्त बजरंग बली श्रद्धालुओं के दुखों को दूर करके उन्हें सुखी और समृद्धिशाली बनाते हैं। इसी कारण आज इनके भक्तों की संख्या काफी अधिक है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमानजी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। हनुमानजी के पूजन और दर्शन के लिए शास्त्रों के अनुसार कुछ नियम बताए गए हैं, पूजन और दर्शन करते समय इन नियमों का पालन चाहिए।

हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। भक्तों को इनकी तीन परिक्रमा ही करनी चाहिए।

दोपहर के समय बजरंग बली को गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनी रोटी का चूरमा अर्पित किया जा सकता है।

हनुमानजी को शाम के समय फल जैसे आम, केले, अमरूद, सेवफल आदि का भोग लगाना चाहिए।

सुंदरकांड का पाठ करते समय हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल और अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित करना चाहिए।

शंख के SPECIAL BENEFITS जानेंगे तो आप भी मानेंगे ये है चमत्कार है



हिंदू धर्म में कई प्रकार के धार्मिक तौर-तरीके और परंपराएं हैं। जिनका हमारे जीवन में गहरा महत्व है। ऐसे सभी कर्मों के पीछे धार्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है।
प्राचीन परंपराएं हमारे स्वास्थ्य को अच्छा रखने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। ऐसी ही एक परंपरा है शंख बजाना। जानिए शंख बजाने से हमें क्या-क्या लाभ मिलते हैं...

हमारे यहां मंदिरों में सुबह और शाम के समय आरती में शंखनाद किया जाता है यानी शंख बजाया जाता है। इसका अपना धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। धर्मग्रंथों के अनुसार शंखनाद शुभ होता है। इसीलिए पूजा-पाठ के अलावा विवाह, विजय के उत्सव, राज्याभिषेक, हवन और किसी के आगमन के समय आमतौर पर शंख बजाया जाता है।

शंख बजाने में हमारी सेहत का राज भी छिपा है। शंखनाद से हम स्वस्थ रहते हैं। कई रोगों के कीटाणु भी दूर हो जाते हैं। प्राचीनकाल में युद्ध का आरंभ और समाप्ति शंखनाद से ही होती थी। ऐसा कहते हैं कि इसकी ध्वनि दुश्मनों को कमजोर करती है। शास्त्रों में शंखनाद का महत्व इस प्रकार है-
यस्य शंखध्वनिं कुर्यात्पूजाकाले विशेषत:।
वियुक्त: सर्वपापेन विष्णुना सह मोदते॥ (रणवीरभक्ति रत्नाकर)
अर्थात- पूजा के समय जो व्यक्ति शंख ध्वनि करता है, उसके सभी पाप यानी दु:ख दूर होते हैं। वह व्यक्ति भगवान विष्णु के साथ आनंद पाता है।

शंखनाद में प्रदूषण को दूर करने की अद्भुत क्षमता होती है। एक वैज्ञानिक खोज के अनुसार शंख की आवाज जहां तक जाती है, वहां तक कई रोगों के कीटाणु ध्वनि स्पंदन से या तो खत्म हो जाते हैं या फिर वे निष्क्रिय हो जाते हैं। रोजाना सुबह-शाम शंख बजाने से वायुमंडल कीटाणुओं से मुक्त हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की किरणें ध्वनि की तरंगों में बाधक होती हैं। इसीलिए सुबह-शाम शंख बजाने की परंपरा है।

शंख की ध्वनि कई रोगों में लाभदायक है। शंख की ध्वनि लगातार सुनना हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है। कारण इससे हृदयाघात नहीं होता। शंखनाद पर हुए कई शोधों का यह निष्कर्ष निकाला कि इसकी तरंगें बैक्टेरिया नष्ट करने के लिए एक तरह से श्रेष्ठ व सस्ती औषधि है। इससे हैजा, मलेरिया के कीटाणु भी नष्टï होते हैं। शंख ध्वनि से हमारे भीतर रोगनाशक शक्ति उत्पन्न होती है। मानसिक तनाव (मेंटल टेंशन), ब्लडप्रेशर, मधुमेह, नाक, कान व पाचन संस्थान के रोग होने की आशंका दूर हो जाती है।

पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद शंख में भरा जल श्रद्धालुओं पर छिड़का जाता है और उसे पीते भी हैं। इसमें कीटाणुनाशक शक्ति तो होती ही है, साथ ही इसमें गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम होता है। इन तत्वों के कुछ अंश जल में भी आ जाते हैं। इसलिए शंख का जल सेहत के लिए फायदेमंद हो जाता है। अत: शंख-जल छिड़कने या पीने से शरीर के कई रोग दूर हो जाते हैं।

Thursday, 28 May 2015

इन पांच रंगों में से कोई एक रंग चुनिए और जानिए अपना स्वभाव...



इन पांच रंगों में से कोई एक रंग चुनिए और जानिए अपना स्वभाव...

क्या आप जानते हैं कि रंगों की पसंद के अनुसार भी किसी व्यक्ति स्वभाव मालुम किया जा सकता है। ज्योतिष के अनुसार हमारा जैसा स्वभाव होता है वैसे ही कलर हमारी पसंद होते हैं।रंगों का ग्रहों से गहरा संबंध से भी होता है अत: हमारी पसंद-नापसंद पर शुभ-अशुभ ग्रहों का प्रभाव पड़ता है।

ज्योतिष के अनुसार जानिए अपना स्वभाव-
यहां पांच रंगों क नाम दिए जा रहे हैं। इनमें से किसी एक रंग को सावधानी से सिलेक्ट करें। इसके बाद सभी रंगों के अनुसार आपका स्वभाव कैसा रहेगा? यह नीचे पढ़ें-

रंगों के नाम
लाल, काला, नीला, हरा, पीला
इन रंगों में से कोई एक रंग चुनें।

रंगों के अनुसार आपका स्वभाव

लाल: आप बहुत सावधान रहने वाले हैं, आपके जीवन प्रेम का बहुत अधिक महत्व है। आप बहुत अच्छे प्रेमी सिद्ध हो सकते हैं।

काला: आपका स्वभाव रूढि़वादी है। साथ ही आपको गुस्सा बहुत जल्द आता है। आपको बदलाव बहुत कम ही पसंद आता है।

नीला: आप स्वाभिमानी हैं, किसी से मदद लेना आपको पसंद नहीं होता। प्रेमी को पूरा समय देते हैं।

हरा: आप बहुत शांति प्रिय इंसान हैं। लड़ाई-झगड़ों से दूर ही रहते हैं।
पीला: आप हमेशा खुश रहने वाले इंसान हैं। दूसरों को हमेशा सही मार्गदर्शन देते हैं। सभी

मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
ज्योतिष के अनुसार उक्त के अनुसार व्यक्ति स्वभाव लगभग इसी तरह का रहता है। नौ ग्रहों की अलग-अलग स्थिति के अनुसार स्वभाव में परिवर्तन हो सकता है।

घर के सदस्यों को विपत्ति से बचाती है मछली



घर के सदस्यों को विपत्ति से बचाती है मछली

शीशे का छोटा सा घर जिनमें छोटी-छोटी मछलियां तैरती रहती हैं। इन्हें देखकर न सिर्फ बच्चों को मजा आता है बल्कि बड़ों को भी सुकून मिलता है। इस प्रकार के छोटे से मछली घर को एक्वेरियम कहा जाता है। एक्वेरियम सिर्फ मन को प्रसन्नता नहीं देते बल्कि फेंगशुई के अनुसार इनसे घर के सदस्यों के ऊपर आने वाली विपत्तियां टलती हैं एवं घर में धन-संपत्ति के आगमन में निरंतरता बनी रहती है। लेकिन फेंगशुई के कुछ नियम हैं जिनका पालन करते हुए एक्वेरियम रखा जाए तभी इसका समुचित लाभ मिल पाता है।

मछलियों की संख्या
एक्वेरियम में मछलियों की संख्या का विशेष महत्व है। फेंगशुई के अनुसार एक्वेरियम में मछलियों की संख्या कम से कम नौ होनी चाहिए। आठ मछलियां लाल अथवा सुनहरे रंग की होनी चाहिए जबकि एक मछली काले रंग की। ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की संख्या नौ बतायी गयी है। संभव है कि इन्हीं कारणों से फेंगशुई में नौ मछलियां एक्वेरियम में रखने की बात कही गयी है।
जब कभी कोई मछली मर जाये तो उसे एक्वेरियम से बाहर निकाल दें और उसकी जगह नई मछली लाकर रख दें। ध्यान रखें कि जिस रंग की मछली मरी हो उसी रंग की नई मछली हो। फेंगशुई के अनुसार जब कोई मछली मरती है तो अपने साथ घर पर आने वाली विपत्तियों को साथ लेकर चली जाती है। इसलिए एक्वेरियम में मछली के मरने पर दुःखी न हों।

हजारों साल पहले ऋषियों के आविष्कार, पढ़कर रह जाएंगे हैरान ।



हजारों साल पहले ऋषियों के आविष्कार, पढ़कर रह जाएंगे हैरान ।

हजारों साल पहले ऋषियों के आविष्कार, पढ़कर रह जाएंगे हैरान |
असाधारण या यूं कहें कि प्राचीन वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों द्वारा किए आविष्कार व उनके द्वारा उजागर रहस्यों को जिनसे आप भी अब तक अनजान होंगे –

महर्षि दधीचि :-महातपोबलि और शिव भक्त ऋषि थे। वे संसार के लिए कल्याण व त्याग की भावना रख वृत्तासुर का नाश करने के लिए अपनी अस्थियों का दान करने की वजह से महर्षि दधीचि बड़े पूजनीय हुए। इस संबंध में पौराणिक कथा है किएक बार देवराज इंद्र की सभा में देवगुरु बृहस्पति आए। अहंकार से चूर इंद्र गुरु बृहस्पति के सम्मान में उठकर खड़े नहीं हुए। बृहस्पति ने इसे अपना अपमान समझा और देवताओं को छोड़कर चले गए। देवताओं ने विश्वरूप को अपना गुरु बनाकर काम चलाना पड़ा, किंतु विश्वरूप देवताओं से छिपाकर असुरों को भी यज्ञ-भाग दे देता था। इंद्र ने उस पर आवेशित होकर उसका सिर काट दिया। विश्वरूप त्वष्टा ऋषि का पुत्र था। उन्होंने क्रोधित होकर इंद्र को मारने के लिए महाबली वृत्रासुर को पैदा किया। वृत्रासुर के भय से इंद्र अपना सिंहासन छोड़कर देवताओं के साथ इधर-उधर भटकने लगे।ब्रह्मादेव ने वृत्तासुर को मारने के लिए वज्र बनाने के लिए देवराज इंद्र को तपोबली महर्षि दधीचि के पास उनकी हड्डियां मांगने के लिये भेजा। उन्होंने महर्षि से प्रार्थना करते हुए तीनों लोकों की भलाई के लिए अपनी हड्डियां दान में मांगी। महर्षि दधीचि ने संसार के कल्याण के लिए अपना शरीर दान कर दिया। महर्षि दधीचि की हड्डियों से वज्र बना और वृत्रासुर मारा गया। इस तरह एक महान ऋषि के अतुलनीय त्याग से देवराज इंद्र बचे और तीनों लोक सुखी हो गए।

आचार्य कणाद :-कणाद परमाणुशास्त्र के जनक माने जाते हैं। आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन के भी हजारों साल पहले आचार्य कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं।

भास्कराचार्य :-आधुनिक युग में धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई सदियों पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया। भास्कराचार्यजी ने अपने ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है। इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है’।

आचार्य चरक :- ‘चरकसंहिता’ जैसा महत्तवपूर्ण आयुर्वेद ग्रंथ रचने वाले आचार्य चरक आयुर्वेद विशेषज्ञ व ‘त्वचा चिकित्सक’ भी बताए गए हैं। आचार्य चरक ने शरीरविज्ञान, गर्भविज्ञान, औषधि विज्ञान के बारे में गहन खोज की। आज के दौर की सबसे ज्यादा होने वाली डायबिटीज, हृदय रोग व क्षय रोग जैसी बीमारियों के निदान व उपचार की जानकारी बरसों पहले ही
उजागर की।

भारद्वाज :- आधुनिक विज्ञान के मुताबिक राइट बंधुओं ने वायुयान का आविष्कार किया। वहीं हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक कई सदियों पहले ऋषि भारद्वाज ने विमानशास्त्र के जरिए वायुयान को गायब करने के असाधारण विचार से लेकर, एक ग्रह से दूसरे ग्रह व एक दुनिया से दूसरी दुनिया में ले जाने के रहस्य उजागर किए। इस तरह ऋषि भारद्वाज को वायुयान का आविष्कारक भी माना जाता है।

कण्व :- वैदिक कालीन ऋषियों में कण्व का नाम प्रमुख है। इनके आश्रम में ही राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था। माना जाता है कि उसके नाम पर देश का नाम भारत हुआ। सोमयज्ञ परंपरा भी कण्व की देन मानी जाती है।

कपिल मुनि :- भगवान विष्णु का पांचवां अवतार माने जाते हैं। इनके पिता कर्दम ऋषि थे। इनकी माता देवहूती ने विष्णु के समान पुत्र चाहा। इसलिए भगवान विष्णु खुद उनके गर्भ से पैदा हुए। कपिल मुनि 'सांख्य दर्शन' के प्रवर्तक माने जाते हैं। इससे जुड़ा प्रसंग है कि जब उनके पिता कर्दम संन्यासी बन जंगल में जाने लगे तो देवहूती ने खुद अकेले रह जाने की स्थिति पर दुःख जताया। इस पर ऋषि कर्दम देवहूती को इस बारे में पुत्र से ज्ञान मिलने की बात कही। वक्त आने पर कपिल मुनि ने जो ज्ञान माता को दिया, वही 'सांख्य दर्शन' कहलाता है।

पतंजलि :- आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है। किंतु कई सदियों पहले ही ऋषि पतंजलि ने कैंसर को रोकने वाला योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है।

शौनक :-वैदिक आचार्य और ऋषि शौनक ने गुरु-शिष्य परंपरा व संस्कारों को इतना फैलाया कि उन्हें दस हजार शिष्यों वाले गुरुकुल का कुलपति होने का गौरव मिला। शिष्यों की यह तादाद कई आधुनिक विश्वविद्यालयों तुलना में भी कहीं ज्यादा थी।

महर्षि सुश्रुत :- ये शल्यचिकित्सा विज्ञान यानी सर्जरी के जनक व दुनिया के पहले शल्यचिकित्सक(सर्जन) माने जाते हैं। वे शल्यकर्म या आपरेशन में दक्ष थे। महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखी गई ‘सुश्रुतसंहिता’ ग्रंथ में शल्य चिकित्सा के बारे में कई अहम ज्ञान विस्तार से बताया है। इनमें सुई, चाकू व चिमटे जैसे तकरीबन 125 से भी ज्यादा शल्यचिकित्सा में जरूरी औजारों के नाम और 300 तरह की शल्यक्रियाओं व उसके पहले की जाने वाली तैयारियों, जैसे उपकरण उबालना आदि के बारे में पूरी जानकारी बताई गई है।
जबकि आधुनिक विज्ञान ने शल्य क्रिया की खोज तकरीबन चार सदी पहले ही की है। माना जाता है कि महर्षि सुश्रुत मोतियाबिंद, पथरी, हड्डी टूटना जैसे पीड़ाओं के उपचार के लिए शल्यकर्म यानी आपरेशन करने में माहिर थे। यही नहीं वे त्वचा बदलने की शल्यचिकित्सा भी करते थे।

वशिष्ठ :-वशिष्ठ ऋषि राजा दशरथ के कुलगुरु थे। दशरथ के चारों पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न ने इनसे ही शिक्षा पाई। देवप्राणी व मनचाहा वर देने वाली कामधेनु गाय वशिष्ठ ऋषि के पास ही थी।

विश्वामित्र :- ऋषि बनने से पहले विश्वामित्र क्षत्रिय थे। ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को पाने के लिए हुए युद्ध में मिली हार के बाद तपस्वी हो गए। विश्वामित्र ने भगवान शिव से अस्त्र विद्या पाई। इसी कड़ी में माना जाता है कि आज के युग में प्रचलित प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रणाली हजारों साल पहले विश्वामित्र ने ही खोजी थी।ऋषि विश्वामित्र ही ब्रह्म गायत्री मंत्र के दृष्टा माने जाते हैं। विश्वामित्र का अप्सरा मेनका पर मोहित होकर तपस्या भंग होना भी प्रसिद्ध है। शरीर सहित त्रिशंकु को स्वर्ग भेजने का चमत्कार भी विश्वामित्र ने तपोबल से कर दिखाया।

महर्षि अगस्त्य :- वैदिक मान्यता के मुताबिक मित्र और वरुण देवताओं का दिव्य तेज यज्ञ कलश में मिलने से उसी कलश के बीच से तेजस्वी महर्षि अगस्त्य प्रकट हुए। महर्षि अगस्त्य घोर तपस्वी ऋषि थे। उनके तपोबल से जुड़ी पौराणिक कथा है कि एक बार जब समुद्री राक्षसों से प्रताड़ित होकर देवता महर्षि अगस्त्य के पास सहायता के लिए पहुंचे तो महर्षि ने देवताओं के दुःख को दूर करने के लिए समुद्र का सारा जल पी लिया। इससे सारे राक्षसों का अंत हुआ।

गर्गमुनि :- गर्ग मुनि नक्षत्रों के खोजकर्ता माने जाते हैं। यानी सितारों की दुनिया के जानकार। ये गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के के बारे नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ। कौरव-पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा। इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी। इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी। पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था। तिथि-नक्षत्रों की यही स्थिति व नतीजे गर्ग मुनिजी ने पहले बता दिए थे।

बौद्धयन :- भारतीय त्रिकोणमितिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। कई सदियों पहले ही तरह-तरह के आकार-प्रकार की यज्ञवेदियां बनाने की त्रिकोणमितिय रचना-पद्धति बौद्धयन ने खोजी। दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी, उतने क्षेत्रफल का ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान के वृत्त में बदलना, इस तरह के कई मुश्किल सवालों का जवाब बौद्धयन ने आसान बनाया।
जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया अपने सभी दो

Tuesday, 26 May 2015

वास्तु शास्त्र के हिसाब से करें घर की साज-सज्जा



र्तमान समय में सुविधाएं जुटाना बहुत आसान है। परंतु शांति इतनी सहजता से नहीं प्राप्त होती।हमारे घर में सभी सुख-सुविधा का सामान है, परंतु शांति पाने के लिए हम तरस जाते हैं।वास्तु शास्त्र द्वारा घर में कुछ मामूली बदलाव कर आप घर एवं बाहर शांति का अनुभव कर सकते हैं।कुछ ऐसे ही उपाय नीचे दिए गए हैं :

घर में कोई रोगी हो तो एक कटोरी में केसर घोलकर उसके कमरे में रखे दें। वह जल्दी स्वस्थ हो जाएगा
   
घर में ऐसी व्यवस्था करें कि वातावरण सुगंधित रहे। सुगंधित वातावरण से मन प्रसन्न रहता है
   
घर में जाले न लगने दें, इससे मानसिक तनाव कम होता हैदिन में एक बार चांदी के ग्लास का पानी पिये, इससे क्रोध पर नियंत्रण होता है
   
अपने घर में चटकीले रंग नहीं करायेकिचन का पत्थर काला नहीं रखे कंटीले पौधे घर में नहीं लगाएं भोजन रसोईघर में बैठकर ही करें

शयन कक्ष में मदिरापान नहीं करें अन्यथा रोगी होने तथा डरावने सपनों का भय होता है

इन छोटे-छोटे उपायों से आप जरूर शांति का अनुभव करेंगे।
 वास्तु शास्त्र के हिसाब से कौन सी वस्तु कहां रखें:

सोते समय सिर दक्षिण में पैर उत्तर दिशा में रखें। या सिर पश्चिम में पैर पूर्व दिशा में रखना चाहिए
   
अलमारी या तिजोरी को कभी भी दक्षिणमुखी नहीं रखें पूजा घर ईशान कोण में रखें
   
रसोई घर मेन स्वीच, इलेक्ट्रीक बोर्ड, टीवी इन सब को आग्नेय कोण में रखें
   
रसोई के स्टेंड का पत्थर काला नहीं रखें।दक्षिणमुखी होकर रसोई नहीं पकाए
   
शौचालय सदा नैर्ऋत्य कोण में रखने का प्रयास करें फर्श या दिवारों का रंग पूर्ण सफेद नहीं रखें फर्श काला नहीं रखें
मुख्य द्वार की दांयी और शाम को रोजाना एक दीपक लगाएं

वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर का बाहरी रंग कैसा हो:

यदि आपका घर पूर्वमुखी हो तो फ्रंट में लाल, मैरून रंग करे
पश्चिममुखी हो तो लाल, नारंगी, सिंदूरी रंग करें उत्तरामुखी हो तो पीला, नारंगी करें दक्षिणमुखी हो तो गहरा नीला रंग करें
किचन में लाल रंग।बेडरूम में हल्का नीला, आसमानी ड्राइंग रूम में क्रीम कलर पूजा घर में नारंगी रंग शौचालय में गहरा नीला फर्श पूर्ण सफेद न हो क्रीम रंग का होना चाहिए वास्तु शास्त्र के हिसाब कमरो का निर्माण कैसा हो?

कमरों का निर्माण में नाप महत्वपूर्ण होते हैं। उनमें आमने-सामने की दिवारें बिल्कुल एक नाप की हो, उनमें विषमता न हो।

कमरों का निर्माण भी सम ही करें। 20-10, 16-10, 10-10, 20-16 आदि विषमता में ना करें जैसे 19-16, 18-11 आदि।

बेडरूम में शयन की क्या स्थिति।बेडरूम में सोने की व्यवस्था कुछ इस तरह हो कि सिर दक्षिण मे एवं पांव उत्तर में हो।

यदि यह संभव न हो तो सिराहना पश्चिम में और पैर पूर्व दिशा में हो तो बेहतर होता है।

रोशनी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि आंखों पर जोर न पड़े।

बेड रूम के दरवाजे के पास पलंग स्थापित न करें। इससे कार्य में विफलता पैदा होती है।

कम समान बेड रूम के भीतर रखे। वास्तु शास्त्र और घर की साज-सज्जा

घर की साज सज्जा बाहरी हो या अंदर की वह हमारी बुद्धि मन और शरीर को जरूर प्रभावित करती है।

घर में यदि वस्तुएं वास्तु अनुसार सुसज्जित न हो तो वास्तु और ग्रह रश्मियों की विषमता के कारण घर में क्लेश, अशांति का जन्म होता है।

घर के बाहर की साज-सज्जा बाहरी लोगों को एवं आंतरिक शृंगार हमारे अंत: करण को सौंदर्य प्रदान करता है। जिससे सुख-शांति, सौम्यता प्राप्त होती है।

भवन निर्माण के समय ध्यान रखें। भवन के अंदर के कमरों का ढलान उत्तर दिशा की तरफ न हो। ऐसा हो जाने से भवन स्वामी हमेशा ऋणी रहता है।

ईशान कोण की तरफ नाली न रखें। इससे खर्च बढ़ता है।
 शौचालय: शौचालय का निर्माण पूर्वोत्तर ईशान कोण में न करें।इससे सदा दरिद्रता बनी रहती है।
 शौचालय का निर्माण वायव्य दिशा में हो तो बेहतर होता है। कमरों में ज्यादा छिद्रों का ना होना आपको स्वस्थ और शांतिपूर्वक रखेगा।

 कौन से रंग का हो study room?
 रंग का भी अध्ययन कक्ष में बड़ा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कौन-कौन से रंग आपके अध्ययन को बेहतर बनाते हैं तथा कौन से रंग का स्टडी रूम में त्याग करना चाहिए।

अध्ययन कक्ष में हल्का पीला रंग, हल्का लाल रंग, हल्का हरा रंग आपकी बुद्धि को ऊर्जा प्रदान करता है तथा पढ़ी हुयी बाते याद रहती है।

पढ़ते समय आलस्य नही आता, स्फुर्ती बनी रहती है। हरा और लाल रंग सर्वथा अध्ययन के लिए उपयोगी है।

लाल रंग से मन भटकता नहीं हैं, तथा हरा रंग हमें सकारात्मक उर्जा प्रदान करता है।

नीले, काले, जामुनी जैसे रंगो का स्टडी रूम में त्याग करना चाहिए, यह रंग नकारात्मक उर्जा के कारक है।

ऐसे कमरो में बैठकर कि गयी पढ़ाई निरर्थक हो जाती है।

Friday, 22 May 2015

भाग्यांक द्वारा जानें अपना व्यवसाय व कैरियर



भाग्यांक द्वारा जानें अपना व्यवसाय व कैरियर- अंक ज्योतिष में भाग्यांक को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। भाग्यांक का अर्थ है। आपके जीवन का वह महत्वपूर्ण अंक जिसके द्वारा आप-अपना व्यवसाय व कैरियर निर्धारित कर सके। अब सवाल यह आता है कि भाग्यांक जाना कैसे जाय?भाग्यांक जानने के लिये, जन्म तिथि, जन्म मास और जन्म वर्ष की आवश्यकता होती है। उदाहरणः माना किसी जातक का जन्म 26 नवम्बर 1980 को है, तो उस जातक का भाग्यांक निम्नलिखित तरीके से निकाला जा सकता है। जन्म तारीख, जन्म मास और जन्म वर्ष= भाग्यांक जन्म तारीख, 26=2+6=8 जन्म मास, 11=1+1=2 जन्म वर्ष, 1980=1+9+8+0=18=1+8=9 तो इस प्रकार इस जातक का भाग्यांक=8+2+9=19=1+9=10=1+0=1

भाग्यांक 2- जिन जातकों का भाग्यांक 2 है उन व्यक्तियों पर चन्द्र ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है। उनका मन व दिमाग शान्त रहता है। ये अपने कार्य को लेकर संवेदनशील तो होते है,परन्तु बहुत दिनों तक इनका किसी कार्य में मन नहीं लगता है। यह इनका नकारात्मक पक्ष है जिसके कारण इन्हे कई बार अपना व्यवसाय बदलना पड़ता है। आपका स्वभाव उधार लेना है, भाग्यांक 2 वाले जातक उधार बहुत अधिक लेते है, परन्तु देने में काफी ढीले रहते है। आपको अपनी इस आदत में सुधार करने की आवश्यकता है। वैसे इस अंक वाले लोग कंजूस होते है, परन्तु अच्छे मौकों पर दिल खोलकर खर्च भी करते है। यदि आप कोई व्यवसाय या कहीं पर धन निवेश करना चाहते है तो अपनी पत्नी को साझेदार अवश्य बनायें। कैरियर- अध्यापक, पत्रकार, एकाउण्टेन्ट, समुद्र यात्रा, शुगरमिल, कृषि विभाग, संगीत, अभिनय, दन्त चिकित्सा, जल सेना, फैसप डिजाइनिंग, माडलिंग आदि क्षेत्रों में आप-अपना कैरियर बना सकते है। व्यवसाय- सौन्दर्य प्रसाधन, पेट्रोल पम्प, कोल्ड्र डिंक, पानी, संगीत एकाडिमी, होटल, रेस्टोरेन्ट, मिटटी का कार्य, ठेकेदारी, किसी भी क्षेत्र में दलाली, कैरोनीन आयल, प्रकाशन, दूध की डेरी आदि व्यवसाय इस अंक वाले लोग अपना सकते है। भाग्शाली वर्ष- भाग्यांक 2 वाले व्यक्तियों के लिये अंक 2 व 7 विशेष रूप से प्रभावशाली रहते है। जब-जब इन अंको का योग आयेगा या फिर ये अंक आमने-सामने आयेंगे तो,वह वर्ष आपके लिये लाभकारी प्रतीत होंगे। 20वें व 28वें वर्ष तक की अवस्था तक आपको धन कमाने के अवसर मिलने लगेंगे।25वें व 27वें वर्ष आपके लिये परिवर्तनकारी रहेंगे। 29वें व 31 वें वर्ष में आपके लिये काफी उतार-चढ़ाव वाली स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अनुकूल नगर- दिल्ली, देहरादून, कलकत्ता, अहमदाबाद, अहमद नगर, बंगलौर, कर्नाटक, लखनऊ, नोएडा आदि शहर आपके लिये सफलतादायक सिद्ध होंगे। अनुकूल राष्ट्र- श्री लंका, तिब्बत, फ्रांस, जर्मनी, लन्दन, वियना, अमेरिका, पुर्तगाल, इथोपिया, चीन आदि देश आपके लिये शुभ रहेंगे। घर का मुख्य द्वार- जिन जातकों का भाग्यांक 2 है। वह लोग अपने घर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा, पश्चिम दिशा या फिर उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) में रखें तो आपके परिवार में प्रगृतिशीलता व सुख समृद्धि बनी रहेगी।( कल पढ़े भाग्यांक 3 के बारे में)

Monday, 11 May 2015

क्या आपका बर्थ डे दिसंबर में है ? तो जानिए केसा है आपका मिजाज



दिसंबर में जन्में युवा आलसी होते हैं आपका जन्म किसी भी साल के दिसंबर माह में हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है आप अव्वल दर्जे के आलसी हैं। आप में खुद को लेकर अजीब किस्म का अभिमान होता है। दूसरों पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति रहने के कारण आप हमेशा घर के लोगों से उलझते रहते हैं। घर और बाहर सभी से आपकी अतिरिक्त अपेक्षाएँ होती हैं। जबकि आमतौर पर आप किसी की भी अपेक्षा पर खरे नहीं उतरते। परिवार से बेपनाह प्यार करने के बावजूद परिवार से ही शिकायतें होती है।

आपको लगता है पूरी दुनिया आपको नहीं समझ सकती मगर सच तो यह है कि दुनिया के साथ तालमेल बैठाकर चलना आपको नहीं आता। कड़वा लग रहा होगा लेकिन यह सच है कि आप हमेशा यही चाहते हैं कि दूसरे आपको खुद ब खुद समझ जाएँ और बिना किसी शर्त के ढेर सारा प्यार भी लूटाए। ऐसा नहीं है कि आप बुराई की खान है। आप में से जो दिसंबर के सेकंड हाफ में हुए हैं (यानी 15 से 31 के बीच) वे कमाल के कलाकार और दार्शनिक होते हैं। लेकिन जो 1 से 14 के बीच जन्मे हैं वे आलसी और अकडू होते हैं। उन्हें जीवन में अगर एक बार कोई उपलब्धि मिल जाए तो सारी उम्र उसी से चिपके रहते हैं, आगे बढ़ने की नहीं सोचते।

इनको कल्पना लोक में ही विचरण करना पसंद है। यथार्थ से ये लोग कोसों दूर रहते हैं। कुछ दिसंबर वाले हद दर्जे के संवेदनशील होते हैं, इतने कि सामने वाला खीज जाए पर ये अति भावुकता के कारण दूसरों को परेशान करना नहीं छोड़ते। 'घरघुस्सु' इनका दूसरा नाम हो सकता है। उन्नति के कई अवसर ये इसी वजह से गवाँ देते हैं कि इनसे अपना परिवार नहीं छोड़ा जाता।

इनमें एक विचित्र किस्म का आकर्षण भी होता है। अगर ये लड़के हैं तो 16 की उम्र से ही छैल-छबीले निकलेंगे और अगर लड़की हैं तो गोपनीय रूप से इनके 4-5 अफेयर होंगे। इस माह जन्मे लोगों में कोई एक सामाजिक बुराई अवश्य होती है। शराब, सट्टा या फिर अवैध संबंध। दिसंबर में जन्मे लोगों में महफिल में छा जाने की दक्षता होती है मगर दोहरे चरित्र के होने के कारण हर कोई इस काबिलियत का फायदा नहीं उठा पाते। इनमें जलनशीलता भी होती है।

इस माह में जन्मी लड़कियाँ बेहद चालाक और कूटनीतिज्ञ होती है। अत्यंत मीठा बोलकर सामने वाले को बुद्धू बना देती हैं। सामान्यत: कम बोलने के कारण पहचानी जाती है लेकिन कम बोलने का मतलब सीधी होना नहीं है। इनको समझना टेढ़ी खीर है। अपने पत्ते वक्त आने पर खोलती है। इनमें असुरक्षा का भाव भी अतिरेक में होता है। अपने काम दूसरों से करवाने में माहिर होती है।

दिसंबर के दूसरे हिस्से में जन्मे युवाओं में अगर थोड़ी भी स्थिरता आ जाए तो दुनिया इनकी योग्यता का लोहा मानेगी। अस्थिर और चंचल प्रवृत्ति के चलते ये लोग सफलता पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। स्वयं को श्रेष्ठ मान बैठते हैं इसलिए चाहते हैं कि चारों तरफ से लोग बस इनकी तारीफें ही करें। दिसंबर में जन्मदिन वाले कई लोग दोनों हाथों से दोस्तों पर धन उड़ाते हैं और उतना ही कमाते भी हैं। इनके पास अनाप-शनाप पैसा होता है। बस, रिश्ते नहीं होते।
यही वजह है कि दिल से बहुत अच्छे होते हुए भी अपनी गलत आदतों के रहते अकेले पड़ जाते हैं। पैसा भरपूर बर्बाद करने के बाद भी इनकी सेविंग का जवाब नहीं। अपने परिवार के प्रति इनकी समर्पण भावना देखने लायक होती है। परिवार के लिए खुद को भी तबाह करने से नहीं चुकते। इन्हें चाहिए कि सेल्फ डिपेंड बने। डरपोक रहेंगे तो प्रगति नहीं कर पाएँगे।

आत्मविश्वास का हाथ थामिए फिर देखिए आपकी पर्सनेलिटी में चार चाँद लग जाएँगे। अपनी कला को निखारे। नौकरी के बजाय बिजनेस करें तो सफल रहेंगे। यूँ भी नौकरी करना आपके बस में नहीं। आपको दूसरों से काम करवाने की आदत जो है, इसलिए यह स्वभाव बिजनेस में ही चल सकता है।

फिलहाल, आपको सलाह है कि अपेक्षा ही दुख का कारण है। दूसरों से अपेक्षा करने के बजाय खुद से बड़ी-बड़ी अपेक्षा रखें और कल्पना लोक से बाहर आकर उन्हें पूरा करें।
लकी नंबर : 1, 3, 8
लकी कलर : येलो के हर शेड्स, ब्राउन, रेड, परपल
लकी डे : संडे, सेटरडे, वेडनसडे
लकी स्टोन : पन्ना और मोती

क्या आपका बर्थ डे नवंबर में है? तो जानिए केसा है आपका मिजाज



नवंबर में जन्मे युवा दयालु होते हैं
आपका जन्म किसी भी साल के नवंबर महीने में हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है कि आप इस दुनिया में सबकी भलाई करने के लिए जन्मे हैं। आप अत्यंत दयालु और परोपकारी हैं। सहनशक्ति के हिसाब से भी आप कमाल के बंदे हैं। जब तक आपका स्वाभिमान हर्ट ना हो जाए तब तक हर छोटी-बड़ी बात आप सिर से गुजर जाने देते हैं।

आप सबके बीच सामंजस्य बैठाने का काम बखूबी निभाते हैं। अक्सर दोस्तों के पैचअप करवाने की जिम्मेदारी आपकी होती है। यूं तो दुनिया आपको बड़े ही शांत और सौम्य रूप में जानती है लेकिन जिसने आपका गुस्सा देखा है वही जानता है कि आपके भीतर कितना तूफान भरा है। इसकी वजह से आप कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी का शिकार हो सकते हैं।

आप दोस्तों के लिए कुछ करें या ना करें दोस्त आप पर जान लुटाने के लिए तैयार खड़े रहते हैं क्योंकि आपके भोलेपन के वे कायल होते हैं। आपकी तरक्की से जलने वालों के लिए चेतावनी है कि नवंबर वालों के दुश्मन सीधे मुंह की खाते हैं अत: सावधान। नवंबर माह में जन्में युवाओं में प्यार का अथाह सागर होता है। ‍जिसे प्यार करेंगे वह अगर ना मिल पाए तो भी उसे भूल नहीं पाएंगे। और जो अगर प्यार मिल जाए तो उसकी खुशी के लिए खुद को मिटाकर भी तृप्त नहीं होते। फिर वही बात कि अत्याधिक दयालु जो होते हैं।

कुछ युवा जो नवंबर में जन्मे हैं और जिनकी राशि वृश्चिक या मेष है उन पर कंजूस होने का आरोप लग सकता है अन्यथा सामान्यत: नवंबर के युवा दिल के इतने उदार होते हैं कि सामने वाले के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए खुद की जेब खाली करके भी खुश रहते हैं।

पैसा इनके पास जितना भी आए, सेविंग के तरीके खोज ही लेते हैं। पूरी तरह से खाली ये कभी नहीं होते। इनके किसी ना किसी पर्स या पेंट की जेब से पैसे निकल ही आएंगे। थोड़ी व्यग्रता पर कंट्रोल कर ले तो इनके जैसा करीने से रहने वाला मिलना मुश्किल है। हर काम सुव्यवस्थित और साफ-सुथरा। इनके बचपन से लेकर अबतक के छोटे से छोटे डॉक्यूमेंट भी किसी फाइल में सुरक्षित रखे मिल जाएंगे। यहां हम आपको थोड़ा सा सनकी कह सकते हैं। कुछ-कुछ कन्फ्यूज्ड और कुछ-कुछ क्रिएटिव।

नवंबर जन्मदिन,अतीत से इन्हें गहरा लगाव होता है। अपनी हर पहली बात या पहली चीज अपनी स्मृति में संजोकर रखते है। अक्सर इस माह में जन्मे लोग संवेदनशील लेखक, पुलिस, पत्रकार, कलाकार, सर्जन या गुप्तचर विभाग में होते हैं। मन इनका बच्चों की तरह होता है इसीलिए बच्चों से इन्हें बेहद प्यार होता है।

इनका इंटि्यूशन पॉवर तो माशाअल्लाह होता है। किसी बात का पूर्वाभास होना या सूरत देखकर आदमी की फितरत पहचानना इनके लिए आसान होता है। आकर्षक मुखाकृति और मासूमियत के कारण नौकरी हो या घर, प्यार हो या दोस्ती, इनके सौ गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। अपने बालों का इन्हें विशेष ख्याल रखना चाहिए वरना गंजे हो सकते हैं। बड़ी-बड़ी हांकने की प्रवृत्ति से भी थोड़ा बचें तो सही वक्त पर सही जीवनसाथी मिल जाएगा।

नवंबर माह की लड़कियां भावुक दिखतीं है पर होती प्रेक्टिकल हैं। चोट खाने पर खुद को समय पर संभाल लेती है।

यही वजह है कि अपने दुख के लिए कभी दूसरों का कंधा इस्तेमाल नहीं करती। बेमिसाल सहनशक्ति के कारण जीवन की हर जंग जीत लेती है। अभिव्यक्ति थोड़ी सी कमजोर होती है इसलिए उम्मीद करती है कि इनके आसपास के लोग इनकी बात स्वयं समझ लें। लोग जब इन्हें समझ नहीं पाते हैं तो ये झल्ला पड़ती हैं।

नवंबर माह वालों के लिए सलाह है कि वे अपनी कम्युनिकेशन स्किल सुधारें क्योंकि इसकी वजह से अक्सर लोग आपको गलत समझ लेते हैं। अपने सौम्य स्वरूप का गलत फायदा ना उठाएं बल्कि सच्चाई और ईमानदारी आपकी ताकत है उसका इस्तेमाल करें।
कल्पना लोक से बाहर आएं जिंदगी के कई रंग बस आप ही के लिए खिले हैं आप को उन्हें समय पर पहचानना है। हमारी शुभकामनाएं।

लकी नंबर : 3, 1, 7
लकी कलर : ‍पिंक, सफेद और चॉकलेटी
लकी डे : गुरुवार और मंगलवार
लकी स्टोन : पर्ल और मून स्टोन
सुझाव : तेल में अपना चेहरा देखकर मंदिर में दान करें रूकावटें दूर होंगी।

क्या आपका बर्थ डे अक्टूबर में है? तो जानिए केसा है आपका मिजाज



अक्टूबर में जन्मे युवा शांत और स्मार्ट होते हैं
आपका जन्म किसी भी साल के अक्टूबर महीने में हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है कि आप बेहद शांत किस्म के प्राणी हैं। दिखने में इतने स्मार्ट होते हैं कि लोगों को आपसे ईर्ष्या हो सकती है। आरंभिक अवस्था में आपका आकर्षण कुछ कम हो सकता है मगर जैस-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है आपके सौन्दर्य और सेहत में सुधार आता जाएगा। विश्वास कीजिए कि यह सुधार इतना आता है कि आपको चाहने वालों की कतार बढ़ने लगती है।

आप अपने आसपास एक रहस्यमयी घेरा बनाकर रखते है। आपके दायरों को तोड़ना हर किसी के बस में नहीं है। हर किसी से आपकी दोस्ती हो भी नहीं सकती। आपका व्यक्तित्व राजसी होता है। हर चीज को नफासत से करना आपकी खूबी होती है। आपको अस्त-व्यस्त रहना पसंद नहीं है अगर अक्टूबर में जन्में होकर आप हाल-बेहाल रहते हैं तो आपको अपना इंट्रोस्पेक्शन (आत्मावलोकन) करना चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि अपने आपको आपने अब तक पहचाना नहीं।

खूबसूरत रहने और खूबसूरत दिखने में अंतर है। आप खूबसूरत ‍रहने वालों में से है भले ही आपके नाक-नक्श साधारण हो मगर कुछ ऐसी प्रबल आकर्षण शक्ति आपमें होती है कि खुद को अनूठे अंदाज में पेश कर आप सबका दिल जीत लेते हैं।

आपमें मुसीबतों से उबरने की ताकत भी लाजवाब होती है। घोर निराशा के दौर से भी आप बार-बार निकल आते हैं। किसी भी मुद्दे पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से आप बचते हैं। अपनी बात को समयानुसार नाप-तौल कर कहना आपकी पहचान है। शब्दों को बर्बाद नहीं करते पर शब्दों को सही वक्त पर सही ढंग से रखने में आपका जवाब नहीं।

अक्टूबर में जन्में कुछ युवा ‍रिश्तों की राजनीति में माहिर होते हैं। आपमें किसी बात को गहराई से समझ लेने की विशेष योग्यता होती है। दूसरे शब्दों में कहें तो आपकी शार्पनेस भी लोगों के लिए जलन का सबब होती है।
प्यार के मामले में आपका कोई सानी नहीं। अपने साथी को डूबकर और टूटकर चाहना कोई आपसे सीखे। अक्सर आपका प्यार सफल नहीं होता लेकिन आपके टूटे दिल की आवाज आपके घर के लोग भी नहीं सुन पाते हैं। प्यार में रोना-चीखना आपको पसंद नहीं। अगर आपका ब्रेकअप होता है तो बेहद शालीनता से आप खामोशी अख्तियार कर लेते हैं बजाय प्रतिपक्ष पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के। सारी दुनिया भी आपके प्यार को पहचान ले तब भी आपकी जुबान पर सात ताले ही रहते हैं आपको सामने वाले के सम्मान का इतना ख्याल होता है कि नींद में भी आप उसका अहित नहीं सोच सकते।

आपके लिए टेक्नोलॉजी, राजनीति, कला, अभिनय, बिजनेस या मेडिकल जैसे क्षेत्र उपयुक्त होते हैं। यह बात भी मानना होगी कि आप अपने क्षेत्र में शिखर तक पहुँच कर ही दम लेते हैं। निरंतर श्रेष्ठता के सपने देखते हैं और उसे पूरा भी करते हैं।

अक्टूबर में जन्मी कन्याएँ गरिमामयी सौन्दर्य की मल्लिका होती हैं। इनकी आँखें इतनी गहरी और खूबसूरत होती है कि कोई भी इनमें डूबकर सब कुछ भूल जाए तो अचरज की बात नहीं। मन की थोड़ी-सी डिप्लोमैटिक होती हैं लेकिन दूसरों का नुकसान नहीं करती। प्यार के मामले में जितनी गहरी होती है उतनी ही नादान भी। गहरी इन मायनों में कि जिसे चाहती है दिलोजान से चाहती है। सामने वाले की कमियों को नजरअंदाज करके चाहती हैं। लेकिन अगर ब्रेकअप हो जाए तो जल्दी-जल्दी किसी से भी जुड़ने की नादानी कर बैठती है और जीवन भर का गम पाल लेती है। इनमें आत्मविश्वास गजब का होता है लेकिन मन से किसी ना किसी पर निर्भर बने रहना चाहती है।

इन्हें सलाह है कि थोड़ा संवाद बढ़ाएँ। सही और गलत दोस्तों को पहचानें। अपनी प्रतिभा का शोषण ना होने दें। स्वयं को खूबसूरत बनाकर रखें यह आपकी सबसे बड़ी ताकत है।

लकी नंबर : 2, 6, 7, 8
लकी कलर : चटक मेहरून, पिकॉक ग्रीन, रॉयल ब्लैक
लकी डे : ट्यूसडे, थर्सडे, फ्राइडे
लकी स्टोन : डायमंड

क्या आपका बर्थ डे सितंबर में है? तो जानिए केसा है आपका मिजाज



क्या आपका बर्थ डे सितंबर में है? तो जानिए केसा है आपका मिजाज
तानाशाह होते हैं सितंबर में जन्मे युवा
आपका जन्म किसी भी साल के सितंबर महीने में हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है कि आप दिल के अत्यंत उदार है लेकिन एक अजीब तरह की सनक आपमें पाई जाती है। अपने आपसे आपको इतनी मोहब्बत होती है कि कोई थोड़ा-सा भी आपके विरूद्ध कुछ कह दें तो आप भड़क उठते हैं। आपमें सीखने और समझने की क्षमता अन्य की तुलना से अधिक होती है। खुद को कैसे निरंतर आगे बढ़ाया जाए यह कोई आपसे सीखें।

स्वयं की प्रगति के लिए आप थोड़े से स्वार्थी भी हो जाते हैं। आपके सबसे खास मित्र को भी कभी नहीं पता चल पाता है कि आपके अंदर क्या खिचड़ी पक रही है। यकायक कोई उपलब्धि सामने लाकर आप सबको चौंका देते हैं।

गुस्से के तो आप बादशाह है लेकिन हमेशा इसी गलतफहमी में रहते हैं कि आपके जैसा विनम्र कोई दूसरा नहीं होगा। तानाशाही आपके रग-रग में समाई है। दूसरों से काम करवाना हो तो जोंक की तरह पीछे लगना भी आपसे ही सीखना चाहिए। अपने नजदीकी लोगों से आपकी भारी-भरकम अपेक्षाएं होती है। यहां तक कि प्यार का इजहार करने में भी आपका अहंकार हावी रहता है। आप ऊर्जा से लबालब रहते हैं।

धुन के इतने पक्के कि अपने काम के लिए 24 घंटे आप भूखे-प्यासे रहकर काम कर सकते हैं लेकिन बुरी आदत यही है कि आप चाहते हैं आपकी इस आदत का लोग हरदम गुणगान करें। तारीफ के इतने भूखे होते हैं कि हर समय कोई आपको स्तुति गान करने वाला चाहिए। अक्सर चाटूकार आपकी इस कमजोरी का फायदा उठा ले जाते हैं। आप अपने आपको हर समय अप-टू-डेट रखते हैं। इसीलिए आपका हर काम अप-टू-द-मार्क होता है। किसी को कुछ देते हैं तो उसकी वसूली भी कर लेते हैं।

आपको जीवन में संघर्ष भी खूब करना पड़ता है। खासकर अगर आप करियर के मामले में बेहतरीन पोजिशन पर हैं तो हो सकता है प्यार के मामले में फिसड्डी हों, या फिर अगर प्यार आपके पास भरपूर है तो शादी का लड्डू आपकी थाली में नहीं होगा। कहने का मतलब यही कि जीवन के किसी एक क्षेत्र में आपको हमेशा खालीपन लग सकता है। आप असंतुष्ट प्राणी भी हैं।

हर समय आपको कुछ नया ना मिले तो आप कुंठित हो जाते हैं। सेक्स आपके जीवन में कई रूपों में आता है लेकिन आप बेचारे, पद-प्रतिष्ठा के मारे कभी उनका आनंद नहीं उठा पाते। आपमें अगर चिपकने की प्रवृत्ति थोड़ी-सी कम हो जाए तो आप एक शानदार इंसान के रूप में याद किए जाएंगे। अक्सर सितंबर माह में जन्मे लोग बेहतरीन सिंगर, राइटर, एडिटर या साइंटिस्ट होते हैं।

सितंबर माह की लड़कियां, उफ भगवान बचाएं इनसे। स्वयं को परम ज्ञानी समझने वाली ये कन्याएं अक्सर सच्चे प्यार से वंचित रह जाती है। इधर की उधर करने में उस्ताद हैं। कोई शक नहीं कि इनमें विलक्षण प्रतिभा होती है। कोई एक खास गुण भी होता है। लेकिन अभिमान के चलते यह उस गुण की सही कद्र नहीं कर पाती हैं।
अपार रूप-सौन्दर्य की मल्लिका होती है पर प्यार के मामले में अव्वल दर्जे की बेवकूफ होती हैं। अपना सबकुछ लूटाकर भी खुश रहती है। सच्चे प्यार को परख नहीं पाती और गलत व्यक्ति के साथ नैया डूबो लेती है। सितंबर माह में जन्मी कुछ लड़कियों का मन शीशे की तरह साफ होता है। दुनिया के छल-कपट से कोसों दूर ये मोहतरमाएं अन्याय के विरूद्ध शेरनी बन जाती है।

अगर इनका कहीं अफेयर चल रहा हो तो अपना किया-धरा सब भूल जाएंगी लेकिन अगले का पाई-पाई का हिसाब रखेंगी। अपने प्यार को लेकर पजेसीव भी होती हैं। जुबान कड़वी, अंदाज मीठा यही इनकी पहचान है। इन्हें सलाह है कि सच्चे दोस्त असली मोती की तरह होते हैं उन्हें सहेजना सीखें। मतलबपरस्ती से दोस्तों का कुछ दिन तक फायदा तो उठा लेंगी लेकिन संभव है एक दिन बिलकुल अकेली पड़ जाए।

लकी नंबर : 7, 9, 3
लकी कलर : ब्लैक, सी ग्रीन, गोल्डन
लकी डे : संडे, वेडनसडे, थर्सडे
लकी स्टोन : पन्ना और पर्ल
सुझाव : पंछियों को दाना डालें, मछलियों को घर में पालें।

क्या आपका बर्थ डे मई में है ? तो जानिए केसा है आपका मिजाज



क्या आपका बर्थ डे मई में है?
मई में जन्में युवा आकर्षक होते हैं
आपका जन्म किसी भी साल के मई महीने में हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है कि आप आकर्षक और लोकप्रिय होंगे। थोड़े से लापरवाह, थोड़े से सनकी। एक बार अगर कुछ ठान लें तो उसे पाकर ही रहते हैं। मई में जन्में जातक अव्वल दर्जे के घमंडी होते हैं लेकिन इनमें त्याग करने की प्रवृत्ति भी प्रबल होती है। स्वभाव से राजसी होते हैं।

दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि इन्हें हर चीज शाही अंदाज में चाहिए, लेकिन इसकी उम्मीद ये हमेशा दूसरों से रखते हैं। जैसे- अगर इन्हें घर साफ-सुथरा चाहिए तो ये घर के अन्य सदस्यों से अपेक्षा करते हैं कि वे यह काम करें। इनकी एक खासियत यह होती है कि भीड़ में इन्हें पहचानना आसान होता है, क्योंकि इनका आकर्षक व्यक्तित्व बरबस ही सबका ध्यान खींच लेता है।

घर में चाहे ये जितने अस्त-व्यस्त हों बाहर इनकी छवि सुव्यवस्थित मानी जाती है। इसका एक कारण यह है कि इनका ड्रेसिंग सेंस गजब का होता है। हमेशा खूबसूरत दिखना इन्हें लुभाता है। अपोजिट सेक्स के लिए हमेशा रहस्य का विषय होते हैं।

मई में जन्में युवक-युवतियों खास क्वॉलिटी यह है कि ये रोमांस के मामले में सिद्धांतवादी होते हैं। छिछोरी हरकतें इन्हें नहीं भाती। प्यार का उच्चतम आदर्श स्थापित करने की चाह होती है। कई मामलों में मई में जन्में युवा घोर परंपरावादी होते हैं। मई में जन्मीं लड़कियां अक्सर डॉमिनेटिंग पाई जाती है। जुबान की पक्की होती हैं। दोस्ती निभाने में इनका कोई जवाब नहीं। प्यार हो चाहे शादी, सेक्स इनके लिए गंभीर ‍विषय होता है, रस का नहीं। शादी से पूर्व सीमाएं लांघना इन्हें पसंद नहीं होगा।

इस माह जन्में युवा जर्नलिस्ट, लेखक, कंप्यूटर इंजीनियर, पायलट, डॉक्टर या सफल प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। राजनीति में सफलता मुश्किल से मिलती है, लेकिन अगर मिल गई तो मरने के बाद तक यश दिलाती है। लड़कियां फैशन डिजाइनर भी हो सकती हैं। अभी बताया ना कि इनका ड्रेसिंग सेंस लाजवाब होता है।
मई में जन्मी महिलाएं सुपर ईगो से भी ग्रस्त होती है। ओवर सेंसेटिव और पल-पल में रूठने वाली। इनके भीतर प्यार का असीम सागर उमड़ रहा होता है जिसे सिर्फ इनके करीबी लोग ही जान पाते हैं। बाहर वालों के लिए ये कठोर ही प्रतीत होती है।

किसी के प्रति एक बार इनका विश्वास टूट जाए तो फिर दोबारा नहीं जुड़ सकता। इन्हें अगर सफलता पानी है और सबकी चहेती बनना है तो अपने सुपर ईगो को थोड़ा त्यागना होगा। एक्स्ट्रीम में डिवोशन भी इनकी बेड क्वॉलिटी ही कही जाएगी। अगर ये बेलैंस्ड बिहेवियर अपनाएं तो इनसे प्यारा कोई नहीं। अपना सबकुछ लूटा देने वाली आदत में भी सुधार लाएं।

मई में जन्में कुछ लोग अक्सर दूसरों के लिए इतना कुछ कर जाते हैं कि सामने वाला इनकी कद्र नहीं करता और इनकी इस नादानी का फायदा उठा कर चल देता है। इनके दुश्मनों की संख्या भी अधिक होती है। क्योंकि ये लोग दिल के साफ होते हैं अत: बिना यह सोचे कि सामने वाले को उनकी बा‍त का बुरा लग सकता है, अपनी बात कह जाते है। इन्हें अपनी-अपनी हांकने की आदत भी छोड़नी होगी। दूसरों को महत्व देना सीखें, आपका महत्व अपने आप बढ़ जाएगा।

लकी नंबर : 2 3 7 8
लकी कलर : व्हाइट, मरिन ब्लू, मेहंदिया
लकी डे : संडे, मंडे, सेटरडे
लकी स्टोन : ब्लू टोपा
सुझाव : प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाएं, शिव आराधना करें।

Sunday, 10 May 2015

शाम के समय ये उपाय करने से शीघ्र मिलती है हनुमानजी की कृपा



शाम के समय  ये उपाय करने से शीघ्र मिलती है हनुमानजी की कृपा

कलियुग में हनुमानजी की पूजा सबसे जल्दी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी गई है। जो भी व्यक्ति सही विधि से बजरंग बली को मनाने का उपाय करता है, उसे जल्दी ही शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। यदि आप भी हनुमानजी के भक्त हैं और धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति पाना चाहते हैं तो यहां दीपक का एक उपाय बताया जा रहा है। यह उपाय सूर्यास्त के बाद करना है।

ये सामान्य सावधानियां उपाय करने से पहले ध्यान रखें
हनुमानजी के पूजन में साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की अपवित्रता नहीं होनी चाहिए। जब भी पूजा करें, तब हमें मन से और तन से पवित्र हो जाना चाहिए। पूजन के दौरान गलत विचारों की ओर मन को भटकने न दें। यह कुछ सामान्य सावधानियां हैं, जो कि हनुमानजी का उपाय करते समय ध्यान रखनी चाहिए।

जरूरी हैं ये चीजें उपाय के लिए : मिट्टी का दीपक, सरसो का तेल, रूई की बत्ती, सिंदूर, चमेली का तेल, अगरबत्ती, पुष्प-हार और बैठने के लिए साफ आसन।

जानिए उपाय की विधि…
शाम को सूर्यास्त के बाद किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाएं। इसके पूर्व पवित्र हो जाना चाहिए। मंदिर पहुंचकर हनुमानजी के सामने साफ आसन पर बैठें और सरसो के तेल का दीपक लगाएं। दीपक चौमुखा होना चाहिए यानी बत्ती इस प्रकार लगाएं कि दीपक को चारों ओर से जलाया जा सके। इस प्रकार दीपक लगाने के साथ ही अगरबत्ती, पुष्प आदि अर्पित करें। सिंदूर, चमेली का तेल चढ़ाएं। दीपक लगाते समय हनुमानजी के मंत्रों का जप करना चाहिए। मंत्र- ऊँ रामदूताय नम:, ऊँ पवन पुत्राय नम: आदि। इसके बाद हनुमान चालीसा का जप करें।

यदि आप पूरी हनुमान चालीसा पढऩे में समर्थ न हों तो कुछ पंक्तियों का जप भी कर सकते हैं। इस उपाय से बहुत जल्द व्यक्ति का बुरा समय दूर हो सकता है। धन संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं। दी गर्इ तीन तस्वीरें छुएं और अंदर स्लाइड़स में जानिए हनुमानजी से जुड़ी कुछ और बातें…