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Friday, 29 May 2015

सोशल एंटरप्रिन्योरशिप से पैसा कमाया जा सकता है।



क्युमैन फंड की सीईओ जैकलीन नोवोग्रैत्ज के अनुसार, भारत नवीनता की प्रयोगशाला बनता जा रहा है। यहां के सामाजिक उद्यमियों के उत्पाद और सेवाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं और पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफ्रीका आदि देशों में मदद कर रहे हैं। यह सफलता उस पुरानी धारणा को तोड़ रही है, जो सामाजिक उद्यम को परोपकार के पेशे के रूप में स्थापित करती है। इंडस्ट्री नामक सोशल एंटरप्राइज इंडस्ट्री की सहसंस्थापक और सामाजिक उद्यमी नीलम छिबर के अनुसार, यह परोपकार नहीं है। हम मार्केट सोल्यूशंस ढूंढ़ते हैं न कि कॉपरेरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी वाले समाधानों की खोज करते हैं। हम नियमित रूप से सोशल ऑडिट करते हैं। हम अपने कर्मचारियों के विकास के बारे में सोचते हैं और सामान्य व्यवसायों की तरह आगे बढ़ते हैं। सोशल एंटरप्रिन्योरशिप मॉडल सामूहिक उन्नति है, जहां दूसरों की मदद के साथ पैसा कमाया जा सकता है।

क्यों अपनाएं
ऐसा माना जा रहा है कि सामाजिक उद्यमिता भारत को प्रभावित करने वाले अगले बड़े कारकों में से एक है। सरकार, संस्थान और फंडिंग एजेंसी इस बात को महसूस कर रहे हैं कि सतत विकास का एक जरिया सोशल एंटरप्रिन्योरशिप है। इनोवरसेंट सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बिजनेस कंसल्टेंट व सीएसआर हेड निशांत सरावगी के अनुसार, यह नया उभरता हुआ क्षेत्र निवेशकों का ध्यान खींच रहा है। पहले सामाजिक समस्याओं पर काम करने वाले संस्थान आदर्शवादी, परोपकारी और व्यावसायिक गुणों से हीन माने जाते थे, लेकिन जैसेजैसे सोशल सेक्टर प्राइवेट सेक्टर के संपर्क में आ रहा है, दोनों को महसूस होने लगा है कि केवल एक ही तरीके को अपनाना ठीक नहीं है। पूरी तरह से परोपकार या पूरी तरह से पूंजीवादी होना स्थायी व बेहतर संस्थानों के निर्माण के लिए पर्याप्त नहीं है। धीरे धीरे दोनों एक मिश्रित समाधान की ओर बढ़ रहे हैं। असल में सामाजिक उद्यम अपने नए रूप में स्व स्थापित बिजनेस मॉडल हैं, जो समाज की बेहतरी के लिए काम करने के साथसाथ मुनाफा भी अर्जित करते हैं। यही बात निवेशकों को आकर्षित कर रही है। निशांत के अनुसार, जैसेजैसे भारत सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों को संबोधित कर रहा है, सामाजिक उद्यम संसाधन व पूंजी प्रबंधन के स्पैक्ट्रम में असंय अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।

फंड कहां से मिलेगा
ज्यादातर लोग जुनून और डोमेन नॉलेज के साथ सामाजिक उद्यम के क्षेत्र में आते हैं, लेकिन वे माध्यमों के बारे में नहीं जानते। सोशल सेक्टर इनवेस्टर भी मददगार साबित होते हैं। आईआईटी एम का वेंचर रूरल टेक्नोलॉजी एंड बिजनेस इनक्यूबेटर (आरटीबीआई) ग्रामीण उद्यमों को सांचे में ढालता है, मार्गदर्शन, सहयोग, आधारभूत ढांचा और प्रारंभिक पैसा प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में आइडिया स्टेज से ही कंपनियों पर ध्यान दिया है।
वे उद्यमी, जो ग्राउंड वर्क कर चुके होते हैं, बाजर की रिसर्च कर चुके होते हैं और बिजनेस प्लान का पहला ड्राट बना चुके होते हैं उनका स्वागत किया जाता है। आईसीआईसीआई बैंक का आईएफएमआर ट्रस्ट, स्कोल फाउंडेशन और सोशल वेंचर फंड्स जैसे सॉन्ग एडवाइजर्स, इलेवर इक्विटी, लोक कैपिटल, अनलिमिटेड इंडिया, ओएसिस फंड, वेंचर ईस्ट इसके लिए आर्थिक सहायता मुहैया करवाते हैं। अशोका : इनोवेटर्स फॉर दी , श्वाब फाउंडेशन, खेमका फाउंडेशन आदि भी सामाजिक उद्यमियों को सहयोग प्रदान करते हैं।
यहां से मिलेगा पैसा

एक्युमैन फंड
यह गरीबों को किफायती कीमत पर सेवाएं उपलध करवाने वाले सामाजिक उद्यमों को सहयोग देता है। स्वास्थ्य, पानी, ऊर्जा और कृषि के प्रोजेक्ट इसके मुख्य फोकस हैं। अब तक यह 25 मिलियन डॉलर भारत में निवेश कर चुका है। हर साल 5 से 7 मिलियन डॉलर निवेश की योजना बनाई जाती है, जो लोन या इक्विटी के रूप में दिए जाते हैं। एक्युमैन फंड की सीईओ जैकलीन नोवोग्रैत्ज कहती हैं, 2015 तक हम 50 मिलियन डॉलर का निवेश करेंगे।

चुनौतियां
असल में सोशल एंटरप्रिन्योरशिप लाभ कमाने वाले व्यवसाय से बहुत अलग नहीं है, लेकिन इसमें चुनौतियां ज्यादा हैं। यहां कर्मचारियों को बरकरार रखने, बिजनेस मॉडल को आगे बढ़ाने और संसाधनों में बढ़ोतरी जैसी सभी समस्याओं से गुजरना होता है। आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र वेंकट कृष्णन ने दानदाताओं और सामाजिक संस्थानों को जोड़ने के लिए गिव इंडिया की नींव रखी। गिव इंडिया पर्यावरण संरक्षण से लेकर बाल कल्याण जैसे अनेकों प्रोजेक्ट पर काम करने वाले संस्थानों के साथ काम करती है। वेंकट ने चेरिटेबल ट्रस्ट की बजाय कंपनी का निर्माण किया। कंपनी में बोर्ड है, स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स हैं। वेंकट कहते हैं, आईआईएम अहमदाबाद की डिग्री ने मेरी गंभीरता को पुख्ता किया है और इसी वजह से प्रतिष्ठित लोग बोर्ड में शामिल हुए हैं। वास्तविकता में सामाजिक उद्यमों को चलाना गंभीरता, संयम और समझ की मांग करता है। इनके संचालन के लिए ऐसे पेशेवरों की जरूरत होती है, जो टार्गेट सेटिंग, प्रदर्शन और दायित्वों को समझते हैं।
आविष्कार
120 मिलियन डॉलर का सोशल वेंचर फंड आविष्कार व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण समुदायों को फायदा पहुंचाने की कोशिश करता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि और टेक्नोलॉजी सेक्टर में यह फंड उपलध करवाता है।

मुंबई एंजल्स
मुंबई एंजल्स से फंडिंग के लिए उपयुक्त बिजनेस प्लान, टीम, ऑपरेशंस, फंडिंग की जरूरत, रेवेन्यू प्रोजेक्शन, मार्केटिंग प्लान और बिजनेस केस एनालिसिस से संबंधित पूरा विवरण होना चाहिए। प्रोजेक्ट के चयन के दौरान टीम, प्रॉडक्ट और आय जैसे सभी पहलुओं पर गौर किया जाता है। पहले का अनुभव, शिक्षा और पूर्व सफलताएं भी फायदेमंद होती हैं।

ग्रे मैटर्स कैपिटल
यह इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश करता है ताकि शहरी और ग्रामीण तकनीकी गैप को कम किया जा सके। यह सामाजिक क्षेत्र में निवेश के साथ साथ आईडीईएक्स फैलोशिप भी देता है, जो कि ग्रे मैटर्स कैपिटल फाउंडेशन और ग्रे घोस्ट वेंचर्स का सामूहिक प्रयास है। आईडीईएक्स उन युवाओं के लिए मददगार है, जो समाज उत्थान में अपना करिअर बनाना चाहते हैं।

संभावनाएं
सामाजिक उद्यम को पेशे के रूप में अपनाने के लिए दो सवालों पर गौर करना बेहतर होगा। पहला, क्या भारत सोशल एंटरप्रिन्योरशिप को विकसित करने के लिए एक उपयुक्त जगह बन रहा है? दूसरा सवाल है कि अगर यह अच्छी जगह है तो किस तरह सोशल एंटरप्राइज  को और विकसित किया जा सकता है? सवालों के जवाब तलाशने में कुछ अहम तथ्य आपकी मदद करेंगे। भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। आज इस ग्रह पर सांस लेने वाला हरेक छठा व्यक्ति भारतीय है। दूसरी अहम बात यह है कि भारत में इस तरह के संस्थानों को एक अलिखित सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त है। फिलहाल देश में करीबन 33 लाख एनजीओ काम कर रहे हैं, इसका मतलब है भारत के प्रति 400 लोगों के लिए एक एनजीओ काम कर रहा है। भारत की परिस्थिति और संस्कृति इनके विकास में योगदान देती है। आज भी भारत के चालीस प्रतिशत लोगों की आय सवा डॉलर प्रतिदिन से कम है, जो ढेर सारे सामाजिक सुधारों और मदद की दरकार रखता है।

इतनी बड़ी जनसंख्या की बेहतरी के लिए करने को ढेर सारे कामों की लंबी सूची है। भारत की जलवायु और राजनीतिक स्थिरता भी सोशल एंटरप्रिन्योरशिप के लिए अच्छा माहौल बनाती है। पाकिस्तान, सुडान और अफगानिस्तान की तुलना में भारत में काम करना कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित है। साथ ही सरकार ने ऐसी संस्थाओं को हमेशा सकारात्मक सहयोग दिया है। सरकार सोशल एंटरप्रिन्योरशिप के लिए फंडिंग, सडी से लेकर आधारभूत ढांचे के निर्माण में साथ दे रही है। सोशल नेटवर्क सोशल एंटरप्राइजेस को फलने-फूलने के लिए अच्छी जमीन दे रहा है। साथ ही विकसित हो रहे देश की वजह से पहचान का संकट भी समाप्त हो जाता है क्योंकि भारत वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका का निर्वाह कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ, जो दुनिया के सबसे बड़े सोशल एंटरप्राइजेस का संचालन करता है, भारत की बात को गौर से सुन रहा है और कोशिश कर रहा है कि भारत की जमीन पर उसकी उपस्थिति ज्यादा से ज्यादा दर्ज हो क्योंकि समृद्ध और शक्तिशाली भारत निकट भविष्य में शांतिमय विश्व की गारंटी के साथ एक महान उपभोक्ता बाजार की तरह विकसित होगा।

Saturday, 16 May 2015

अपने रेज्यूमे को दें इंप्रेसिव लुक क्योंकि इस में छिपा है कामयाबी का राज



जॉब मार्केट में कॉम्पिटिशन काफी बढ रहा है। कंपनीज में डेली न जाने कितने ही क्वॉलिफाइड लोगों के सीवी पहुंचते हैं। जाहिर है, सीवी की इस भीड में आपकी सीवी स्पेशल न हो, तो बात बनते-बनते रह सकती है। क्योंकि रेज्यूमे ही है, जिसकी वजह से इस क्राउड में आप नोटिस हो पाते हैं। अब अगर आप भी ऐसी सीवी बनाना चाहते हैं, जिसे देखते ही एम्प्लॉयर इंप्रेस हो जाए, तो बताते हैं आपको कुछ खास टिप्स, जिन्हें फॉलो करके आप पा सकते हैं न्यू जॉब..

बताएं क्वॉलिटीज

कोई भी कंपनी जॉब देने से पहले देखती है कि वह आखिर आपको ले क्यों? इसके लिए सीवी में बताना होगा कि आपके पास उस पोस्ट के लिए क्वॉलिटी क्या है? अपनी क्वॉलिटी को पहले पहचानें, फिर दो या तीन सेंटेंस में उसे लिखें। आप कंपनी की ग्रोथ में किस तरह हेल्पफुल हो सकते हैं, इसे डिस्क्राइब करना भी जरूरी है। यहां इस बात का ध्यान रखें कि सीवी में वही लिखें जो आप कर सकते हैं। आपकी क्वॉलिफिकेशन खुद बता देगी कि आप क्या कर सकते हैं।

अचीवमेंट्स करें हाईलाइट
सीवी में सबसे पहले उन अचीवमेंट्स को शामिल करें, जो दूसरी कंपनी में जॉब के समय या स्टूडेंट लाइफ में हासिल कर चुके हैं। रेज्यूमे के पहले पैराग्राफ में इनकी डिटेल होगी, तो एचआर पर्सन की नजर सबसे पहले इसी पर पडेगी और इन्हें देखकर वह आपको इंटरव्यू या टेस्ट के लिए चूज कर लेगा। ध्यान रखें, अचीवमेंट्स को बहुत डिटेल में लिखने की जरूरत नहीं है।

एक्सपीरियंस मैटर्स
ज्यादातर कंपनियां जॉब के लिए उन्हीं को प्रॉयरिटी देती हैं, जिनके पास एक्सपीरियंस होता है। सीवी में अपने एक्सपीरियंस को एक सीरीज में लिखें। अगर पॉसिबल हो, तो जिन कंपनियों में वर्क किया है, उनके नाम के साथ उनकी डिवीजन का एड्रेस भी लिख दें। चाहें तो, इसमें अपने उस हेड का नाम भी शामिल कर सकते हैं, जिसके गाइडेंस में आपने वहां वर्क किया है।

डिस्क्राइब पर्सनल प्रोजेक्ट

अधिकतर सीवी लगभग एक जैसे ही होते हैं। इसमें चेंज कैसे किया जाए, यह एक बडा क्वैश्चन है। अगर आपने अपना कोई पर्सनल प्रोजेक्ट बनाया है, चाहे वह किसी भी फील्ड से रिलेटेड हो, तो उसे सीवी में जरूर मेंशन करें। एचआर डिपार्टमेंट को सीवी में नई चीज की तलाश रहती है। जिस प्रोजेक्ट को मेंशन किया है, उसके बारे में इंटरव्यू के दौरान निश्चित ही आपसे कुछ न कुछ
जरूर पूछा जाएगा और अगर आपने अपने आंसर से इंटरव्यूवर को सेटिस्फाई कर दिया, तो समझिए जॉब पक्की।

मेंशन करियर ग्रोथ
सीवी में एक पैरा में अलग से वर्क एक्सपीरियंस के दौरान अपनी ग्रोथ को जरूर हाईलाइट करें। जब-जब आपको प्रमोशन मिला हो, आउट ऑफ टर्म इंक्रीमेंट मिला हो, तो उसके बारे में कुछ न कुछ एक-दो लाइन में जरूर लिखें। इन चीजों से पता चलता है कि वर्क को लेकर आप कितने सिंसियर रहते हैं। कंपनियां लोगों को प्रमोशन उनके क्वॉलिटी वर्क के बेस पर ही देती हैं। इसका बेनिफिट नई कंपनी में भी आपको मिलेगा। सीवी में इन चीजों का ध्यान रखेंगे, तो जॉब मार्केट में जॉब के लिए ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पडेगी।

एक्सपर्ट ओपिनियन
रिज्यूमे में सबसे इंपॉर्टेट प्रोफेशनल एक्सपीरियंस और एजुकेशन होती है। इन्हें सबसे पहले हाईलाइट करें। सीवी पूरी तरह प्रोफेशनल लैंग्वेज में हो और उसमें किसी भी तरह की एरर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह एक मार्केटिंग टूल है। अगर आपने लाइफ में कुछ खास अचीवमेंट्स हासिल किए हैं, तो उन्हें सीवी में हाईलाइट करना कभी न भूलें।

कस्‍टमर सर्विसेज से कमायें पैसे - ( Earn money from customer services)



आज के समय में चीजें बहुत तेजी से बदल रहीं हैं, साथ ही बदल रहा हमारे आस-पास का परिवेश। पहले के समय में हर चीज का एक वक्‍त होता था, मसलन शादी ब्‍याह, नौकरी हर बात का ए‍क नीयत समय होता था। लेकिन आज ऐसा बिलकुल नहीं हैं जिस प्रकार से समय की रफ्तार बढ़ रही है वैसे ही इंसानी जरूरतें बढ़ती जा रही हैं और वक्‍त का दयारा सिमट कर रह गया है। इस फास्‍ट लाईफ में एक बात जो कि हर किसी के जेहन में रहती है वो है रोजगार, जी हां, रोजगार की चिंता हर किसी को है।

आज के समय में लगभग सभी कंपनियां अपने उत्‍पाद से जुड़ी हुई बातों के समाधान के लिए अपने ग्राहकों के बीच एक तार जोड़ने की कोशिश में लगी हुई हैं। वहीं ग्राहक भी जब कोई उत्‍पाद खरीदता है तो वो चाहता है कि उन्‍हें भविष्‍य में कोई भी परेशानी आये तो वो उक्‍त कंपनी के कस्‍टमर स्‍पोर्ट से बात कर सकें और समस्‍या का समाधान कर सकें। इस मामले में आप किसी फर्म से जुड़ सकतें हैं जो कि आपको ऑनलाईन कस्‍टमट एक्‍जीक्‍यूटिव के तौर पर ग्राहकों के सामने पेश करता है। इस कार्य में आपको ऑनलाई मेल या फिर चैट के माध्‍यम से जानकारी दी जायेगी और आपको उक्‍त ग्राहक से बात कर उसे सलाह देनी होगी। ऐसी ही एक वेबसाइट (www.talk2rep.com) है। इस तरह आप घर बैठे ही पैसे कमा सकतें हैं।

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Friday, 15 May 2015

समस्या का समाधान कैसे करे ( How to solve the problem )



आदमी की जिंदगी में समस्या आने के पाँच रास्ते हैं- शरीर से, मन से, धन से, परिवार से और संसार से। आज इंसानों की सबसे बड़ी समस्या यह हो गई कि वह अपने जीवन में आने वाली समस्या का समाधान सही तरीके से नहीं कर पा रहा यही उसकी सबसे बड़ी समस्या हो गई. दुनिया में हर  छोटी -बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है। बस जरा दिमाग लगाने की जरूरत होती है। अक्सर लोग ऐसा नहीं करते हें और यही उनकी कमजोरी होती हें जिसका फायदा कोई और लेता हें

अक्सर में यही कहता हूँ कि "समस्या यह नही कि समस्या क्या हें? पर सबसे बड़ी समस्या यह की हम उन मुसीबत का हल सही तरीके से करना नहीं चाहते हें "

किसी भी मनुष्य की पहचान उसके व्यक्तित्व से ही होती है। प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी को कभी भी असफलता का मुख नहीं देखना पड़ता, वे आसानी के साथ दूसरों को प्रभावित कर लेते हैं तथा उन्हें अपना मित्र बना लेते हैं।

अध्यात्म कहता है ये समस्याएं आती रहेंगी, इनसे घबराना नहीं है। इन्हें वार्निंग अलार्म से ज्यादा मत समझें। समस्या आए तो ऊपरी सतह पर निदान न ढूंढें, सीधे उसकी जड़ की ओर चलें। बस अध्यात्म यही कहता है जड़ पर काम करो, आरंभ को स्पर्श कर लो। शुरुआत ही सम्भाल लो, फिर हर आती समस्या अपने साथ समाधान भी लाएगी।

एक सफल आदमी की पहचान है कि उसे हर परिस्थिति का सामना करना आना चाहिए। किसी मुसीबत में फंसने पर वहां से बच निकलने की कला हर आदमी को सीखनी चाहिए। और जिसे ये कला आती है वह दुनिया को जीतने का दम रखता है।

आप का अपना मैनेजमेंट गुरु केसा है (management guru)



आज के इस  कॉर्पोरेट वर्ल्ड हर कंपनी को एक टीम लीडर की सख्त जरुरत होती हैं क्योंकि एक टीमलीड़ ही उस कंपनी के सारे  एम्प्लॉय के साथ तालमेल बिठा सकता हैं .लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है की टीमलीड़ मैं ऐसी क्या खासियत होनी चाहिये की वह  कंपनी के सीईओ और एम्प्लॉय के सामने अपनी लीडरशिप की छाप छोड़े एक अच्छा लीडर तभी बन सकता है जब उसमे कुछ अच्छी बात हो जिससे वह सबको इम्प्रेस कर सके लीडरशिप के अन्दर इतनी खासियत होनी चाहिये की वह सही निर्णय लेना जनता हो और हर काम को सही तरीके से करना जनता हो. एक अच्छे लीडर की खासियत होती है वह हमेशा रिस्क पसंद करता है और यही से उसकी पहचान होती हैं की वो कितना  मेंटली रूप से स्ट्रोंग हैं ,लीडर के अन्दर इतना अच्छा कम्युनिकेशन  होना चाहिये जो कम पड़ा लिखा एम्प्लॉय भी आसानी से समझ सके .

लीडर में कभी भी यह भावना नहीं होनी चहिये कि मुझसे बेहतर और कोई नहीं कर सकता बल्कि लीडर को अपनी टीम में यह भावना लाने का प्रायस करना चाहिए कि उनसे बेहतर और कोई नहीं कर सकता.जहा तक मेरा ख्यालहैं हर टीम लीड को अपनी टीम को बेहतर बानाने के बारे में सोचना चहिये न कि अपने बारे में .एक लीडर ही अपनी टीम का हितकारी हो सकता हे इसलिए उसे हर वक़्त अपनी टीम के लिए ही सोचना चहिए जिससे टीम का मनोबल बड़े. एक अच्छे टीम लीडर बनने के लिए कुछ अच्छे विचारों कि भी जरूरत होती हे क्योकि अच्छे विचारों से ही टीम के अन्दर सकरात्मक भावना उत्सर्जित होती हे. एक टीम लीडर को अपनी टीम पर कोंट्रोल रखने से ज्यादा जरुरी हे अपना विश्वास उस टीम पर बनाए जिससे प्रोजेक्ट का आउटपुट अच्छा आये.

अक्सर कंपनी की ग्रोथ के लिए हम पब्लिसिटी करते है और वह महत्वपूर्ण भी होती है क्योंकि इसके बदोलत ही हम इस कॉर्पोरेट वर्ल्ड में अपनी कंपनी को स्थापित कर सकते हैं इस ग्रोथ मैं सबसे ज्यादा अहम भागीदारी होती ""टीम लीडर ""की क्योंकि वह उसका महत्वपूर्ण हिस्सा होता है इसलिए उसे हमेशा पब्लिसिटी की और ध्यान देना चाहिए एक अच्छा लीडर तब ही कहलाता हैं की वो  वीकली  रूप से बोंस के साथ मीटिंग करें तथा एम्प्लॉय को भी अपडेट रखें तथा कंपनी टर्म्स & कंडीशन/कंपनी पॉलिसीस को  मंथली  अपडेट करे जिससे एम्प्लॉय को कंपनी रूल्स & रेगुलेशंस याद रहें.

लीडरशिप एक आर्ट हैं और यह हर किसी मैं नहीं होती है किसी कंपनी में अपने आप को मेनेज करना भी एक कला हैं एम्प्लॉय से सारा काम टाइम पर और पूरी परफेक्शन  के साथ करवान लीडर की काबिलियत पर डिपेंड करता है अगर आप हर काम को सही तरीके से करना चाहते हे तो सबसे पहले आप करें .अक्सर लीडर्स यह सोचता है की उन्हें ओरों से बेहतर लीड करना आता है यह सोचना एक दम गलत हैं ,क्योंकि कभी -कभी बड़े लीडर्स भी  टॉप मिस्टेक्स कर जाते हैं .लीडर यही सोचता हे की जो वो कर रहा है वो सही है पर वक़्त के साथ सब कुछ बदल जाता हे मेरा तो यहीं मानना हे की लीडर की पहचान उसकी काबिलियत होती हें.

और हा यह बात उन लीडर्स को ध्यान रखना चाहिए, जरुरी नहीं की कंपनी के सभी एम्प्लॉय अगर मेरी लीडरशिप को पसंद करते इसलिए वह ही लीडर हैं पर ऐसा कुछ नहीं होता हें क्योंकि अगर बोंस आप से खुश ना होतो वो आप की लीडरशिप पोस्ट किसी और को भी दे सकता हें क्योंकि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में लीडर का काम देखा जाता हें पसंद नहीं .इसलिए लीडर्स को हमेसा अपने बोंस को खुश रखना चहिये क्योंकि बोंस खुश हें तो आप खुश हें और अगर आप खुश हें तो आप के एम्प्लॉय  खुश होंगे .

अगर लीडर ब्लोगर हें तो उसको अपने निजी विचार आइडियाज  को ब्लॉग पर पोस्ट करना चहिये क्योंकि उससे उसकी काबिलियत मालूम हो जाती हें

एक टीम लीड कभी भी गुमशुम न रहें
मोटिव करो ,बिजनेस चलाओ
खुद को करे साबित न कि दुसरों को
अपने हुनर से बने विनर
लीडर को साहसी होना चाहिए

Monday, 11 May 2015

समय की कीमत को पहचानिये | Time-based pricing



आपने अक्सर लोगों से कहते सुना होगा की समय ही धन है | पर शायद उनकी बात पर तरीके से गहन अध्ययन न किया हो क्यूंकि हम जीवन में बहूत सी बातों को यूँ ही अनसुना कर देते है | एक बात से आप सब सहमत होंगे की समय हम सब के लिए दिन में २४ घंटे ही होते है | पर ठहरिये और थोडा सा ध्यानपूर्वक निम्नलिखित तथ्यों को जानिये |

आमतौर पर एक आम भारतीय अपने जीवन में अगर:-
8 घंटे प्रतिदिन सोता है जो एक महीने में 240 घंटे अर्थात 10 दिन सोता है यानि 3 साल में एक एक साल यानि एक आम भारतीय अपने 70 वर्ष के औसतन जीवन काल में लगभग 23 साल सोने में निकाल देते है |

ये एक अकेला क्षेत्र नहीं है जहाँ हमारे जीवन का ज्यादातर समय निकलता है |
ऐसे और भी बहूत क्षेत्र है यथा ——–
निचे एक आम भारतीय की औसतन 70 वर्ष के जीवन को अलग-अलग भागों में बांटा गया है | ये आवश्यक नहीं है की हर किसी के साथ इसी तरह हो लेकिन ये वास्तविकता है की आमतौर पर एक आम भारतीय अपने जीवन में से लगभग :-

1. 23 वर्ष सोने में
2. 23 वर्ष अपने व्यवसाय अथवा नौकरी में |
3. तीन वर्ष नित्यकर्म में
4. पाँच वर्ष अनावश्यक जामों / पंक्तियों में खड़े होकर व आवागमन में
5. एक वर्ष डॉक्टरों / नर्सिंग होम इत्यादि में
6. दो वर्ष सामजिक कार्यों तथा विवाह आदि समारोह में भाग लेकर
7. एक वर्ष अपने अव्यवस्थित घर में से अपने व्यक्तिगत सामान को ढूंढने में
8. एक वर्ष फालतू की ई- मेल चैक करने में
9. दो वर्ष मोबाईल पर गपशप करने में
10. तीन वर्ष प्रतिदिन तीन बार भोजन करने में
11. दो वर्ष राजनीती गपशप में
12 तीन वर्ष टेलीविजन पर न्यूज ,क्रिकेट मैच, धारावाहिक देखने / अख़बार पढने इत्यादि में निकालता है |

अब जरा सोचिये कि अगर :-
एक व्यक्ति रोजाना मात्र 1 घंटा रोज का कम सोयें अर्थात 8 कि जगह 7 घंटा सोये तो वो एक महीने में 30 घंटे, एक साल में 365 अर्थात लगभग 15 दिन प्रतिवर्ष और अपने 70 वर्ष के जीवन काल में लगभग 3 साल और कमा सकते है |

ये एक अकेला क्षेत्र नहीं है जहाँ हम अपना समय बचा सकते है ऐसे न जाने कितने अनगिनत क्षेत्र है जहाँ पर हम अपना समय बचा कर किसी भी ऐसी जगह पर लगा सकते है जहाँ पर उसकी उत्पादकता ज्यादा हो | पर हम ये चर्चा कर क्यूँ रहे है ?

1. Rs.20000/- कमाना चाहते है तो आपके प्रत्येक घंटे की कीमत Rs.27.77 आपकी प्रत्येक मिनट की कीमत Rs.0.46 प्रतिघंटा/प्रतिदिन के हिसाब से एक वर्ष की कीमत होगी Rs.10136
 
2. Rs.50000/- कमाना चाहते है तो आपके प्रत्येक घंटे की कीमत Rs.69.44 आपकी प्रत्येक मिनट की कीमत Rs.1.15प्रतिघंटा/प्रतिदिन के हिसाब से एक वर्ष की कीमत होगी Rs.25347( यह तालिका में वर्ष में 360 दिन और प्रतिदिन के 24 घंटों को आधार माना गया है )


अब अगर हम ये माने की आप रु.50000 प्रतिमाह कमाना चाहते है ( मैं जानता हूँ की में आपके लिए कम लिखा है ; आप इससे भी कहीं ज्यादा कम सकते है ) और आप 8 घंटा के जगह 7 घंटा सोते है तो आप रु.25347 प्रतिवर्ष अतिरिक्त कमा सकते है और ये ही फ़ॉर्मूला आप अन्य अनावश्यक कार्यों में लगे समय को बचाकर भी कर सकते है |

मुझे उम्मीद है की अबतक आपको बहूत सारी कैलकुलेसन समझ आ गयी होगी और आपको ये पूर्ण रूप से स्पष्ट हो गया होगा की वास्तव में समय ही धन है किन्तु अब हमे ये समझना होगा की फोरेवर लिविंग प्रोडक्ट के साथ व्यापार करते समय हमें अपने बहुमूल्य समय किस प्रकार प्रयोग करना है |

कई बार अपना समय ऐसे लोगों पर लगाते है जहाँ से हमें कोई विशेष उत्पादकता नहीं आ रही होती | अगर आप सिर्फ अपने मस्तिष्क में ये तथ्य बिठा ले की आपके प्रत्येक मिनट या घंटे की इतनी कीमत है तो मैं आपको विश्वास दिला सकता हूँ की आपकी कार्यशैली में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आ जायेगा | परन्तु आपको ये अवश्य सुनिश्चित करना होगा की आप अपने प्रत्येक घंटे की आंकी गयी कीमत को वसूल करने के लिए स्वयं से पूर्ण रूप से कटिबद्ध है |

क्या आपने सोचा की अगर आप आपने जीवन में अनावश्यक कार्यों में लगे समय से थोडा-थोडा समय प्रतिदिन बचाकर अपने पुरे जीवन में सिर्फ पाँच वर्ष भी बचा ले और आपको फोरेवर लिविंग प्रोडक्टस के व्यवसाय से मात्र Rs. 500000 प्रतिवर्ष की आय आ रही हो तो आप आपने बच्चों/ परिवार के लिए इस बचे समय का सदुपयोग करने के कारण मात्र Rs.3 करोड़ कमा सकते है ? निर्णय आपका |

   जब यह साफ़ लगने लगे की लक्ष्य को पाना नामुमकिन है तो बदलाव अपनी कोशिस में करें , लक्ष्य में नहीं” |

रुपये के नियम को समझें और आगे बढ़ें



पये का अपना एक नियम है, ऐसा नियम जिसे व्यक्ति स्कूली शिक्षा और किसी किताबी ज्ञान से नहीं सिख सकता है। पैसे के नियम को व्यक्ति खुद से ही सिख सकता है। जो रुपये के मूल सिद्घांत को सिख पाने में कामयाब होता है वह अपनी वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर लेता है। वहीं जो रुपये के नियम को समझने से चूक जाता है वह कभी स्वतंत्र रूप से अपनी वित्तीय जरूरतों को हासिल नहीं कर पाता है।

यदि आपकी समस्या पैसा है तो इस मुश्किल का हल पैसे से नहीं हो सकता। क्योंकि जो समस्या है वही हल कैसे साबित हो सकती है। इसलिए पैसे का गुलाम बनने की बजाय उसके मास्टर बनना जरूरी है। वहीं जब व्यक्ति पैसे को अपने नियंत्रण में कर लेता है तो वह वित्तीय स्वतंत्रता के पथ पर अग्रसर हो जाता है। व्यक्ति को स्वयं के अनुभव ही पैसे का सही उपयोग सिखाते हैं। पैसे की बचत और निवेश से ज्यादा आज के दौर में समय की बचत करना महत्वपूर्ण है। बिना किसी अनुभव और वित्तीय जानकारी के अमीर बनने की चाह नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ऐसे इरादों की नींव अक्सर खोखली होती है। जिसमें व्यक्ति के हाथ में केवल निराशा ही लगती है।

व्यक्ति को हमेशा अपने पैसे के नियंत्रण में रहना चाहिए, कहने का तात्पर्य यहां ये है कि अपनी आय के मुताबिक ही अपने खर्चों को नियंत्रण करना चाहिए। यदि आय कम और खर्च ज्यादा है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति कभी भी वित्तीय स्वातंत्रता को हासिल नहीं कर सकता है। व्यक्ति को कभी भी कोई काम केवल पैसा कमाने के उद्देश्य से ही नहीं करना चाहिए। यदि आप केवल पैसे के लिए काम करते हैं तो कभी अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकते। ऐसा करने वाला व्यक्ति जिंदगी भर अपने वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में ही लगा रहता है।

हमेशा अपनी जरूरतों के मुताबिक ही कोई भी निवेश करें, साथ ही अपनी वित्तीय जरूरतों को समझें और उस हिसाब से ही उसे हासिल करने की रणनीति बनाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो व्यक्ति अपने पैसों का सही उपयोग नहीं कर सकता है। साथ ही पैसे के अच्छे और बुरे व्यवहार को समझना चाहिए। जिस पैसे से मूल जरूरतों की पूर्ति हो, जिससे किया गया निवेश सकारात्मक हो और किए गए निवेश की वैल्यु बढ़ती जा रही है। इसका मतबल ये है कि आपने अपनी मेहनत के पैसों का सही उपयोग किया। लेकिन यदि निवेश के दृष्टिकोण और उसके सही उपयोग को लेकर आपका नजरिया स्पष्ट नहीं है तो ये पैसों का बुरा व्यवहार कहलाएगा। यदि व्यक्ति पैसे के अच्छे और बुरे व्यवहार पर विचार किए बिना केवल मेहनत करता जाता है तो हो सकता है वह कभी भी एक स्वतंत्र वित्तीय वातावरण ना हासिल कर पाए।

इक्विटी, बॉन्ड, कमोडिटी और रियल एस्टेट में किए गए निवेश से व्यक्ति वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। लेकिन इसके भी सही निवेश का ज्ञान निवेशक के पास होना जरूरी है। व्यक्ति का वित्तीय ज्ञान ही उसे वित्तीय रूप से मजबूत और स्वतंत्र बनाता है। पैसों के नियम को अपनी जरूरतों के हिसाब से समझें और जब व्यक्ति ऐसा करता है तो वह देखेगा पैसा ही उसके लिए पैसा बनाता है। वहीं जब व्यक्ति इस नियम से चलता है को वित्तीय रूप से मजबूत और खुशहाल होने से साथ-साथ अपनी आनेवाली पीड़ियों के लिए भी काफी धन जमा कर सकता है।

व्यक्ति को सही वित्तीय नियंत्रण की परिभाषा को समझना चाहिए। वहीं पैसा व्यक्ति के जीवन में दवाई की तरह काम करता है। जी हां दवाई, जिसका कम या ज्यादा डोज आपको को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए वित्तीय संतुलन होना बेहद जरूरी और पैसे का ये संतुलन केवल इसके फ्लो से समझा जा सकता है। ऐसे में पैसे के व्यवहार और इसके फ्लो को समझना काफी आवश्यक है। उसके बाद ही जाकर ही व्यक्ति सही रूप में वित्तीय स्वतंत्रता को हासिल कर सकता है।

महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है फाइनेंशियल प्लानिंग



महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है फाइनेंशियल प्लानिंग
वर्तमान समय में भारतीय शहरों में दोहरी आय अर्जित करने वाले परिवारों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। महिलाएं भी दूसरे कमाऊ शख्स के रूप में भरपूर योगदान दे रही हैं। मौजूदा समय में, अकेली कामकाजी शहरी महिला स्वतंत्र रूप से अपनी जिंदगी की वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के लिये तैयार है।
हालांकि, महिलाओं को मिल रहे सशक्त सामाजिक-आर्थिक लाभ के बावजूद, वित्तीय मामलों में कम भागीदारी और फाइनेंशियल प्रोडक्ट की कम जानकारी के कारण अधिकतर महिलाएं अपने निजी वित्त को संभालने के लिये पूरी तरह से तैयार नहीं हैं।
वैल्यूनोट्स के सहयोग में एचडीएफसी लाइफ द्वारा किये गये सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि भारतीय शहरी महिलाएं जिंदगी के विभिन्न मामलों (संभावित एवं असंभावित) तथा वित्तीय उत्पादों के विषय में कम जानकारी रखती हैं।
उत्पाद की जानकारी एवं मामले के प्रति जागरूकता के बीच अंतर स्पष्ट नजर आता है, जो दर्शाता है कि जिन उत्पादों में वह निवेश करती है, वह उनकी वित्तीय जरूरतों के अनुकूल नहीं हैं।
हालांकि, महिलाओं में व्यवस्थित ढंग से बचत की भावना प्राकृतिक रूप से होती है और निवेश के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण उन्हें इस कार्य में सक्षम बनाता है। अध्ययन से पता चला है कि अधिकांश महिलाएं जीवन के शुरूआती दौर में निवेश शुरू नहीं करती है।
संपत्ति का निर्माण करने और आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य को पूरा करने के लिये उचित योजना तैयार करना जरूरी है। महिलाओं को खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग का सहारा लेना चाहिए। फाइनेंशियल प्लानिंग के प्रमुख चरण निम्रलिखित हैं:

पहला चरण उद्देश्य का निर्धारण
महिलाओं को वास्तविकता से जुड़े वित्तीय उद्देश्य (लक्ष्य) तय करने चाहिए। लक्ष्यों में घर खरीदना, सेवानिवृत्त होने के बाद आय के लिये साधन तैयार करना, कारोबार शुरू करना, विदेश यात्रा, कार खरीदना, बच्चों की शादी और शिक्षा आदि के लिए पूंजी एकत्रित करना इत्यादि कुछ भी शामिल हो सकता है।
धन राशि के निर्धारण एवं उद्देश्य को पूरा करने के लिये समय-सीमा का निर्धारण करना दूसरा महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि यह आपके निवेश उपकरण के विकल्प को निर्धारित करता है और उद्देश्य की कार्यसिद्धि को प्रभावित करता है।

दूसरा चरण योजना तैयार करना
वित्तीय योजना आय और खर्चों एवं भविष्य के खर्च एवं आमदनी की योजना के साथ शुरू होती है। इससे आपको पता चलता है कि वर्तमान एवं भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिये आपको कितनी राशि की आवश्यकता पड़ेगी। समय-सीमा, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के उपलब्ध प्रकार जैसे विभिन्न कारकों पर भी विचार किया जा सकता है।
आकस्मिक खर्चों की व्यवस्था करना भी अनिवार्य है ताकि बीमारी, जीवनसाथी की मृत्यु अथवा नौकरी खोने जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी बचत को जारी रखा जा सके। चूंकि, महिलाओं की राह में बाधा आने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए उन्हें कामकाजी होने के दौरान बचत के अवसरों पर ध्यान देने की जरूरत है।
वित्तीय परिसंपत्तियों का अनुचित डाइवर्सिफिकेशन पोर्टफोलियो से पर्याप्त आय उत्पन्न करने के सामथ्र्य को सीमित कर सकता है और लंबी अवधि में मुद्रास्फीति की वजह से उसका मूल्य कम हो जाता है। महिलाओं की जीवन प्रत्याशा अधिक होने के कारण उनके लिए लंबी अवधि की योजनाएं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
लंबी अवधि के दौरान, बांड्स के चक्कर में इक्विटी को नजरअंदाज करने का मतलब है कि आपका पोर्टफोलियो सही मायनों में डाइवर्सिफायड नहीं है और महंगाई से उत्पन्न चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। वित्तीय योजना के लिये सही प्रारूप तैयार करने में सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर से विचार-विमर्श करना उचित रहेगा।

तीसरा चरण निवेश की शुरुआत
अनुशासित निवेश वित्तीय योजना की सफलता की अहम कुंजी है। वर्तमान में अधिकतर निवेश ऑनलाइन किए जा सकते हैं। हालांकि, निवेश से पहले प्रत्येक निवेश विकल्प की प्रकृति एवं संबंधित जोखिम के विषय में पढऩा और समझना बेहद जरूरी है।

चौथा चरण योजना की समीक्षा
एक बार निवेश शुरू हो जाने के बाद, फिर उसे जारी रखने के लिए बढ़ती आय और खर्च, नई परिसंपत्ति की प्राप्ति अथवा जिम्मेदारियों में इजाफा या बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा करते रहना उचित है। उदाहरण के लिए, योजना की समीक्षा विभिन्न निवेश विकल्पों के प्रदर्शन के आधार पर की जानी चाहिए। एक समय के बाद जब शेयर बाजार अपनी चाल बदलता है, तो वह आपकी धन की वृद्धि में बाधा डाल सकता है।
इसलिए आपको अपने कुछ इक्विटी निवेश को भुनाने या अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर और इक्विटी खरीदने पर विचार किया जा सकता है। जैसे ही आप अपने लक्ष्य तक पहुंचती हैं (जैसे कि बच्चे का कॉलेज में दाखिला याशादी), तब आपको इक्विटी निवेश से बाहर निकलने और अपनी संचित पूंजी को सुरक्षित करने के लिये उन पैसों का निवेश डेट में करना अनिवार्य हो जाता है।

पांचवां चरण धन की निकासी
जिन आवश्यकताओं या लक्ष्यों को पूरा करने के लिये आप बचत कर रही हैं, यदि उनका समय नजदीक आ रहा है तो आपको अपने निवेश से पैसों की निकासी करने की जरूरत होती है। जीवन बीमा पॉलिसी के मामले में, आपको बीमा कंपनी के पास अपनी पॉलिसी दस्तावेज जमा कराने होते हैं और परिपक्वता आय को प्राप्त करने के लिये आगे की कार्यवाही करनी पड़ती है।
आपको अपने फाइनेंशियल एडवाइजर के साथ बैठने की भी जरूरत पड़ती है और आपके निवेश (यदि कोई है) से पैसों की निकासी करने से जुड़े कर संबंधी मामलों को समझना पड़ता है।

शेयर बाजार में पैसा लगाने के लिए आपका मन कुलबुला रहा है तो इन चार मंत्रों पर गौर करें।



अगर शेयर बाजार में पैसा लगाने के लिए आपका मन कुलबुला रहा है और आप अनाड़ी हैं, तो आपको इन चार मंत्रों पर खास तौर से गौर करना चाहिए।

1. सही कंपनी चुनिए
मुनाफा बढ़ाने वाली बेहतर कंपनी चुनें, जिसने अपने शेयरधारकों की पूंजी पर कम से कम 20 फीसदी लाभ अर्जित किया हो। आदर्श रूप से एक दीर्घकालिक निवेश (5वर्ष से अधिक) आपको कंपनी के विकास में भाग लेने की अनुमति देता है। कम अवधि ( 3 से 6 महीने) में शेयर का प्रदर्शन कंपनी के मूल सिद्धांत से कम तथा बाजार भाव से अधिक प्रेरित होता है, जबकि लंबे काल में सही कीमत की प्रासंगिकता कम हो जाती है।

2. अनुशासित रहें
शेयर में निवेश एक लंबी सीखने की प्रक्रिया है,जिसमें आप अपनी गलतियों से सीखते हैं। ये कुछ तथ्य हैं जिनसे ये प्रक्रिया सरल हो सकती है। निवेश में विविधता लाएं। यानी किसी एक शेयर में अपने कोष का 10 फीसदी से ज्यादा न डालें भले ही वो एक रत्न कंपनी हो, दूसरी ओर बहुत अधिक शेयरों में भी निवेश न करें, क्योंकि उनकी निगरानी करना मुश्किल होता है। एक कम सक्रिय लंबी अवधि के निवेशक के लिये 15-20 विभिन्न शेयर अच्छी संख्या है। अपनी कंपनी के प्रदर्शन का विश्लेषण उसके तिमाही परिणाम, वार्षिक रिपोर्ट और समाचार लेखों से करते रहें। जरूरत पड़ने पर एक अच्छा ब्रोकर ढूंढ़े तथा निपटान प्रणाली समझें। हॉट टिप्स पर ध्यान न दें,क्योंकि अगर ये सच में काम करती तो शेयर बाजार में निवेश करने वाले सभी निवेशक करोड़पति होते। अधिक खरीदने के प्रलोभन से बचें क्योंकि प्रत्येक खरीद एक नए निवेश का निर्णय है। एक कंपनी के उतने ही शेयर खरीदें जितने आपके कुल आवंटन योजना के अनुसार हैं।

3. निगरानी और समीक्षा 
अपने निवेश की नियमित निगरानी व समीक्षा करें। खरीदे गए शेयर के तिमाही परिणामों की घोषणा पर नजर रखें और सप्ताह में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो वर्कशीट पर शेयर की कीमतों में आए सुधार लिखते रहें। ये कार्य अस्थिर समय के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है जब आप मूल्य चुनने के लिए बेहतर अवसर पा सकते हैं। जैसे कि पता लगाएं कि आप 50 पैसे के सिक्के में 1 रुपया कैसे खरीद सकते हैं। इसके अलावा ये भी जांचे कि जिन कारणों से आपने पहले शेयर खरीदा था, वे अभी भी वैध हैं या नहीं। साथ ही एक वार्षिक समीक्षा प्रक्रिया अपनायें जिससे आप अपने कुल परिसंपत्ति आवंटन के भीतर इक्विटी शेयरों के प्रदर्शन की जांच कर सकें। अगर जरूरी हो तो आप नियमित अंतराल पर समीक्षा कर सकते हैं क्योंकि आपके जोखिम प्रोफाइल और जोखिम क्षमता में 12 महीने की अवधि में परिवर्तन हो सकता है।

4. गलतियों से सीखें
 समीक्षा के दौरान अपनी गलतियों को पहचानें और उनसे सीखें,क्योंकि आपके खुद के अनुभव को कोई नहीं हरा सकता। यही अनुभव आपके ज्ञान के मोती बनेंगे जो निश्चित ही आपको एक सफल शेयर निवेशक बनाने में सहायक होंगे।

Wednesday, 6 May 2015

मारूति स्विफ्ट डिजायर या फोर्ड एस्पायर, कौनसी कार है बेहतर, आइए जाने

मारूति स्विफ्ट डिजायर या फोर्ड एस्पायर, कौनसी कार है बेहतर, आइए जाने

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं देश की दो प्रिमियम सेडान कारों पर कम्पेरिजन, इनमें से एक तरफ है मारूति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर और दूसरी तरफ है फोर्ड की अपकमिंग कार फिगो एस्पायर। इस कम्पेरिजन में हम आपको बताएंगे कि इन दोनों में से कौनसी कार है किफायती और किसने चलाया है देश की जनता पर अपना जादू। इस सभी बातों पर विस्तार से गौर करेगे इस कम्पेरिजन में, आइए जानें।

आइए जानें। स्विफ्ट डिजायर मारूति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली प्रिमियम सेडान है जिसकी हर महिने 15-17 हजार यूनिट बेची जाती है। इस कार को मारूति ने फरवरी, 2012 में एक सब-4 मीटर कार बनाकर देश के सामने रखा और यह कॉन्सेप्ट काफी हिट भी हुआ। डिजायर के इस बढते तुफान को रोकने के लिए हुडंई आई-20 और होण्डा की सबसे पोपुलर कार होण्डा सिटी ने जमकर कोशिशें की लेकिन डिजायर के बढते क्रेज को नहीं रोक पाई। आज स्विफ्ट डिजायर देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली प्रिमियम सेडान कार है जो दिन-ब-दिन अपनी लोकप्रियता में इजाफा करती ही जा रही है। इससे पहले आई प्रिमियम हैचबैक स्विफ्ट ने देश में जमकर धूम मचाई थी।

किसमें है दम ज्यादा, किसका माइलेज बेहतर
स्विफ्ट डिजायर में 1.3 लीटर DDiS डीजल इंजन और 1.2 लीटर K सीरीज का पेट्रोल इंजन लगा है। इसका डीजल वेरिएंट 74बीएचपी की पावर और 190एनएम का टॉर्क जेनरेट करता है, वहीं पेट्रोल ट्रिम 83बीएचपी की पावर और 115एनएम का टॉर्क जेनरेट करने में सक्षम है। करता है। माइलेज की बात करें तो इसका डीजल मॉडल 26.59 किलोमीटर प्रति लीटर, वहीं पेट्रोल मॉडल 20.85 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देगा। वहीं फिगो एस्पायर के पेट्रोल वेरिएंट में 1.2 लीटर का TiVCT इंजन लगा है जो 88-90बीएचपी का पावर और 120एनएम टॉर्क जेनरेट करेगा, वहीं इसके डीजल ट्रिम में 1.5 लीटर TDCI इंजन लगा है जो 75बीएचपी का पावर और 195एनएम का टॉर्क जेनरेट करने में सक्षम होगा।

अपनी कंपनी बनाने के लिए नहीं है पैसा तो, क्राउड फंडिंग करेगा अापकी मदद



अपनी कंपनी बनाने के लिए नहीं है पैसा तो, क्राउड फंडिंग करेगा अापकी मदद

 नया बिजनेस शुरू करने के लिए कोई दमदार बिजनेस आईडिया लेकर नाज – पहचान के किसी धनवान व्यक्ति को कन्विंस करना या रिश्तेदारों को परिवार के बच्चे के “थोड़ी मदद” के लिए राजी करना फण्ड जुटाने के कुछ पुराने तरीके हो गए | आज तो इन्टरनेट पर ऐसे कई मंच उपलब्ध है जहाँ आपके बिजनेस आईडिया को देखकर पैसा लगाने वालों की भीड़ आपके बिजनेस में पैसा लगाने के लिए चली आती है फंडिंग का यह कांसेप्ट है “क्राउड फंडिंग” |
क्राउड फंडिंग का मतलब जहाँ फण्ड क्रौव बहुत से लोगो की और से आ रहा हो जहाँ संभानाओं से भरे और पूरी तरह व्यवहारिक बिजनेस आईडिया के दम पर आप भी निवेशकों की इस भीड़ से अपने लिए फण्ड जुटा सकते है भारत मैं यह कांसेप्ट ज्यादा पुराना नही है लेकिन एंटरप्रेन्योर्शिप में लोगो के तेजी से उतरने पर इस कांसेप्ट को यहाँ भी अब ख़ास महत्व दिया जाने लगा है ।

इसे शुरू करने के लिए, सबसे पहले आपको अपनी वेबसाइट पर गूगल एनालिस्ट इंस्टॉल करना होगा इसके बाद आप क्रोम पर इसे डाउनलोड कर लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। इसमें लोगों से अपने काम की शुरुआत करने के लिए फंड मांगा जाता है जो कि चंद रुपयों से लेकर हजार या लाख हो सकता है। इससे आप अपनी कंपनी या व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं। आपके व्यवसाय में जिन लोगों ने फंड दिया है वे अपनी राशि के हिसाब से आपके शेयरहोल्डर हो जाते हैं।

भारत में ऐसी गतिविधियों के लिए कोई साफ रेगुलेशन नहीं हैं इसलिए ऐसे प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखने के लिए भारत में एक प्रभावी फ्रेमवर्क का होना बहुत जरूरी है।ऐसा फ्रेमवर्क बनने पर ही क्राउड फंडिंग के नाम पर मनी लान्ड्रिंग गतिविधि या कोई फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिल पाएगी। एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिभूतियों की बिक्री वाले क्राउड फंडिंग गतिविधियों को सेबी के मौजूदा नियमों के तहत रेगुलेट किया जा सकता है।

मंच का चयन – क्राउड फंडिंग के लिए का मंच है पर हर किसी का विशेष क्षेत्र है हालांकि कुछ एक साईटस ऐसी है जिन पर निवेशक फण्ड देने के लिए तैयार रहते है प्रोजेक्ट के लिए फण्ड जुटाने के लिए फंडिंग उपलब्ध करवाती हो | जिस आईडिया के लिए फण्ड जुटाना चाहते है उसके बारें में डाले गए टेक्स्ट या विडियो या फुटेज में आईडिया की प्रति पैशन दिखाएँ |

Indiegogo – इंडीगोगो दुनिआभर के प्रोजेक्ट निर्माताओं के लिए एक खुला मंच है | क्राउड फंडिंग के लिए यह एक ऐसा जनरल मंच है ,जहाँ किताबो से लेकर बिजनेस शुरू करने तक के लिए फंडिंग की जाती है |

kickstarter – किकस्टार्टर पर क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स को लगाया जाता है ,फिर चाहे वह तस्वीरों की किताब प्रकाशित करवानी हो या फिर ब्लुटूथ से खुलने वाला ताला बनाने का | इस साईट पर दिय प्रोजेक्ट्स के नीचे दिया गया है की कितने लोगों ने फण्ड दिया ,या कितनो ने वापस लिया|

Ingniteintent – इग्नाईट intent भारत की क्राउडफंडिंग साईट है जो नए और क्रिएटिव आइडियाज के लिए फण्ड जुटाने मैं काफी मदद करती है

Friday, 1 May 2015

कैसे बनाये फैशन डिजाइनिंग में करियर



आज हर कोई फैशन के पीछे भाग रहा है और लोगों की पसन्द को देखते हुए फैशन के क्षेत्र में नित नए परिवर्तन और प्रयोग हो रहे हैं। इन्ही परिवर्तनों और प्रयोगों को देखते हुए फैशन डिजाइनर की मांग धीरे-धीरे बढती जा रही है क्योंकि फैशन डिजाइनिंग वर्तमान समय में सबसे ज्यादा ग्लैमरस प्रोफेशन माना जाता है इसलिए फैशन डिजाइनिंग में अपना भाग्य आजमाने के  अच्छे अवसर उपलब्ध हैं। फैशन डिजाइनिंग के विभिन्न क्षेत्रों जैसे डिजाइन वियर प्रोडक्शन, फैशन मार्केटिंग, क्वालिटी कंट्रोल आदि में करियर बनाया जा सकता है।

बीएससी फैशन डिजाइन

तीन वर्षीय इस कोर्स में स्टूडेंट्स को मॉडलिंग भी सीखाई जाती है। इसके अलावा फैशन की बारीकियों के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया जाता है। किसी भी कंपनी व मॉडल के कपड़ों को किस तरह लोगांे के सामने रखा जाए, इसके बारे में बताया जाता है। यह कोर्स मॉडलिंग के क्षेत्र में भी अपार संभावना पैदा करता है। इसको करके जॉब के कई ऑप्शन मौजूद हैं। कई ब्रैंडेड कंपनियों को आज प्रफेशनल लोगों की जरूरत है। ऐसे में इस कोर्स को करने के बाद आसानी से जॉब पा सकते हैं। इसमें बेहतर पैकेज भी मिलता है।

फैशन डिजाइनिंग हेतु योग्यताएँ

फैशन डिजाइनिंग कोर्स की पहली योग्यता रचनात्मकता और कला होते हैं। डिजाइनिंग करने वालों को रंगों और डिजाइन के साथ हमेशा कुछ न कुछ नया प्रयोग करने से नहीं घबराना चाहिए। इस कोर्स के लिए आपके अंदर रचनात्मकता के साथ अच्छी कम्यूनिकेशन स्किल्स का होना भी जरूरी है। फैशन जगत में फैब्रिक और एक्सेसरीज की जानकारी भी बहुत जरूरी है। फैशन जगत से भी रू-ब-रू रहना पड़ता है जिसके अनुसार वे अपने डिजाइंस मार्केट में लाते हैं।

कहाँ से करें कोर्स

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद

पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन, नई दिल्ली

स्कूल ऑफ फैशन टैक्नोलॉजी, पुणे

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन डिजाइनिंग, चंडीगढ़

फैशन जगत में फैशन के तौर पर आठ हजार रुपए प्रति माह आसानी से कमाए जा सकते हैं और दो-तीन वर्षों के पश्चात ही यह राशि 50,000 से 60,000 रुपए प्रति माह हो सकती है। यह कोर्स खत्म होते ही नौकरी लगना तय होता है। भारत भी अब इस इंडस्ट्री में किसी से पीछे नहीं है।

वेबसाइट के माध्यम से पैसा कमाने का राज



वेबसाइट के माध्यम  से पैसा कैसे कमाने का राज

आज मैं आपको picvend.com   के माध्यम से आपको बताना चाहता हूँ कि किस प्रकार बेवसाइट गूगल (Google Adsence)से जुङ कर अपने  वारे न्यारे कर रही है। आज टीवी चैनल पर कोलगेट, पेप्सी,कोकाकोला आदि के बाद यदि आप को कोई विज्ञापन मिलेगा तो वह बेवसाइट का होगा। चाहे वह olx.com हो या Quicer.com,Yatra.com,Justdial.com या wechat  जैसी बेवसाइट Google Adsence से सभी लाखो रुपये प्रतिदिन कमा रही है।

 Google ने इस Program  की शुरुआत अप्रैल 2006 मे की थी यह प्रोगम के According गूगल एडवर्ड के माध्यम से जो कस्टमर का एड लेता हे उसका 68% गूगल एडसेड के माध्यम से अपनी यूजर वेवसाइट को देता है! और स्वयम  32% की इनकम करता है!प्रोगा्म का लाभ लेकर आज करोडो बेवसाइट रोज लाखों Rs कमाती  है! एक सर्वे के अनुसार  India  की क्लिक इन्डिया एक ऐसी वेवसाइट है जो Per Months  तीन करोड  Rs. कमाती है! यह भारत की सबसे अधिक आनलाईन पैसा कमाने वाली वेवसाइट है! और दुनिया की सबसे ज्यादा आनलाइन पैसा कमाने वाली वेवसाइट मासवेल है! जे करीब बारह करोड  Rs  Per months कमाने वाली वेवसाइट है!

 भारत की कई ऐसी वेवसाइट है जो की गूगल एडसेस से Per months लाखों का कारोवार कर रही है! कई Blogs भी आज लाखों रुपय  Per Months कमा रहे है! ब्लोग पर तो ना स्पेस का खर्च ना डोमेन का खर्च बस ये सोचो की जितने ज्यादा यूजर आपके ब्लाग या वेवसाइट पर आते है! इतनी ही आपकी जेब मजबूत होती है! अर्थात जितने यूजर आप अपने वेवसाइट या ब्लाग पर लाने मे करम्याब होते है! डतनी ही आपकी इनकम होगी  आजकल आप देख रहे है! कि कई वेवसाइटों पर एसे विज्ञापन मिलंगे जो आपको क्लिक करने के लिए मजबूर करते है! और अपने वारे न्यारे कर रहे है! 

कैसे कमाए फेसबुक और ब्लॉग से पैसा



कैसे कमाए फेसबुक और ब्लॉग से पैसा

ब्लॉग से पैसा कमाना आसान है। ब्लॉग से पैसा कमाने के बहुत अनुप्रयोग,संलग्न मौजूद है और ये बहुत आसान है।
गूगल एड्सेन्स के साथ रजिस्टर करे

गुगल जिस विज्ञापन अनुप्रयोग से संकेतस्थलों और् चिठ्ठों पर अपने ईश्तेहार चलाती है उसका नाम है एडसेन्स जब गुगल के एड-सेन्स खाते मे अपना नाम दर्ज कराते हैं तो गूगल आपको एक कोड देगा जिसे आपको अपने चिठ्ठों पर चिपकाना होगा । जब आप ऐसा कर लेते है तो आपक्को गूगल के एक दुसरे उत्पाद् जिसका नाम उन्होने गूगल एनालिटिक्स अर्थात गूगल विश्लेषक रक्खा है उसका उसका उपयोग करना पडेगा। वहा पर जाकर अपना नाम दर्ज कीजिये। गूगल विश्लेशक आपके ब्लॉग के परफार्मन्स पर नजर रखेगा और आपके स्थल पर विश्व के किस भाग से कितने लोग आये।

निराश मत होईये। जैसे जैसे आपके ब्लॉग पर आवागमन मे वॄद्धी होती जायेगी आपकी लोकप्रियता और खोज-पृष्टों पर आपकी वरीयता बढती जायेगी। जितना आपका ब्लॉग जनप्रिय होता जायेगा उतनी आपकी आमदनी भी बढती जायेगी। 

 फेसबुक लिंक हर कोई आपको लगता है कि हर कोई मस्ती के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं लगता है कि या आप कुछ लड़कों और लड़कियों के सामान को बेचने के लिए एक नेटवर्किंग उपकरण के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं

लगता है everyone.Do तक कि एक सामाजिक ऑनलाइन समुदाय है? स्पष्ट कारण दोनों होगा. इन तरीकों से आप कुछ भी खरीदने के लिए या आप 'राज' बताने के लिए किसी को भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है. आप all.There पर कोई पैसा खर्च किए बिना अभी अपने Facebook के साथ पैसा बनाने शुरू कर सकते हैं तथ्य की बात के रूप में फेसबुक पर पैसा बनाने के लिए कोई 'राज' कर रहे हैं. लोगों को कहीं और पैसा बनाने के लिए उपयोग करते हैं,


Wednesday, 29 April 2015

शेयर मार्किट में निवेश कैसे करे How to invest in stock market



शेयर मार्किट में निवेश कैसे करे

यदि आपको शेयर बाजार के बारे में कम जानकारी है अथवा आप इस बाजार के नये खिलाड़ी हैं या आप चाहते तो हैं कि बाजार में निवेश करें मगर जानते नहीं कि क्या करें और कैसे करें तो आज हम आपको कुछ टिप्स देते हैं:
Sabse पहले शेयर  निवेश से पहले किसी अच्छे  एक्सपर्ट से ज्यादा से ज्यादा
टिप्स से दूर रहें: आप भी कहेंगे कि यह क्या घालमेल है। साथ ही कह रहे हैं कि मैं आपको टिप्स देता हूं और साथ ही कह रहें हैं कि टिप्स से दूर रहें। वास्तव में मैं आपको किन कंपनियों के शेयरों में निवेश करें ऐसे टिप्स नहीं देने वाला। यहां मैं आपको यह बता रहा हूं कि कैसे शेयर बाजार में निवेश करें। तो सबसे पहली बात मित्रों, रिश्तेदारों और ब्रोकरों के बताये टिप्स पर अथवा बाजार मैं फैली अफवाहों के आधार पर निवेश न करें। यह बहुत ही खतरनाक हो सकता है।

स्वयं को शिक्षित करें: बैलेंश शीट तथा कंपनियों के नतीजों को पढ़ना और समझना सीखें।  यदि आपकी शिक्षा कॉमर्स स्ट्रीम से नहीं है तो थोड़ा और अधिक सावधान रहें। बाजार के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करें। नियमित रूप से इक्नॉमिक टाइम्स जैसे समाचार पत्र पड़ें और CNBC आवाज जैसे चैनल देखें। इसके अलावा इंटरनेट पर निवेश संबधी जानकारियां एकत्रित करें। जब आपको बाजार के बारे में आत्मविश्वास जागने लगे तो भी निवेश करने से पहले दो तीन कंपनियों को चुन लें जहां आपको लगे कि निवेश करना सही रहेगा। उसके बाद उन कंपनियों के भावों पर नियमित नजर रखें। कम से कम एक महीना अपनी इन कंपनियों पर नजर रखें। यदि लगे कि आपका चुनाव सही था तो आप बाजार में जाने के बारे में सोच सकते हैं।

शुरुआत कम पूंजी से करें: शुरुआत में नाम मात्र का निवेश करें और अनुभव प्राप्त  करें। एकदम से बड़ी रकम दांव पर न लागायें। वैसे भी बाजार में एक साथ बड़ा निवेश करने से बचना चाहिये और अपनी पूंजॊ का एक एक हिस्सा नियमित रूप से निवेश करना चाहिये।

यह टिप्स आपको कैसे लगे अवश्य बतायें तथा अगले लेख में और टिप्स की प्रतीक्षा करें

शेयर बाजार में निवेश- Investment in Shares-II