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Friday, 29 May 2015

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत - How to become an early riser



हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका title है “How to become an early riser.“. ये बताना चाहूँगा कि इन्ही के द्वारा लिखे गए लेख “20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य ” का Hindi version इस ब्लॉग पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है.

तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.-Aristotle

सूर्योदय होने से पहले उठाना अच्छा होता है , ऐसी आदत आपको स्वस्थ , समृद्ध और बुद्धिमान बनती है .-अरस्तु

सुबह उठने वाले लोग पैदाईशी ऐसे होते हैं या ऐसा बना जा सकता है ? मेरे case में तो निश्चित रूप से मैं ऐसा बना हूँ . जब मैं बीस एक साल का था तब शायद ही कभी midnight से पहले बिस्तर पे जाता था . और मैं लगभग हमेशा ही देर से सोता था. और अक्सर मेरी गतिविधियाँ दोपहर से शुरू होती थीं .

पर कुछ समय बाद मैं सुबह उठने और successful होने के बीच के गहरे सम्बन्ध को ignore नहीं कर पाया , अपनी life में भी . उन गिने – चुने अवसरों पर जब भी मैं जल्दी उठा हूँ तो मैंने पाया है कि मेरी productivity लगभग हमेशा ही ज्यादा रही है , सिर्फ सुबह के वक़्त ही नहीं बल्कि पूरे दिन . और मुझे खुद अच्छा होने का एहसास भी हुआ है . तो एक proactive goal-achiever होने के नाते मैंने सुबह उठने की आदत डालने का फैसला किया . मैंने अपनी alarm clock 5 am पर सेट कर दी …

— और अगली सुबह मैं दोपहर से just पहले उठा .

ह्म्म्म…………
मैंने फिर कई बार कोशिश की , पर कुछ फायदा नहीं हुआ .मुझे लगा कि शायद मैं सुबह उठने वाली gene के बिना ही पैदा हुआ हूँ . जब भी मेरा alarm बजता तो मेरे मन में पहला ख्याल यह आता कि मैं उस शोर को बंद करूँ और सोने चला जून . कई सालों तक मैं ऐसा ही करता रहा , पर एक दिन मेरे हाथ एक sleep research लगी जिससे मैंने जाना कि मैं इस problem को गलत तरीके से solve कर रहा था . और जब मैंने ये ideas apply कीं तो मैं निरंतर सुबह उठने में कामयाब होने लगा .

गलत strategy के साथ सुबह उठने की आदत डालना मुश्किल है पर सही strategy के साथ ऐसा करना अपेक्षाकृत आसान है .

सबसे common गलत strategy है कि आप यह सोचते हैं कि यदि सुबह जल्दी उठाना है तो बिस्तर पर जल्दी जाना सही रहेगा . तो आप देखते हैं कि आप कितने घंटे की नीद लेते हैं , और फिर सभी चीजों को कुछ गहनते पहले खिसका देते हैं . यदि आप अभी midnight से सुबह 8 बजे तक सोते हैं तो अब आप decide करते हैं कि 10pm पर सोने जायेंगे और 6am पर उठेंगे . सुनने में तर्कसंगत लगता है पर ज्यदातर ये तरीका काम नहीं करता .

ऐसा लगता है कि sleep patterns को ले के दो विचारधाराएं हैं . एक है कि आप हर रोज़ एक ही वक़्त पर सोइए और उठिए . ये ऐसा है जैसे कि दोनों तरफ alarm clock लगी हो —आप हर रात उतने ही घंटे सोने का प्रयास करते हैं . आधुनिक समाज में जीने के लिए यह व्यवहारिक लगता है . हमें अपनी योजना का सही अनुमान होना चाहिए . और हमें पर्याप्त आराम भी चाहिए .

दूसरी विचारधारा कहती है कि आप अपने शरीर की ज़रुरत को सुनिए और जब आप थक जायें तो सोने चले जाइये और तब उठिए जब naturally आपकी नीद टूटे . इस approach की जड़ biology में है . हमारे शरीर को पता होना चाहिए कि हमें कितना rest चाहिए , इसलिए हमें उसे सुनना चाहिए .

Trial and error से मुझे पता चला कि दोनों ही तरीके पूरी तरह से उचित sleep patterns नहीं देते . अगर आप productivity की चिंता करते हैं तो दोनों ही तरीके गलत हैं . ये हैं उसके कारण :

यदि आप निश्चित समय पे सोते हैं तो कभी -कभी आप तब सोने चले जायेंगे जब आपको बहुत नीद ना आ रही हो . यदि आपको सोने में 5 मिनट से ज्यादा लग रहे हों तो इसका मतलब है कि आपको अभी ठीक से नीद नहीं आ रही है . आप बिस्तर पर लेटे -लेटे अपना समय बर्वाद कर रहे हैं ; सो नहीं रहे हैं . एक और problem ये है कि आप सोचते हैं कि आपको हर रोज़ उठने ही घंटे की नीद चाहिए , जो कि गलत है . आपको हर दिन एक बराबर नीद की ज़रुरत नहीं होती .

यदि आप उतना सोते हैं जितना की आपकी body आपसे कहती है तो शायद आपको जितना सोना चाहिए उससे ज्यादा सोएंगे —कई cases में कहीं ज्यादा , हर हफ्ते 10-15 घंटे ज्यदा ( एक पूरे waking-day के बराबर ) ज्यादातर लोग जो ऐसे सोते हैं वो हर दिन 8+ hrs सोते हैं , जो आमतौर पर बहुत ज्यादा है . और यदि आप रोज़ अलग -अलग समय पर उठ रहे हैं तो आप सुबह की planning सही से नहीं कर पाएंगे . और चूँकि कभी -कभार हमारी natural rhythm घडी से मैच नहीं करती तो आप पायंगे कि आपका सोने का समय आगे बढ़ता जा रहा है .

मेरे लिए दोनों approaches को combine करना कारगर साबित हुआ . ये बहुत आसान है , और बहुत से लोग जो सुबह जल्दी उठते हैं , वो बिना जाने ही ऐसा करते हैं , पर मेरे लिए तो यह एक mental-breakthrough था . Solution ये था की बिस्तर पर तब जाओ जब नीद आ रही हो ( तभी जब नीद आ रही हो ) और एक निश्चित समय पर उठो ( हफ्ते के सातों दिन ). इसलिए मैं हर रोज़ एक ही समय पर उठता हूँ ( in my case 5 am) पर मैं हर रोज़ अलग -अलग समय पर सोने जाता हूँ .

मैं बिस्तर पर तब जाता हूँ जब मुझे बहुत तेज नीद आ रही हो . मेरा sleepiness test ये है कि यदि मैं कोई किताब बिना ऊँघे एक -दो पन्ने नहीं पढ़ पाता हूँ तो इसका मतलब है कि मै बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हूँ .ज्यादातर मैं बिस्तर पे जाने के 3 मिनट के अन्दर सो जाता हूँ . मैं आराम से लेटता हूँ और मुझे तुरंत ही नीद आ जाति है . कभी कभार मैं 9:30 पे सोने चला जाता हूँ और कई बार midnight तक जगा रहता हूँ . अधिकतर मैं 10 – 11 pm के बीच सोने चला जाता हूँ .अगर मुझे नीद नहीं आ रही होती तो मैं तब तक जगा रहता हूँ जब तक मेरी आँखें बंद ना होने लगे . इस वक़्त पढना एक बहुत ही अच्छी activity है , क्योंकि यह जानना आसान होता है कि अभी और पढना चाहिए या अब सो जाना चाहिए .

जब हर दिन मेरा alarm बजता है तो पहले मैं उसे बंद करता हूँ , कुछ सेकंड्स तक stretch करता हूँ , और उठ कर बैठ जाता हूँ . मैं इसके बारे में सोचता नहीं . मैंने ये सीखा है कि मैं उठने में जितनी देर लगाऊंगा ,उतना अधिक chance है कि मैं फिर से सोने की कोशिश करूँगा .इसलिए एक बार alarm बंद हो जाने के बाद मैं अपने दिमाग में ये वार्तालाप नहीं होने देता कि और देर तक सोने के क्या फायदे हैं . यदि मैं सोना भी चाहता हूँ , तो भी मैं तुरंत उठ जाता हूँ .

इस approach को कुछ दिन तक use करने के बाद मैंने पाया कि मेरे sleep patterns एक natural rhythm में सेट हो गए हैं . अगर किसी रात मुझे बहुत कम नीद मिलती तो अगली रात अपने आप ही मुझे जल्दी नीद आ जाती और मैं ज्यदा सोता . और जब मुझमे खूब energy होती और मैं थका नहीं होता तो कम सोता . मेरी बॉडी ने ये समझ लिया कि कब मुझे सोने के लिए भेजना है क्योंकि उसे पता है कि मैं हमेशा उसी वक़्त पे उठूँगा और उसमे कोई समझौता नहीं किया जा सकता .

इसका एक असर ये हुआ कि मैं अब हर रात लगभग 90 मिनट कम सोता ,पर मुझे feel होता कि मैंने पहले से ज्यादा रेस्ट लिया है . मैं अब जितनी देर तक बिस्तर पर होता करीब उतने देर तक सो रहा होता .

मैंने पढ़ा है कि ज्यादातर अनिद्रा रोगी वो लोग होते हैं जो नीद आने से पहले ही बिस्तर पर चले जाते हैं . यदि आपको नीद ना आ रही हो और ऐसा लगता हो कि आपको जल्द ही नीद नहीं आ जाएगी , तो उठ जाइये और कुछ देर तक जगे रहिये . नीद को तब तक रोकिये जब तक आपकी body ऐसे hormones ना छोड़ने लगे जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर आप तभी bed पे जाएँ जब आपको नीद आ रही हो और एक निश्चित समय उठें तो आप insomnia का इलाज कर पाएंगे .पहली रात आप देर तक जागेंगे , पर बिस्तर पर जाते ही आपको नीद आ जाएगी . .पहले दिन आप थके हुए हो सकते हैं क्योंकि आप देर से सोये और बहुत जल्दी उठ गए , पर आप पूरे दिन काम करते रहेंगे और दूसरी रात जल्दी सोने चले जायेंगे .कुछ दिनों बाद आप एक ऐसे pattern में settle हो जायेंगे जिसमे आप लगभग एक ही समय बिस्तर पर जायंगे और तुरंत सो जायंगे .

इसलिए यदि आप जल्दी उठाना चाहते हों तो ( या अपने sleep pattern को control करना चाहते हों ), तो इस try करिए : सोने तभी जाइये जब आपको सच -मुच बहुत नीद आ रही हो और हर दिन एक निश्चित समय पर उठिए .

Thursday, 28 May 2015

ये अरबपतियों के 20 कथन जो बदल देंगे आप का जीवन

Quote 1 सफलता  की  ख़ुशी  मानना  अच्छा  है  पर  उससे  ज़रूरी  है  अपनी  असफलता  से  सीख  लेना 
Bill Gates , Business Magnate, Investor & Philanthropist
Quote 2:   विजेता  बनने  का  एक  हिस्सा  ये  जानना  है  कि  कब  हद   पार  हो  चुकी  है  . कभी -कभी  आपको  लड़ाई  छोड़  कर  जाना  पड़ता  है , और  कुछ  और  करना  होता  है  जो  अधिक  प्रोडक्टिव  हो .
Donald Trump ,American Business Magnate, Investor & TV Personality
Quote 3:  जब  दुनिया  बदलने  की  बात  हो  तो  कोई  भी  काम  छोटा  नहीं  है …मैन  जब  भी  किसी  ऐसे  उद्द्यमी   से  मिलता हूँ  जो  सभी  बाधाओं  के  खिलाफ  सफल  हो  रहा  हो  तो  मुझे  प्रेरणा  मिलती   है .
Cyril Ramaphosa ,South African Politician & Businessman
Quote 4:  सफलता  का  फार्मूला  : जल्दी  उठो , कड़ी  मेहनत  करो , लकी  रहो .
 J. Paul Getty ,Founder of Getty Oil Company
Quote 5:शायद  विजन  ही  हमारी  सबसे  बड़ी  ताकत  है …इसने  हमें  सदियों  से  विचारों  की  शक्ति  और  निरंतरता  के  माध्यम  से  ज़िंदा  रखा  है , ये  हमें  भविष्य  में  झाँकने  और  अज्ञात  को  आकार  देने  में  सहायक  होता  है .
Li Ka-Shing , Hong Kong Business Magnate & Philanthropist
Quote 6: मैं  जैसे -जैसे  बूढ़ा   हो  रहा  हूँ  , मैं  इस  बात पर  कम  ध्यान  देता  हूँ  कि  आदमी  क्या कह  रहा है . मैं  बस  देखता  हूँ  कि  वो  क्या  कर  रहा  है .
 Andrew Carnegie ,Steel Magnate
Quote 7:  जिसे  और  लोग  विफलता  का  नाम  देने  या  कहने  की  कोशिश  करते  हैं , मैंने  सीखा  है  कि  वो  बस  भगवान्  का  आपको  नयी  दिशा  में  भेजने  का  तरीका  है .
 Oprah Winfrey ,Talk Show Host, Producer & Philanthropist
Quote 8:ये  मत  सोचो  कि  तुम्हे  रोका  नहीं  जा  सकता  या  तुमसे  गलती  नहीं  हो  सकती . ये  मत  सोचो  कि  तुम्हारा  बिजनेस  सिर्फ  परफेक्शन  के  साथ  काम  करेगा . परफेक्शन  को  लक्ष्य  मत  बनाओ . सफलता  को  लक्ष्य  बनाओ .
 Eike Batista, Brazilian Business Magnate
Quote 9:मेरे  लिए  व्यवसाय  बसों  की  तरह  है . आप  एक  कोने  में  खड़े  होते  हैं  और  पहली  बस  जहाँ  जा  रही  है  वो  आपको  पसंद  नहीं  ? दस  मिनट  प्रतीक्षा  कीजिये  और  दूसरी  ले  लीजिये . ये  भी  पसंद  नहीं ? वे  आती  रहेंगी . बसों  और  व्यवसायों  का  कोई  अंत  नहीं  है .
Sheldon Adelson, American Business Magnate
Quote 10:  मजे  लीजिये . खेल  में  तब  कहीं  ज्यादा  मजेदार  हो  जाता  है  जब  आप  सिर्फ  पैसे  कमाने  से  बढ़कर  काम  करते  हैं .
Tony Hsieh ,Founder of Zappos
Quote 11: यदि  आप  सोचते  हैं  कि  आप  कोई  काम  कर  सकते  हैं  या ये  सोचते  हैं  कि  आप  कोई  काम  नहीं  कर  सकते  हैं , आप  सही  हैं .
Henry Ford, Founder of Ford Motors
Quote 12:यदि  आप  चाहते  हैं  कि  कभी  आपकी  निंदा  ना  की  जाये  तो  भगवान्  के  लिए  कुछ  नया मत   कीजिये .
Jeff Bezos, Founder of Amazon
Quote 13: सबसे  बड़ा  रिस्क  कोई रिस्क  ना  लेना  है …इस  दुनिया  में जो सचमुच  इतनी  तेजी  से  बदल  रही  है , केवल  एक  रणनीति   जिसका  फेल  होना  तय  है  वो  है  रिस्क  ना  लेना .
Mark Zuckerberg, Founder & CEO of Facebook
Quote 14: वफादारी  सबसे  पहला  होने  से  नहीं  जीती  जाते . ये  सबसे  अच्छा  होने  से  जीती  जाती  है .
Stefan Persson, Founder of H&M
Quote 15: नियम नम्बर १: कभी पैसा मत गंवाइये . नियम नम्बर २: कभी नियम नम्बर १ मत भूलिए.
 Warren Buffett , Business Magnate, Investor & Philanthropist
Quote 16: मैं मानता हूँ कि हमारी मूल सोच है कि हमारे लिए विकास जीने का एक तरीका है और हमें हर समय विकास करना है .
Mukesh Ambani, Indian Business Magnate
Quote 17: व्यवसाय पर आधारित मित्रता , मित्रता पर आधारित व्यवसाय से बेहतर है .
John D. Rockefeller ,  Founder of  the Standard Oil Company & Philanthropist
Quote 18: कड़ी मेहनत निश्चित रूप से आपको बहुत आगे तक ले जाती है . आज-कल बहुत से लोग कड़ी मेहनत करते हैं, इसलिए आपको सुनिश्चित करना होगा कि आप और भी परिश्रम से काम करें और सचमुच खुद को उस काम के प्रति समर्पित कर दें जो आप कर रहे हैं और जिसे आप पाना चाहते हैं.
Lakshmi Mittal,Indian Steel Magnate
Quote 19:यदि लोग आपके लक्ष्य पर हंस नहीं रहे हैं तो आपके लक्ष्य बहुत छोटे हैं.
Azim Premji ,Indian Businessman & Philanthropist
Quote 20 :आप कस्टमर से यह नहीं पूछ सकते कि वो क्या चाहते हैं और फिर उन्हें वो बना के दें.आप जब तक उसे बनायेंगे तब तक वो कुछ नया चाहने लगेंगे.

‘13 साल की उम्र से संघर्ष और अब ढाई घंटे में कमाती हूं ढाई लाख’



 प्रिया एक मोटिवेशनल ट्रेनर, स्पीकर और राइटर हैं। 13 साल की थीं, जब चंडीगढ़ छोड़ मुंबई बस गईं। हर एक फील्ड में आगे थीं। लोगों को पढ़ाने-समझाने में उन्हें मजा आता था। बस इसी शौक को उन्होंने अपना करियर बना लिया। 24 की उम्र में खुद की कंपनी लॉन्च करने वाली प्रिया आज बड़ी-बड़ी कंपनियों के कर्मियों को प्रेरित करती हैं। पिछले दिनों अपनी तीसरी किताब ‘द परफेक्ट वल्र्ड’ की लॉन्चिंग के लिए जब वह शहर आईं तो उन्होंने बताया कि मोटिवेशनल ट्रेनिंग में है कमाऊ करियर।

आंखों में सपने पाले एक स्कूली बच्चे के लिए मोटिवेशनल ट्रेनर दिलचस्प करियर साउंड करता है। इसमें करियर बनाने के लिए क्या करना होगा? आपकी अंग्रेजी बहुत अच्छी होनी चाहिए। स्पीकिंग एक्सेंट न्यूट्रल होना चाहिए। ऐसे शब्द इस्तेमाल करें जो सीधे असर करें। नॉलेज बहुत जरूरी है। इसके लिए फिलॉस्फी से लेकर ल्रिटेचर तक हर तरह की किताबें पढ़नी चाहिए। करेंट अफेयर्स से भी खुद को अपडेट रखना चाहिए। कई बार बेमतलब के सवाल भी किए जाते हैं। उनका जवाब देने के लिए नॉलेज और कॉन्फिडेंस होना बहुत जरूरी है। ये सारी खूबियां तो एक प्रफेसर या थिंकर में भी हो सकती हैं? हां, लेकिन दूसरों को मोटिवेट करने के लिए उसे खुद भी मोटिवेटेड होना चाहिए। ‘मैं नहीं कर सका तो आप करें’ वाला एटीट्यूड नहीं चलेगा। एक मोटिवेटर को अपने फील्ड में सफल होना चाहिए। नंबर वन से कम तो कुछ नहीं चलेगा। इसके अलावा, लोगों से प्यार करने वाला हो, उसे दोस्त बनाने का शौक हो, चुप न बैठता हो।ये तो गुण हो गए। प्रफेशनल लाइफ में कैसे एंट्री हो? ये गुण अनिवार्य समझिए। उसके बाद प्रफेशनल लेवल पर शुरू कर सकते हैं। शुरुआत छोटे लेवल से ही होती है। कॉलेज और क्लबों में अकसर मोटिवेशनल स्पीकर को बुलाते रहते हैं। ऐसी जगहों से अनुभव कमाएं, फिर बड़े लेवल पर खुद को लॉन्च करें।


आप कितना चार्ज करती हैं? दो-ढाई घंटों के लिए ढाई लाख रुपए।
10-15 साल पहले मोटिवेशनल स्पीकर नाम की चीज नहीं थी। इस बीच ऐसा क्या हुआ कि जिन लोगों ने इसे करियर बनाया, वे एक दिन में ही लाखों कमाने लगे? स्ट्रेस हो गया है लोगों की लाइफ में। काम करने के घंटे बढ़ गए हैं। पैसे कमाने की होड़ लगी है। हमने टेक्नीक को इतना बड़ा बना दिया है कि लोग जिंदादिली भूल गए हैं। मैं जब ट्रेनिंग शुरू करती हूं तो लोगों के मोबाइल अलग रखवा लेती हूं।

 
सुना है आप ट्रेनिंग के असामान्य तरीके अपनाती हैं?
मैं लोगों को आग और कांच पर चलवाती हूं। पहले वे मानने को तैयार नहीं होते कि वे ऐसा कर पाएंगे। लेकिन जब ऐसा कर लेते हैं, तो उनका खुद में विश्वास जगता है। एक पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। नेगेटिविटी सिर्फ एक नजरिया है। कांच पर आराम से चलने के बाद लोगों को लगता है कि उस पार भी कुछ है।

स्टील रॉड मोड़ने को भी कहती हैं? हाहाहा। जी। वह भी गले से। यकीन मानिए ऐसा करके लोग बिल्कुल अलग महसूस करते हैं।

एक मोटिवेशनल स्पीकर के लिए कहां-कहां मौके हैं? आजकल हर कंपनी में ऐसी ट्रेनिंग कराई जाती है। बल्कि इसके लिए अलग से बजट रखा जाता है। कॉरपोरेट्स के अलावा सरकारी विभागों और कॉलेजों में भी इसकी जरूरत रहती है। पैसा भी अच्छा है। आपने कुछ बॉलीवुड हस्तियों को भी ट्रेन किया है? कई को किया है। पर सबके नाम नहीं बता सकती। उनके साथ एक कॉन्फिडेंशियल कॉन्ट्रैक्ट साइन करना पड़ता है। ज्यादातर को यह सिखाया कि असफलता के दौर से कैसे बाहर निकला जाता है।

 
ट्रेनिंग के वक्त एप्रोच क्या हो? सबसे पहला मकसद लोगों को इंगेज करना होता है। फिर लोगों को समझौता न करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। समझौता करना सबसे खतरनाक क्रिया है। मैं कभी ब्रूस ली जैसे घिसे-पिटे उदाहरण नहीं देती। किताब पढ़कर दूसरों के उदाहरण देने से अच्छा है कि आप अपनी लाइफ के उदाहरण दें।

 
आपकी तीसरी किताब आई है। आप भाषा में परफेक्शन की बात करती हैं। तो आप बेहतर ट्रेनर हैं, स्पीकर हैं या लेखक हैं? बेहतर लेखक हूं। यह मेरी लाइफ का वह पहलू है जिसे मैंने डिस्कवर किया।

 
तो फुल प्लेज राइटर क्यों नहीं बन जातीं? राइटर को पैसे नहीं मिलते ना। आप यह किताब खरीदेंगे तो मुझे सिर्फ 19 रुपए मिलेंगे। इससे अच्छा आप मुझसे 19 रुपए ले लो और किताब पढ़ो।

Thursday, 21 May 2015

सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र




क्या आपके पास कोई ऐसा हुनर है जो औरों से अलग है? अगर आपको लगता है "नहीं" तो आप बिल्कुल गलत हैं। क्योंकि हर इंसान को भगवान ने बनाया है और सबके पास कोई ना कोई ऐसा हुनर है जो औरों से अलग है। आमतौर पर लोग ये कहते हैं कि "हमने तो पूरी कोशिश कि पर काम नही हुआ", दरअसल अगर आप पूरी कोशिश करेंगे तो आप असफल होंगे ही नहीं।

सपने हर कोई देखता है पर पूरा हर कोई नहीं कर पाता,,,, जानते हैं क्‍यों? क्योंकि कुछ लोग बस देखते हैं, सोचते हैं और जरा सी विषम परिस्थितियां आ गयी तो उनके सपने उन्ही की तरह टूट जाते हैं। अगर आपको अपने सपनों को वाकई में पूरा करना है, तो आपको हर पल उसे ही सोचना होगा और उसे पाने के लिये हर प्रयास करना होगा।

किसी ने कहा है कि "एक सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अदृश्य को देख लेता है, अमूर्त को महसूस करता है, और असंभव को पा लेता है।" डार्विन पी. किन्सले ने कहा है कि, "यह सोचने के बजाये कि आप क्या खो रहे हैं, ये सोचने का प्रयास करें कि आपके पास ऐसा क्या है, जो बाकी सभी लोग खो रहे हैं। क्‍योंकि एक बार जब आप नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों से बदल देंगे तो आपको सकारात्मक नतीजे मिलना शुरू हो जायेंगे।"

सकारात्‍मक सोच को अगर वास्‍तु से जोड़ कर देखें तो इसका सीधा तात्‍पर्य सकारात्‍मक ऊर्जा से है। वास्‍तु के मुताबिक जिस घर में ज्‍यादा प्राकृतिक रौशनी आती है, कोने साफ सुथरे रहते हैं, घर के दरवाजे पर कोई गंदगी नहीं होती, बेडरूम चमकता रहता है, पढ़ाई का कमरा ज्‍यादा प्रकाश वाला होता है और टॉयलेट मुख्‍य द्वार के ठीक सामने नहीं होता वहां पॉजिटिव एनर्जी वास करती है यानी सकारात्‍मक ऊर्जा उस घर में सदैव बनी रहती है। ऐसे घरों में लोग खुश रहते हैं और जल्‍दी बीमार नहीं पड़ते। साथ में ढेर सारी लक्ष्‍मी आती है। इसी प्रकार जिस मस्तिष्‍क में सकारात्‍मक सोच भरी होती है,

जो लोग हमेशा सकारात्‍मक दृष्टि से सोचते हैं, उनका दिमाग हमेशा खुला रहता है और वे ज्‍यादा खुश रहते हैं। खुश रहने की वजह से उनके अंदर आंतरिक शांति बनी रहती है। परिवार या दोस्‍तों के बीच उनके संबंध हमेशा मधुर होते हैं। ऐसे लोग ज्‍यादा तनाव नहीं लेते, लिहाजा वे जल्‍दी बीमार नहीं पड़ते, वे खुद से संतुष्‍ट रहते हैं और दूसरों के लिए हमेशा आगे से आगे रहते हैं। ऐसे लोगों के जीवन में कम से कम रुकावटें आती हैं। करियर की बात करें तो सकारात्‍मक ऊर्जा से भरपूर लोगों का करियर या भविष्‍य हमेशा उज्‍जवल होता है।

Tuesday, 19 May 2015

नाकामी को हार ना बनने दें - क्योंकि हार के बाद जीत है



किसी शायर ने यूँ ही नहीं कहा है, 'शहसवार ही गिरते हैं मैदान-ए-जंग में, वे तिफ्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलें।' मतलब ये है कि‍ जिंदगी कोई भी क्षेत्र हो, हर कोशि‍श के दो ही पहलू होते हैं, सक्‍सेस या फेलर। सक्‍सेस निश्चित रूप से हर किसी को खुशी देती है, हौसला बढ़ाती है, जबकि विफलता हमारा मोरल डाउन कर देती है।
लेकिन तारीफ तो तब है, जबकि हम खुद को मिली नाकामी को ही अपनी कामयाबी की कुंजी मान लें। यह कठिन तो जरूर है, पर असंभव हरगिज नहीं। कैसे?

सेल्‍फ एनालि‍सि‍स करें
अगर आप किसी प्रयास/प्रतियोगिता में विफल रह जाते हैं। बावजूद इसके कि आपने भरपूर मेहनत की, कोई कसर नहीं छोड़ी। तो ऐसे में निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। आशय यह कि नाकामी को खुद पर हावी न होने दें बल्कि यह देखने-समझने की कोशिश करें कि आपके प्रयासों में आखिर कमी कहाँ रह गई? ऐसा करने से आप कोशिश के दौरान हुई खामी को निश्चित रूप से खोज निकालेंगे और अगली बार उससे बचने का प्रयास करेंगे।

थिंक पॉजि‍टिव
थिंक पॉजि‍टिव ऑलवेज, यह एक अहम सूत्र है प्रगति का। यानी हमेशा सकारात्मक सोचिए, इससे आत्मबल मजबूत होता है। जब आप ऐसा करेंगे तो यकीन मानिए, आपको प्रत्येक नकारात्मक स्थिति में भी सफलता की एक नई राह निकलती महसूस होगी। जीवन में कामयाबी के लिए आपकी सोच का सकारात्मक होना बहुत जरूरी है।

नकारात्मक सोच यानी निगेटिव थिंकिंग हमें हर पल सफलता से दूर करती जाती है, यह निराशा के दलदल की ओर ले जाती है कि हम अमुक कार्य नहीं कर सकते अथवा यह हमसे नहीं हो सकता या फिर यह हमारी किस्मत में नहीं है, वगैरह।

लक्ष्य का निर्धारण
जब हम किसी चीज को पाने की उम्मीद लेकर प्रयास करते हैं, वही हमारा लक्ष्य है। हमें उस पर अपनी नजर केंद्रित रखनी है। यानी पहले लक्ष्य का निर्धारण करना और फिर उस पर खुद को एकाग्र करना बहुत जरूरी है। मसलन, हमें क्या बनना है, हमारी कोशिश किस चीज को पाने की है, यह तय करना महत्वपूर्ण है।

इससे आप खुद के द्वारा किए गए प्रयासों की समय-समय पर समीक्षा भी कर सकेंगे कि आपके कदम सही दिशा में हैं अथवा नहीं, क्या इसमें सुधार करना है या नहीं, अब आगे क्या करना चाहिए जैसे अहम विचारणीय बिंदुओं से आप रू-ब-रू होंगे। लेकिन यह सब तब होगा जब आपने अपना लक्ष्य पहले से ही निर्धारित कर रखा होगा।

Monday, 18 May 2015

स्टीव जॉब्स की पांच मंत्र जो बदल सकती हैं आपकी दुनिया...



स्टीव जॉब्स की पांच मंत्र जो बदल सकती हैं आपकी दुनिया...

दोस्तोँ आज हम आप सब के साथ Steve Jobs की कुछ प्रेरणादायक बातेँ
प्रस्तुत कर रहे हैँ। Steve Jobs तकनीकी के क्षेत्र मेँ एक बहुत बड़े
आविष्कारक थे, साथ ही वो एक  महान प्रेरक प्रवर्तक के रूप मेँ भी उभरे।

उन्होँने समय-समय पर जो प्रेरणादायक बातेँ कही हैँ, वह आज हम सभी युवाओँ
के लिये प्रेरणास्रोत बन सकती है। आज आप सभी के सामनेँ उनकी
प्रेरणास्प्रद बातोँ का कुछ अंश हम प्रस्तुत कर रहे हैँ-

(1)
आपका समय सीमित है, इसलिये इसे किसी और की जिँदगी जीकर व्यर्थ मत
कीजिये, बेकार की सोँच मेँ मत फँसिये। दुसरोँ के विचारोँ की शोर मेँ
अपनेँ अंदर की आवाज को, अपनी इन्टुशन  को मत डुबनेँ दीजिये।"

(2.)
मेरे पास इकलौती चीज है, जो मुझे संघर्ष करनेँ की प्रेरणा देती रही, वह था मेरे अपनेँ लिये किये गये कार्य से प्यार

(3.)
दुसरोँ से अलग सोँचिये और भीड़ से अलग नजर आईये।

(4.)
सबसे महत्वपूर्ण अपने दिल और अन्तर्ज्ञान पर अमल करने का साहस करेँ। किसी तरह उन्हेँ पहले से ही पता होता है कि आप सही मेँ क्या बनना चाहते हैँ। बाकी हर चीज गौण है।

(5.)
 स्टे  हंगरी  स्टे  फूलिश

हम सब युवाओँ के लिये एक बेहतरीन संदेश है Stay Hungry और Stay Foolish..

Stay Hungry:-
इसका मतलब है आपकी भुख कभी शांत न हो। नई चीजेँ खोजने की भुख आपमेँ हमेशा रहे।
स्टीव नेँ कहा है यदि आपनेँ किसी जानकारी या तथ्य पर पुरी तरह से विश्वास
कर लिया तो आपकी अगली खोज बंद हो जाएगी। आप कूप मण्डूक ही बने रहेँगे।
यदि आपनेँ अपनी खोज पर विश्वास नहीँ किया तो निश्चित है कि आप आगे खोज
करेँगे। खोज से नई- नई बातेँ सामने आती जायेँगी। उसका असर गहरा होता
जायेगा। यदि मैनेँ Apple- I की खोज को ही अंतिम खोज मान लेता और और कुछ
नया करनेँ के लिये आगे नहीँ आता, भुख को मार देता तो आज iPhone, iPad
आपके हाथ मेँ नहीँ होती।

Stay Foolish
Stay Foolish से मेरा मतलब है ,कभी भी अपने को बहुत ज्ञानी नहीं समझना। चाहे कोई कितना भी जानकर हो... बुद्धिमान हो... ज्ञानी हो..., लेकिन अगर उसने खुद को ऐसा मान लिया तो उसी दिन से उसकी लर्निंग खत्म हो जाती है।  स्टीव कहते हैं कि आप हमेशा जिज्ञासु बने रहिये। आप जो काम कर रहे हैं, वही काम करने का और भी अच्छा तरीका हो सकता है उन्हें   तलाशते रहिये। सीखने के लिए हमेशा तैयार रहिये  .... भूखे रहिये  ।

मुसीबतों से डरिये नहीं; जूझिये

प्रिय मित्रों, मनुष्य की इच्छा हो या नहीं लेकिन जीवन में उतार चढाव आना स्वाभाविक है. यह जीवन परिवर्तनशील परिस्थितियों से बंधा हुआ है  और इसी कारण चढ़े हुए गिरते हैं गिरे हुए उठते हैं..कठिनाइयाँ इस जीवन की एक सहज स्वाभाविक स्थिति है जिन्हें स्वीकार करके मनुष्य अपने लिए उपयोगी बना सकता है..जिन कठिनाइयों में कई व्यक्ति रोते हैं खुद को अकेला महसूस करते हैं उन्ही कठिनाई के पल में कई व्यक्ति नवीन प्रेरणा, नव उत्साह पाकर सफलता प्राप्त करते हैं. सबल मन वाला व्यक्ति बड़ी से बड़ी कठिनाई को भी स्वीकार करके आगे बढता है तो निर्बल मन वाला व्यक्ति छोटी-सी परेशानी में टूट सा जाता है...

मुसीबतों से डरिये नहीं, मुसीबतों से जूझिये हिंदी आलेख ओन  सक्सेस दोस्तों चलिए थोडा ठण्ड का मजा लेते हुए आगे बढते हैं तात्पर्य है यदि आप ठण्ड के मौसम की बात करें तो आपके मन में कोहरे की कल्पना आ ही जायेगी. यदि आप कोहरे के रास्ते पर चलें तो आपकी नजर सामने तक नही पहुच पायेगी पर जैसे-जैसे आप आगे बढते जायेंगे कोहरा आपकी नजरों से हटते जायेगा और बिना रुके आप कोहरे के बाहर निकल आयेंगे. लेकिन क्या कोहरा हमेशा छाए रहता है. जवाब है नही! मुसीबत भी उस कोहरे के समान ही है जिस प्रकार कोहरा हमेशा छाए नही रहता उसी प्रकार मुसीबत का कोहरा हम पर छाये रहे ये जरूरी नही. ठीक उसी तरह जब आगे बढते रहने से कोहरा हटता जाता है मुसीबत का समय रुपी जाल भी आगे बढकर प्रयत्न करते रहने से टूट जाता है.मुसीबत को न देखें
दोस्तों जब आप रात को साईकिल से कहीं घूमने निकलते हैं तब आपकी साइकिल कितने भी बड़े ऊँचे चढाव को पार कर जाती लेकिन यही साइकिल यदि आप सुबह उसी रास्ते पर चलायें तो आप थोडा झिझकते हैं कि रास्ते का चढाव कितना बड़ा है और शायद ही इसे पार किया जाये?

दोनों में इतना बड़ा अंतर इसलिए आता है क्योंकि रात को हमारी नजरें ऊँचे चढाव को नही बल्कि सिर्फ अपनी मंजिल, अपने रास्ते को देखती हैं पर सुबह उजाले में यही नजरें रास्ते के चढाव को देखती हैं! बात साफ़ है यदि हम सिर्फ अपनी मंजिल और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढते रहे तो हमें मुसीबतों का एहसास ही नही होगा पर यदि हम रास्ते में आने वाली हर एक रूकावट को देखते रहे तो कदम आगे बढ़ाना हमारे लिए दुरूह होगा. आपका ध्यान सिर्फ अपनी मंजिल पर होना चाहिए न कि रूकावटों पर.

“ये जीवन आपको इसलिए नही मिला कि आप अपनी रूकावटें गिनते जाएँ बल्कि इसलिए मिला है कि आप अपनी मुसीबतों और रूकावटों को चीरते हुए आगे बढते जाएँ”                      
  
परिवर्तन से डरना और अपने संघर्ष से कतराना इंसान की सबसे बड़ी कायरता है. जब तक सांस चल रही है तब तक कितनी भी बुरी परिस्थिति हो उसका आपको हंसकर आपको सामना करना होगा. दुःख-सुख, हानि-लाभ, सफलता-असफलता, सुविधा एवं कठिनाइयों के बीच आपको जूझना ही होगा और ये आयेंगे ही.. मुसीबतें या आपत्तियाँ तो इस संसार का स्वाभाविक धर्म है इससे न तो आप भयभीत होइए और न भागने की कोशिश कीजिये बल्कि अपने पूरे आत्मबल और साहस से उनका सामना कीजिये. उन पर विजय प्राप्त कीजिये और जीवन में बड़े से बड़ा लाभ उठाइए.

 दोस्तों जिस तरह आग की तेज भट्टी पर तपने से सोने का सुनहरा रंग निखरता है वैसे ही ऊँचे लक्ष्य रखने वाले सच्चे व्यक्ति का जीवन मुसीबत और कठिनाई रुपी आग से परिपक्व बनता है. मुसीबतों और कठिनाइयों के स्वरुप ही हमे सच्चे मित्रों का ज्ञान मिलता है. जब इतने सारे अमूल्य गुण मुसीबतों और कठिनाइयों में मौजूद हैं तो मुसीबतों से डरना कैसा..? जो लोग मुसीबत से डरने की बजाय उसमें जूझने की क्षमता रखते हैं वही अपने जीवन में सफलता हासिल करते हैं..

श्री हरिवंशराय बच्चन जी के इन बातों में कितनी सच्चाई छिपी है-
असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो,
जब तक न हो सफल नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम,
बिना कुछ किये ही जय-जयकार नही होती,
मेहनत करने वालों की कभी हार नही होती,
लहरों से डरकर नौका कभी पार नही होती,
मेहनत करने वालों की कभी हार नही होती.

“मुसीबत मेरे उस मित्र के समान है जिसने मुझे बचपन में नदी से डूबने से बचाया था यदि आप संघर्ष करने से कतराते हैं, खुद को आगे लाने से झिझकते हैं, और मुसीबत को गले लगाने से मुह फेरते हैं तो सफलता आपसे कोसों दूर रहेगी

“मुझे जीत का सबसे आसान रास्ता दिख रहा है वो है मुसीबतों से जूझना न कि पीठ दिखाकर भागना”  
“मुसीबत की घडी में आँख में आंसू लाने की बजाय आखिरी सांस तक रास्ता खोजना बेहतर है”.    


Sunday, 17 May 2015

अपने हुनर को अपनी पहिचान बनाइये




आज से कुछ महीने पहले एक हिंदी अख़बार में बेंगलुरु के सुहास गोपीनाथन जी के बारे में पढ़ा. सुहास गोपीनाथन की स्टोरी आज कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन सकती है. जिस  उम्र में बच्चे  मोबाइल  या कंप्यूटर  पर वीडियो  गेम्स  खेलते हैं उसी उम्र में सुहास गोपीनाथन ने इंटरनेट एवं वेब  डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपना परचम लहराया और न केवल अपनी वेबसाइट बनाई बल्कि अपने हुनर को भारत ही नहीं दुनिया के लिए भी मिसाल बनाया.

दोस्तों ये तो एक मिसाल थी जिस से हमें ये पता चलता है कि इंसान अगर ठान ले तो कोइ भी मंजिल उसे दूर नहीं है, बस लगन और मेहनत चाहिए.

आप में भी सुहास की तरह कई हुनर हो सकते हैं.
सुहास गोपीनाथन ने अपने हुनर को पहिचाना, पहचान कर उसे कड़ी मेहनत से निखारा और उनकी मेहनत का परिणाम आज सबके सामने है. अगर सुहास जी ने ये विशिष्ट काम ना किया होता तो न तो आज अखबारों में उनके बारे में कुछ पता चलता, न हमें उनके बारे में पता चलता और ना ही यहाँ पर उनकी चर्चा होती.

क्या आपने कभी खुद के बारे में सोचा है कि आप क्या-क्या कर सकते हैं?

एक बार मैं भोपाल में एक प्रदर्शनी में गया था वहां कई किसानों को उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया जा रहा था. उन किसानों ने औषधीय पौधों की उन्नत खेती की थी. उस दिन भोपाल के रहने वाले वो किसान दूसरे किसानों के लिए मिसाल थे.

वे किसान भी अन्य किसानों की ही भांति थे, बस उन्होंने एक नवाचार, एक नई पहल को अपनाया था. आप में से भी कई लोग ऐसे होंगे जो अपनी life में कुछ ऐसा करना चाहते होंगे जिस से आपको यश और सम्रद्धि मिले, आपका जीवन खुशहाल हो.मगर समस्या क्या है? उन लोगों ने अपनी ताक़त को पहचाना, अपने हुनर पर विश्वास किया, एक नए काम को करने का जोखिम उठाया और आज वे हम सबके लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गए.

अगर आप भी सफलताएँ पाना चाहते हैं तो आपको भी उनकी तरह हिम्मत कर के कदम उठाने होंगे. अगर आप वाकई life में कुछ अचीवमेंट्स हासिल करना चाहते हैं तो जरुर कर सकते हैं.

फ्रेंड्स, प्रतिभा बहुमुखी हो सकती है. ये सोचना गलत है कि कोई इंसान किसी क्षेत्र विशेष में ही श्रेष्ठ काम कर सकता है. ऐसे कई उदहारण हैं जहाँ लोगों ने अपने क्षेत्र से हट कर एक बिलकुल ही नए क्षेत्र में प्रवेश किया और अपनी उपलब्धियों और अपनी तरक्की से सबको आश्चर्य चकित कर दिया.

फ्रेंड्स, आपका हुनर, आपकी प्रतिभा आप के लिए वरदान बन सकती है, आप की प्रतिभा आप के लिए एक नई पहिचान बन सकती है.

मैंने देखा है कि एक शिक्षक थे उन्हें हर जगह शादी-विवाह के कार्यक्रमों में विशेष रूप से बुलाया जाता था. वो शिक्षक शादी-विवाह के लिए अभिनंदन पत्र लिखते थे और उनकी गायन शैली भी बहुत अच्छी थी. उनके हुनर के कारण उनकी समाज में एक विशेष पहिचान बन गयी थी.


हमारा हुनर हमें सामाजिक-आर्थिक रूप से भी तरक्की के कई अवसर उपलब्ध कराता है. ख़ास बात ये है कि हमारी प्रतिभा हमारी तरक्की के अवसरों को कई गुना बढ़ा देती है.

जीवन में सफलता, यश, सम्रद्धि, सुख और शांति कौन नहीं चाहता? अपने को दूसरों से ख़ास बनाने के लिए हमें कुछ ख़ास मेहनत भी करनी पड़ती है. जब हम सही तरीके से अपनी प्रतिभा को निखारने का काम करते हैं तो निःसंदेह हमें इसका फायदा ही मिलते है. ये बात अलग है कि कुछ विशेष हुनर की विशेष जगह पहिचान होती है. ख़ास बात ये है कि हमारे अन्दर कुछ विशेष योग्यता थी जिसे हमने पहिचान कर विकसित किया. हमारा हुनर हमें एक अलग पहिचान दिलाता है.

अगर हम अपने कोई ख़ास हुनर को विकसित करते हैं तो इस का एक फायदा यह है कि हमने खुद के सफल होने के अवसरों को पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा लिया है. इन  इतर  वर्ड्स  वे  ऑप्टीमाइज़्ड  आवर  चान्सेस  ऑफ़  सक्सेस . हमने समाज में, अपने ऑफिस में या हमारे जान पहिचान वालों में अपनी एक अलग पहिचान बना ली है.

समाज-सोसाइटी, घर-परिवार, नाते-रिश्तेदारों और हर जगह हम देखते हैं कि जिन लोगों में विशेष योग्यता होती है उन्हें सम्मान भी विशेष मिलता है. अपने को एक कामयाब इंसान के रूप में अगर आप स्थापित कर पाए तो इसका फायदा आपको जरूर मिलेगा.

दोस्तों, सफलता, नाम, यश और वैभव कोई आसानी से मिलने वाली चीजें नहीं हैं. इन सब को पाने वालों की जिंदगी को देखें तो आप पायेंगे कि इन्होने इस स्टेटस  को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत की थी.

आप भी अपने जीवन में सफल हो कर एक नाम, एक सम्मान कमायें इस के लिए आज से ही अपने व्यक्तित्व की गहराइयों में छुपे हुए अपने कई गुणों को पहचानना शुरू कर दीजिये. अपने हुनर को निखारिये और देखिये आप भी कामयाब लोगों की सूची में शामिल हो सकते हैं.

Friday, 15 May 2015

समस्या का समाधान कैसे करे ( How to solve the problem )



आदमी की जिंदगी में समस्या आने के पाँच रास्ते हैं- शरीर से, मन से, धन से, परिवार से और संसार से। आज इंसानों की सबसे बड़ी समस्या यह हो गई कि वह अपने जीवन में आने वाली समस्या का समाधान सही तरीके से नहीं कर पा रहा यही उसकी सबसे बड़ी समस्या हो गई. दुनिया में हर  छोटी -बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है। बस जरा दिमाग लगाने की जरूरत होती है। अक्सर लोग ऐसा नहीं करते हें और यही उनकी कमजोरी होती हें जिसका फायदा कोई और लेता हें

अक्सर में यही कहता हूँ कि "समस्या यह नही कि समस्या क्या हें? पर सबसे बड़ी समस्या यह की हम उन मुसीबत का हल सही तरीके से करना नहीं चाहते हें "

किसी भी मनुष्य की पहचान उसके व्यक्तित्व से ही होती है। प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी को कभी भी असफलता का मुख नहीं देखना पड़ता, वे आसानी के साथ दूसरों को प्रभावित कर लेते हैं तथा उन्हें अपना मित्र बना लेते हैं।

अध्यात्म कहता है ये समस्याएं आती रहेंगी, इनसे घबराना नहीं है। इन्हें वार्निंग अलार्म से ज्यादा मत समझें। समस्या आए तो ऊपरी सतह पर निदान न ढूंढें, सीधे उसकी जड़ की ओर चलें। बस अध्यात्म यही कहता है जड़ पर काम करो, आरंभ को स्पर्श कर लो। शुरुआत ही सम्भाल लो, फिर हर आती समस्या अपने साथ समाधान भी लाएगी।

एक सफल आदमी की पहचान है कि उसे हर परिस्थिति का सामना करना आना चाहिए। किसी मुसीबत में फंसने पर वहां से बच निकलने की कला हर आदमी को सीखनी चाहिए। और जिसे ये कला आती है वह दुनिया को जीतने का दम रखता है।

Thursday, 14 May 2015

Inspirational Hindi Story of Buddha ( गोतम बुद्ध की प्रेरणादायक हिन्दी कहानी सब्र का फल,)



बात उस समय की है जब महात्मा बुद्ध विश्व भर में भ्रमण करते हुए बौद्ध धर्म का प्रचार कर रहे थे और लोगों को ज्ञान दे रहे थे|

एक बार महात्मा बुद्ध अपने कुछ शिष्यों के साथ एक गाँव में भ्रमण कर रहे थे| उन दिनों कोई वाहन नहीं हुआ करते थे सो लोग पैदल ही मीलों की यात्रा करते थे| ऐसे ही गाँव में घूमते हुए काफ़ी देर हो गयी थी| बुद्ध जी को काफ़ी प्यास लगी थी| उन्होनें अपने एक शिष्य को गाँव से पानी लाने की आज्ञा दी| जब वह शिष्य गाँव में अंदर गया तो उसने देखा वहाँ एक नदी थी जहाँ बहुत सारे लोग कपड़े धो रहे थे कुछ लोग नहा रहे थे तो नदी का पानी काफ़ी गंदा सा दिख रहा था|

शिष्य को लगा की गुरु जी के लिए ऐसा गंदा पानी ले जाना ठीक नहीं होगा, ये सोचकर वह वापस आ गया| महात्मा बुद्ध को बहुत प्यास लगी थी इसीलिए उन्होनें फिर से दूसरे शिष्य को पानी लाने भेजा| कुछ देर बाद वह शिष्य लौटा और पानी ले आया| महात्मा बुद्ध ने शिष्य से पूछा की नदी का पानी तो गंदा था फिर तुम साफ पानी कैसे ले आए| शिष्य बोला की प्रभु वहाँ नदी का पानी वास्तव में गंदा था लेकिन लोगों के जाने के बाद मैने कुछ देर इंतजार किया| और कुछ देर बाद मिट्टी नीचे बैठ गयी और साफ पानी उपर आ गया|

बुद्ध यह सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और बाकी शिष्यों को भी सीख दी कि हमारा ये जो जीवन है यह पानी की तरह है| जब तक हमारे कर्म अच्छे हैं तब तक सब कुछ शुद्ध है, लेकिन जीवन में कई बार दुख और समस्या भी आते हैं जिससे जीवन रूपी पानी गंदा लगने लगता है| कुछ लोग पहले वाले शिष्य की तरह बुराई को देख कर घबरा जाते हैं और मुसीबत देखकर वापस लौट जाते हैं, वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाते वहीं दूसरी ओर कुछ लोग जो धैर्यशील होते हैं वो व्याकुल नहीं होते और कुछ समय बाद गंदगी रूपी समस्याएँ और दुख खुद ही ख़त्म हो जाते हैं|

तो मित्रों, इस कहानी की सीख यही है कि समस्या और बुराई केवल कुछ समय के लिए जीवन रूपी पानी को गंदा कर सकती है| लेकिन अगर आप धैर्य से काम लेंगे तो बुराई खुद ही कुछ समय बाद आपका साथ छोड़ देगी|

आप लोगों को ये कहानी कैसी लगी, नीचे comment के ज़रिए हमें ज़रूर बताएँ, धन्यवाद

Tuesday, 12 May 2015

सफलता के लिए दृढ़ आत्मविश्वास का होना नितान्त आवश्यक है |

 सफलता का मूल मन्त्र अपने जीवन के उद्देश्य को जानना और उसे प्राप्त करने के लिए दृढ आत्मविश्वास रखना यही सफलता की ओर पहला कदम है|

यह अदम्य विचार कि मैं अवश्य सफल होऊंगा और उस पर पूरा विश्वास ही सफलता पाने का मूल मन्त्र है | याद रखिये विचार संसार की सबसे महान शक्ति है यही कारण है की सफलता पाने वाले लोग पूर्ण आत्मविश्व रखते हुए अपने कर्मों को पूरी कुशलता से करते है ,दूसरों की सफलता के लिए भी वे सदा प्रयत्नशील रहते है |

प्रत्येक विचार,प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है अच्छे का अच्छे ओर बुरे का बुरा | यही प्रकृति का नियम है | इसमें देर हो सकती है पर अंधेर नहीं | इसलिए आप सफल होना चाहते है तो अच्छे विचार मन में रखिये , सद्कर्म करिए और जरुरतमंदो की निःस्वार्थ भाव से सहायता तथा सेवा करिए | मार्ग में आने वाली कठिनाइयों,बाधाओं,ओर दूसरों की कटु आलोचनाओं से अपने मन को अशांत न होने दीजिये |

जब अपनी समस्या न सुलझे जब कोई अपनी समस्या को हल न कर सकें तो उसके लिए सबसे अच्छा तरीका एक ऐसे ब्यक्ति की खोज करना है जिसके पास उससे भी अधिक समस्याएँ हों ओर तब वह उन्हें हल करने में उसकी उसकी सहायता करें | आपकी समस्या का हल आपको मिल जायेगा | चौंकिए मत, इसे आजमाइए |

लोगों में अंधविश्वास सफलता के लिए बहूत बड़े बाधक सिद्ध होता है | मनुष्य जीवन पर्यन्त इस अज्ञानपूर्ण अंधविश्वास से चिंतित रहता है की कहीं उसे कोई धोखा न दे जाए | उसे वह ज्ञान नहीं होता की मनुष्य को स्वयं के सिवाए कोई दूसरा धोखा नहीं दे सकता,वास्तव में वह अपने ही मोह और भय के कारण धोखे में फंसता है |

हम भूल जाते है की एक परमशक्ति भी है जो सदैव हर ब्यक्ति के साथ रहती है | जब कोई ब्यक्ति किसी से कोई समझौता या अनुबंध करता है ,तो यह परमशक्ति अदृश्य और मौन रूप में एक साक्षी की तरह उपस्थित रहती है | हम इस दुनिया को धोखा दे सकते है पर इस अदृश्य शक्ति को नहीं |

इसलिए जो ब्यक्ति दूसरों को धोखा देकर या उसका शोषण करके सफलता या धन प्राप्त करना चाहता है उसे अंत में भयानक परिणामों को भुँगातना पड़ता है |

यही कारण है की संसार के सभी संतो और महापुरुषों ने निःस्वार्थ कार्य करने पर बल दिया है |

“समय की पावंदी में ही जिवन की सफलता का रहस्य निहित है |
आप समय की कद्र करेंगे तो समय आपकी कद्र करेगा |”
                          

Monday, 11 May 2015

समय की कीमत को पहचानिये | Time-based pricing



आपने अक्सर लोगों से कहते सुना होगा की समय ही धन है | पर शायद उनकी बात पर तरीके से गहन अध्ययन न किया हो क्यूंकि हम जीवन में बहूत सी बातों को यूँ ही अनसुना कर देते है | एक बात से आप सब सहमत होंगे की समय हम सब के लिए दिन में २४ घंटे ही होते है | पर ठहरिये और थोडा सा ध्यानपूर्वक निम्नलिखित तथ्यों को जानिये |

आमतौर पर एक आम भारतीय अपने जीवन में अगर:-
8 घंटे प्रतिदिन सोता है जो एक महीने में 240 घंटे अर्थात 10 दिन सोता है यानि 3 साल में एक एक साल यानि एक आम भारतीय अपने 70 वर्ष के औसतन जीवन काल में लगभग 23 साल सोने में निकाल देते है |

ये एक अकेला क्षेत्र नहीं है जहाँ हमारे जीवन का ज्यादातर समय निकलता है |
ऐसे और भी बहूत क्षेत्र है यथा ——–
निचे एक आम भारतीय की औसतन 70 वर्ष के जीवन को अलग-अलग भागों में बांटा गया है | ये आवश्यक नहीं है की हर किसी के साथ इसी तरह हो लेकिन ये वास्तविकता है की आमतौर पर एक आम भारतीय अपने जीवन में से लगभग :-

1. 23 वर्ष सोने में
2. 23 वर्ष अपने व्यवसाय अथवा नौकरी में |
3. तीन वर्ष नित्यकर्म में
4. पाँच वर्ष अनावश्यक जामों / पंक्तियों में खड़े होकर व आवागमन में
5. एक वर्ष डॉक्टरों / नर्सिंग होम इत्यादि में
6. दो वर्ष सामजिक कार्यों तथा विवाह आदि समारोह में भाग लेकर
7. एक वर्ष अपने अव्यवस्थित घर में से अपने व्यक्तिगत सामान को ढूंढने में
8. एक वर्ष फालतू की ई- मेल चैक करने में
9. दो वर्ष मोबाईल पर गपशप करने में
10. तीन वर्ष प्रतिदिन तीन बार भोजन करने में
11. दो वर्ष राजनीती गपशप में
12 तीन वर्ष टेलीविजन पर न्यूज ,क्रिकेट मैच, धारावाहिक देखने / अख़बार पढने इत्यादि में निकालता है |

अब जरा सोचिये कि अगर :-
एक व्यक्ति रोजाना मात्र 1 घंटा रोज का कम सोयें अर्थात 8 कि जगह 7 घंटा सोये तो वो एक महीने में 30 घंटे, एक साल में 365 अर्थात लगभग 15 दिन प्रतिवर्ष और अपने 70 वर्ष के जीवन काल में लगभग 3 साल और कमा सकते है |

ये एक अकेला क्षेत्र नहीं है जहाँ हम अपना समय बचा सकते है ऐसे न जाने कितने अनगिनत क्षेत्र है जहाँ पर हम अपना समय बचा कर किसी भी ऐसी जगह पर लगा सकते है जहाँ पर उसकी उत्पादकता ज्यादा हो | पर हम ये चर्चा कर क्यूँ रहे है ?

1. Rs.20000/- कमाना चाहते है तो आपके प्रत्येक घंटे की कीमत Rs.27.77 आपकी प्रत्येक मिनट की कीमत Rs.0.46 प्रतिघंटा/प्रतिदिन के हिसाब से एक वर्ष की कीमत होगी Rs.10136
 
2. Rs.50000/- कमाना चाहते है तो आपके प्रत्येक घंटे की कीमत Rs.69.44 आपकी प्रत्येक मिनट की कीमत Rs.1.15प्रतिघंटा/प्रतिदिन के हिसाब से एक वर्ष की कीमत होगी Rs.25347( यह तालिका में वर्ष में 360 दिन और प्रतिदिन के 24 घंटों को आधार माना गया है )


अब अगर हम ये माने की आप रु.50000 प्रतिमाह कमाना चाहते है ( मैं जानता हूँ की में आपके लिए कम लिखा है ; आप इससे भी कहीं ज्यादा कम सकते है ) और आप 8 घंटा के जगह 7 घंटा सोते है तो आप रु.25347 प्रतिवर्ष अतिरिक्त कमा सकते है और ये ही फ़ॉर्मूला आप अन्य अनावश्यक कार्यों में लगे समय को बचाकर भी कर सकते है |

मुझे उम्मीद है की अबतक आपको बहूत सारी कैलकुलेसन समझ आ गयी होगी और आपको ये पूर्ण रूप से स्पष्ट हो गया होगा की वास्तव में समय ही धन है किन्तु अब हमे ये समझना होगा की फोरेवर लिविंग प्रोडक्ट के साथ व्यापार करते समय हमें अपने बहुमूल्य समय किस प्रकार प्रयोग करना है |

कई बार अपना समय ऐसे लोगों पर लगाते है जहाँ से हमें कोई विशेष उत्पादकता नहीं आ रही होती | अगर आप सिर्फ अपने मस्तिष्क में ये तथ्य बिठा ले की आपके प्रत्येक मिनट या घंटे की इतनी कीमत है तो मैं आपको विश्वास दिला सकता हूँ की आपकी कार्यशैली में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आ जायेगा | परन्तु आपको ये अवश्य सुनिश्चित करना होगा की आप अपने प्रत्येक घंटे की आंकी गयी कीमत को वसूल करने के लिए स्वयं से पूर्ण रूप से कटिबद्ध है |

क्या आपने सोचा की अगर आप आपने जीवन में अनावश्यक कार्यों में लगे समय से थोडा-थोडा समय प्रतिदिन बचाकर अपने पुरे जीवन में सिर्फ पाँच वर्ष भी बचा ले और आपको फोरेवर लिविंग प्रोडक्टस के व्यवसाय से मात्र Rs. 500000 प्रतिवर्ष की आय आ रही हो तो आप आपने बच्चों/ परिवार के लिए इस बचे समय का सदुपयोग करने के कारण मात्र Rs.3 करोड़ कमा सकते है ? निर्णय आपका |

   जब यह साफ़ लगने लगे की लक्ष्य को पाना नामुमकिन है तो बदलाव अपनी कोशिस में करें , लक्ष्य में नहीं” |

आपकी उपलब्धियां, आपकी सफलता और आपकी सोच



आपकी उपलब्धियां, आपकी सफलता और आपकी सोच
हमने अक्सर achievements (उपलब्धियां) और deserveness (पात्रता) के कई खूबसूरत उद्धरण और सुविचार सुने और पढ़े हैं जो हमें बहुत ज्यादा आकर्षित और प्रभावित करते हैं. जैसे:


You can achieve anything with a powerful mind.
You can achieve when you believe.
You can achieve anything.
और भी कई ढेर सारे quotes हमने पढ़े-सुने होंगे.


Friends, life में success, achievements, जीत और उम्मीदें किसे अच्छी नहीं लगतीं? जाहिर सी बात है ये सब चीजें सबको बहुत पसंद हैं और हम में से सब अपने जीवन में ये सब हासिल करना चाहते हैं. यहाँ पर जो बात की जा रही है वो ये है कि क्या life में achieve करने वाला ही success और winner माना जाता है और कुछ लोग पात्रता (deserveness) होते हुए भी कई चीजों को हासिल नहीं करते या हासिल नहीं कर पाते क्या हम उन्हें असफल (Failure) या हारे हुए (Looser) मानेंगे?

ये जरुरी नहीं कि कुछ हासिल न करने वाला failure होता है.
Friends, life में हर इंसान के कुछ motivations, कुछ आदर्श, कुछ सपने और कुछ सोच होती है और उन्हीं के हिसाब से उसका व्यक्तित्व (personality) और जीवन स्तर बनता है.
कुछ बातें होती हैं जो इंसान की personality को दूसरों से अलग करतीं हैं और ये बातें या गुण ही उसकी समाज में दूसरों से अलग पहिचान बनाते हैं.

कुछ cases में इंसान एक जगह असफल होते हुए दूसरी जगह सफल (success) रहता है और अपनी सफलताएँ या उपलब्धियां उस इंसान को एक आत्मिक संतोष और आत्मबल देती हैं.

 "You can achieve anything what you want in life." (In Hindi "आप अपनी life में वो सब कुछ पा सकते हैं जो आप चाहते हैं.") कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है. शायद इसीलिए कुछ लोग बहुत सारी चीजों या बातों को नज़रंदाज़ करते रहते हैं. अगर इंसान के प्रयासों में सच्ची लगन हो तो बहुत कुछ हासिल करना नामुमकिन नहीं है लेकिन वो सब हासिल करने के बाद जो चीज खो जाएगी वो कितनी महत्वपूर्ण है. इसी का जोड़-घटाना और गुणा- भाग ये decide करता है कि कुछ नई चीज को हासिल करने के लिए सोचा जाये कि नहीं.

 ईश्वर ने मनुष्य को अनगिनत शक्तियां, योग्यताएं दी हैं जिनके बल पर इंसान असंभव को भी संभव कर सकता है परन्तु इन सब के साथ ही विवेक भी दिया है जो अच्छे-बुरे, सही-ग़लत, लाभ-हानि का ज्ञान कराता है.

 मनुष्य को अपने लक्ष्य, पहिचान, उद्देश्य और सार को हमेशा याद रखना चाहिए. आप को वही हासिल करना चाहिए जो आपके लिए जरुरी हो वरना दुनिया में तो बहुत कुछ है. सारी चीजें और मंजिलें आपके लिए नहीं हैं. सब कुछ हासिल करने में तो आप अपनी मंजिल से भटक जायेंगे.

सार ये है कि हमें अपनी powers(शक्तियों) पर भरोसा करना चाहिए और achievements, deserveness के सही अर्थ और सही परिप्रेक्ष्य को समझना जरुरी है.

Monday, 4 May 2015

दृढ़ बने रहो और जीवन की दौड़ जीत लो



दृढ़ बने रहो और जीवन की दौड़ जीत लो ...
कुछ वर्ष पूर्व सीटल के विशेष ओलम्पिक खेलों की एक घटना है। मानसिक एवं शारीरिक रूप से असक्षम युवाओं
की 100 मीटर की दौड़ के आयोजन का समय आ गया था। मानसिक एवं शारीरिक रूप से असक्षम प्रतिभागी
बन्दूक की गोली चलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही गोली चली, सभी प्रतिद्वन्दी प्रारंभिक रेखा से भागे और जीतने की प्रबल इच्छा को लेकर आगे बढ़ने लगे। लेकिन एक छोटा लड़का लड़खड़ा कर शुरू में ही गिर गया और रोने लगा। बाकी आठ प्रतिभागियों ने उसके रोने की आवाज़ सुनी और उन आठों ने पीछे मुड़कर देखा।और फिर वह आठों के आठों वापस लौटे और उस बालक के पास पहुंचे। एक बालिका जो "डाउन्स सिन्ड्रोम" नामक बीमारी से ग्रसित होने के कारण मानसिक एवं शारीरिक रूप से असामान्य थी, झुकी और उसने उस छोटे से बालक को प्यार से चूमा और बोली, " अरे कोई बात नहीं , अब तुम बिल्कुल ठीक से दौड़ोगे ।"और इसके बाद जो भी हुआ उसे देखकर स्टेडियम में बैठे सभी दर्शकों ने दांतों तले उंगली दबा ली। इसके बाद नौ के नौ प्रतिभागियों ने एक दूसरे के हाथ पकड़ कर एक साथ भागना शुरू किया और सबने एक साथ 100 मीटर की अन्तिम रेखा पार की।

इस दौड़ के समाप्त होने के पश्चात स्टेडियम में उपस्थित अपार जनसमूह खड़ा हो गया और सबने मिलकर काफ़ी देर तक तालियाँ बजा कर इन शारीरिक एवं मानसिक रूप से असामान्य प्रतिभागियों का मनोबल बढाया।
जो लोग उस समय वहां उपस्थित थे वे आज तक अन्य लोगों को यह कहानी बड़े गर्व से सुनते हैं। क्यों ? क्योंकि मन ही मन वह जानते हैं की हमारे जीवन में स्वयं जीतने से अधिक महत्वपूर्ण है जीतने में अन्य लोगों की मदद करना, चाहे ऐसा करने में उन्हें अपनी गति कुछ कम ही करनी पड़े। चाहे ऐसा करने में उन्हें अपना मार्ग ही कुछ क्यों न बदलना पड़े। " क्या दूसरी मोमबत्ती जलाने के बाद पहली मोमबत्ती की रौशनी धीमी पड़ जाती है ? "नहीं न" । क्या दूसरी मोमबत्ती को बुझा देने से पहली मोमबत्ती ज्यादा तेज़ी से चमकने लगती है ? "
 

अन्तरात्मा से आती हुई आवाज़ सुनो



अंतरात्मा की आवाज - अन्तरात्मा से आती हुई आवाज़ सुनो

एक दिन की घटना है । एक छोटी सी लड़की फटे पुराने कपड़ो में एक सड़क के कोने पर खड़ी भीख मांग रही थी । न तो उसके पास खाने को था, न ही पहनने के लिए ठीक ठाक कपड़े थे और न ही उसे शिक्षा प्राप्त हो पा रही थी ।
वह बहुत ही गन्दी बनी हुई थी, कई दिनों से नहाई नहीं थी और उसके बाल भी बिखरे हुए थे । तभी एक अच्छे घर का संभ्रांत युवा अपनी कार में उस चौराहे से निकला और उसने उस लड़की को देखते हुए भी अनदेखा कर दिया । अंततः वह अपने आलीशान घर में  पहुंचा जहाँ सुख  सुविधा के सभी साधन उपलब्ध थे । तमाम नौकर चाकर थे, भरा पूरा सुखी परिवार था ।

जब वह रात्रि का भोजन करने के लिए अनेक व्यंजनों से भरी हुई मेज पर बैठा तो अनायास ही उस अनाथ भिखारी बच्ची की तस्वीर उसकी आँखों के सामने आ गयी । उस
बिखरे बालों वाली फटे पुराने कपड़ों में छोटी सी भूखी बच्ची की याद आते ही वह व्यक्ति ईशवर पर बहुत नाराज़ हुआ । उसने ईश्वर को ऐसी व्यवस्था के लिए बहुत धिक्कारा कि उसके पास तो सारे सुख साधन मौजूद थे और एक निर्दोष लड़की के पास न खाने को था और न ही वह शिक्षा प्राप्त कर पा रही थी । अंततः उसने ईश्वर को कोसा,  " हे ईश्वर आप ऐसा कैसे होने दे रहे हैं ? आप इस लड़की की मदद करने के लिए कुछ करते क्यों नहीं  ?" इस प्रकार बोल कर वह खाने की मेज़ पर ही आंखें बंद करके बैठा था ।

तभी  उसने अपनी अन्तरात्मा से आती हुई आवाज़ सुनी जो कि ईश्वरीय ही थी । ईश्वर  ने कहा " मैं बहुत कुछ करता हूँ और ऐसी परिस्तिथियों को बदलने के लिए मैंने बहुत कुछ किया है । मैंने तुम्हें बनाया है ।" जैसे ही उस व्यक्ति को यह एहसास हुआ कि ईश्वर उस गरीब बालिका का उद्वार उसी के द्वारा करना चाहता है, वह बिना भोजन किये मेज़ से उठा और वापस उसी स्थान पर पहुंचा, जहाँ वह गरीब लड़कीखड़ी भीख मांग रही थी । वहां पहुँच कर उसने उस लड़की को कपडे दिए और भविष्य में उसे पढ़ाने लिखाने और एक सम्मानित नागरिक बनाने का पूरा खर्चा उठाया । 

तो आइए हम सब मिलकर इन बच्चों की मदद करते हे






Wednesday, 29 April 2015

उत्साह का चमत्कार - The miracle of enthusiasm



उत्साह का चमत्कार
 एक महिला कैंसर से बुरी तरह पीड़ित थी। डॉक्टरों ने उसे बता दिया था कि उसके पास जीवन के सिर्फ 6 महीने ही बचे हैं। इस दौरान उसे महंगा इलाज कराना होगा। महिला के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। जीवन के मात्र छह महीने बाकी देखकर उसने तय किया कि वह एक-एक क्षण का सदुपयोग करेगी। उसने गरीबों और निराश्रितों की सेवा शुरू कर दी। वह सारा दिन गरीब बच्चों के चेहरों पर खुशियां लाने का प्रयास करती। उनके साथ हंसती-खेलती। उत्साह में उसके दिन तेजी से बीत रहे थे।

एक दिन महिला ने कैंसर पीड़ितों की सेवा हेतु देशवासियों से आर्थिक सहायता की अपील की। उसने जन-जन तक कैंसर पीड़ितों की हालत बयां करने के लिए समाचार पत्र, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविजन आदि का सहारा लिया। लोगों ने तुरंत पैसा देना शुरू भी कर दिया। दो-तीन महीने में ही इतना धन एकत्र हो गया कि उनसे एडंवास तकनीक की तीन-चार मशीनें आ गईं और एक कैंसर अस्पताल का निर्माण भी होने लगा। अपनी सफलता देखकर महिला का उत्साह चरम पर था। उसे दिल से खुशी थी कि उसके प्रयास सफल हो रहे थे।

महिला इन कार्यों में इतनी व्यस्त रही कि उसे इस बात का ध्यान ही न रहा कि वह खुद कैंसर पीड़ित है। एक साल बाद उसे ध्यान आया कि डॉक्टरों ने तो उसके जीवन के छह माह ही बाकी बताए थे। लेकिन अब वह पहले से अधिक स्वस्थ महसूस कर रही थी। जांच में पाया गया कि उसका कैंसर गायब हो चुका था। यह देख डॉक्टर दंग रह गए। महिला मुस्करा कर बोली, 'यह कैंसर उत्साह और सेवा भावना से डर कर भाग गया है।' सभी उसकी बात से सहमत थे।

संकल्प की शक्ति - Hindi motivet kahani



बहुत समय पहले की बात है. जापान में एक युवा समुराई रहता था जो अपनी मंगेतर से बहुत प्रेम करता था. एक दिन जब उसकी मंगेतर जंगल से गुज़र रही थी, तब एक आदमखोर बाघ ने उसपर प्राणघातक हमला कर दिया. समुराई ने अपनी प्रेयसी को बचाने के भरसक प्रयास किए उसकी मृत्यु हो गई.
दुःख में आकंठ डूबे समुराई ने यह संकल्प लिया कि वह अपनी प्रिया की असमय मृत्यु का प्रतिशोध लेगा और उस बाघ को खोजकर खत्म कर देगा.

इस प्रकार समुराई अपने धनुष-बाण लेकर गहरे जंगल में चला गया और बहुत लंबे समय तक उस बाघ की खोज करता रहा. एक दिन उसे वह एक बाघ कुछ दूरी पर सोता दिखाई दिया. समुराई उसे देखकर समझ गया कि उसी बाघ ने उसकी प्रेयसी के प्राण लिए थे.

उसने अपना धनुष उठाया और निशाना लगाकर बाण छोड़ दिया. बाण बिजली की गति से छूटकर बाघ के शरीर को भेद गया. प्रत्यंचा पर दूसरा बाण चढ़ाकर वह बाघ की मृत्यु सुनिश्चित करने के लिए सतर्कतापूर्वक उसकी ओर बढ़ा… लेकिन वह यह देखकर अचंभित था कि उसके तीर ने किसी बाघ को नहीं बल्कि उसके जैसे दिखनेवाले धारीदार पत्थर को भेद दिया था!

इस घटना का बाद गांव में हर ओर उसकी धनुर्विद्या की चर्चा थी… कि उसने किस तरह एक पत्थर को तीर से भेद दिया, और लोग उसकी परीक्षा लेना चाहते थे.

लेकिन अनेक बार प्रयास करने के बाद भी समुराई के तीर चट्टानों और पत्थरों से टकराकर टूटते रहे. वह उन्हें भेदने का करिश्मा दुहरा नहीं सका.

क्योंकि इस बार समुराई जानता था कि वह पत्थर पर तीर चला रहा है. विगत में उसका संकल्प इतना गहन था कि वह वास्तव में पत्थर को तीर से भेद सका. परिस्तिथियों के बदलते ही उसका अद्भुत कौशल लुप्त हो गया.


Tuesday, 28 April 2015

प्रयास कभी भी ना छोड़े बेस्ट हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी

प्रयास कभी भी ना छोड़े बेस्ट हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी

एक लड़की कार चला रही थी और पास में उसके पिताजी बैठे थे.
राह में एक भयंकर तूफ़ान आया और लड़की ने पिता से पूछा -- अब हम
क्या करें?
पिता ने जवाब दिया -- कार चलाते रहो.
तूफ़ान में कार चलाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था,  तूफ़ान और भयंकर
होता जा रहा था.
अब मैं क्या करू ? -- लड़की ने पुनः पूछा.
कार चलाते रहो. -- पिता ने पुनः कहा.

थोड़ा आगे जाने पर लड़की ने देखा की राह में कई वाहन तूफ़ान
की वजह से रुके हुए थे......
उसने फिर अपने पिता से कहा -- मुझे कार रोक देनी चाहिए.......
मैं मुश्किल से देख पा रही हूँ.......
यह भयंकर है और प्रत्येक ने अपना वाहन रोक
दिया है.......

उसके पिता ने फिर निर्देशित किया -- कार रोकना नहीं. बस चलाते रहो....
अब तूफ़ान ने बहुत ही भयंकर रूप धारण कर लिया था किन्तु लड़की ने कार चलाना नहीं रोका..........
और अचानक ही उसने देखा कि कुछ साफ़ दिखने
लगा है.........
कुछ किलो मीटर आगे जाने के पश्चात लड़की ने देखा कि तूफ़ान थम
गया और सूर्य निकल आया......
अब उसके पिता ने कहा -- अब तुम कार रोक सकती हो और बाहर आ
सकती हो........
लड़की ने पूछा -- पर अब क्यों?
पिता ने कहा -- जब तुम बाहर आओगी तो देखोगी कि जो राह में
रुक गए थे, वे अभी भी तूफ़ान में फंसे हुए हैं......
चूँकि तुमने कार चलाने का प्रयत्न नहीं छोड़ा, तुम तूफ़ान के बाहर हो......

यह किस्सा उन लोगों के लिए एक प्रमाण है जो कठिन समय से गुजर रहे
हैं.........
मजबूत से मजबूत इंसान भी प्रयास छोड़ देते हैं........
किन्तु प्रयास कभी भी छोड़ना नहीं चाहिए.......
निश्चित ही जिन्दगी का कठिन समय गुजर जायेंगे और सुबह के सूर्य
की भांति चमक आपके जीवन में पुनः आयेगी.......!!!!!

जिन्दगी में कभी हार मत मानो - Do not ever give up in life ...



बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था . उसके पास बहुत सारे जानवर थे , उन्ही में से एक गधा भी था . एक दिन वह चरते चरते खेत में बने एक पुराने सूखे हुए कुएं के पास जा पहुचा और अचानक ही उसमे फिसल कर गिर गया . गिरते ही उसने जो...र -जोर से चिल्लाना शुरू किया -” ढेंचू-ढेंचू ….ढेंचू-ढेंचू….”उसकी आवाज़ सुन कर खेत में काम कर रहे लोग कुएं के पास पहुचे, किसान को भी बुलाया गया .किसान ने स्थिति का जायजा लिया , उसे गधे पर दया तो आई लेकिन उसने मन में सोचा कि इस बूढ़े गधे को बचाने से कोई लाभ नहीं है और इसमें मेहनत भी बहुत लगेगी और साथ ही कुएं की भी कोई ज़रुरत नहीं है , फिर उसने बाकी लोगों से कहा , “मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी तरह इस गधे को बचा सकते हैं अतः आप सभी अपने-अपने काम पर लग जाइए, यहाँ समय गंवाने से कोई लाभ नहीं.”और ऐसा कह कर वह आगे बढ़ने को ही था की एक मजदूर बोला,” मालिक , इस गधे ने सालों तक आपकी सेवा की है , इसे इस तरह तड़प-तड़प के मरने देने से अच्छा होगा की हम उसे इसी कुएं में दफना दें .”किसान ने भी सहमती जताते हुए उसकी हाँ में हाँ मिला दी.” चलो हम सब मिल कर इस कुएं में मिटटी डालना शुरू करते हैं और गधे को यहीं दफना देते हैं”, किसान बोला. गधा ये सब सुन रहा था और अब वह और भी डर गया , उसे लगा कि कहाँ उसके मालिक को उसे बचाना चाहिए तो उलटे वो लोग उसे दफनाने की योजना बना रहे हैं . यह सब सुन कर वह भयभीत हो गया , पर उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान् को याद कर वहां से निकलने के बारे में सोचने लगा ….अभी वह अपने विचारों में खोया ही था कि अचानक उसके ऊपर मिटटी की बारिश होने लगी, गधे ने मन ही मन सोचा कि भले कुछ हो जाए वह अपना प्रयास नहीं छोड़ेगा और आसानी से हार नहीं मानेगा। और फिर वह पूरी ताकत से उछाल मारने लगा .किसान ने भी औरों की तरह मिटटी से भरी एक बोरी कुएं में झोंक दी और उसमे झाँकने लगा , उसने देखा की जैसे ही मिटटी गधे के ऊपर पड़ती वो उसे अपने शरीर से झटकता और उछल कर उसके ऊपर चढ़ जाता .जब भी उसपे मिटटी डाली जाती वह यही करता ….झटकता और ऊपर चढ़ जाता …. झटकता और ऊपर चढ़ जाता ….किसान भी समझ चुका था कि अगर वह यूँ ही मिटटी डलवाता रहा तो गधे की जान बच सकती है .फिर क्या था वह मिटटी डलवाता गया और देखते-देखते गधा कुएं के मुहाने तक पहुँच गया, और अंत में कूद कर बाहर आ गया.मित्रों, हमारी ज़िन्दगी भी इसी तरह होती है , हम चाहे जितनी भी सावधानी बरतें कभी न कभी मुसीबत रुपी गड्ढे में गिर ही जाते हैं .पर गिरना प्रमुख नहीं है,प्रमुख है संभलना . बहुत से लोग बिना प्रयास किये ही हार मान लेते हैं , पर जो प्रयास करते हैं भगवान् भी किसी न किसी रूप में उनके लिए मदद भेज देता है।

Monday, 27 April 2015

जो आज करोगे वो 'आपका कल' बन सामने होगा



क्या गुजरी होगी उस बुढ़ी माँ के दिल पर जब उसकी बहु ने कहा -:
"माँ जी, आप अपना खाना बना लेना, मुझे और इन्हें आज एक पार्टी में जाना है ...!!"

बुढ़ी माँ ने कहा -: "बेटी मुझे गैस चुल्हा चलाना नहीं आता ...!!"

तो बेटे ने कहा -: "माँ, पास वाले मंदिर में आज भंडारा है , तुम वहाँ चली जाओ ना खाना बनाने की कोई नौबत ही नहीं आयेगी....!!!"

माँ चुपचाप अपनी चप्पल पहन कर मंदिर की ओर हो चली.....
यह पुरा वाक्या 10 साल का बेटा रोहन सुन रहा था ।

पार्टी में जाते वक्त रास्ते में रोहन ने अपने पापा से कहा -:

"पापा, मैं जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ना तब मैं भी अपना घर किसी मंदिर के पास
ही बनाऊंगा ....!!!

माँ ने उत्सुकतावश पुछा -: क्यों बेटा ?
रोहन ने जो जवाब दिया उसे सुनकर उस बेटे और बहु का सिर शर्म से नीचे झुक गया जो अपनी माँ को मंदिर में छोड़ आए थे.....

रोहन ने कहा -: क्योंकि माँ, जब मुझे भी किसी दिन ऐसी ही किसी पार्टी में जाना होगा
तब तुम भी तो किसी मंदिर में भंडारे में खाना खाने जाओगी ना और मैं नहीं चाहता कि तुम्हें कहीं दूर के मंदिर में जाना पड़े....!