Tuesday, 28 April 2015

पेट में गैस बनने के कई कारण हो सकते हैं जानने के लिए यहाँ क्लिक करे



पेट में गैस बनने के कई कारण हो सकते हैं जानने के लिए यहाँ क्लिक करे 

उदर-वायु एक आम तथा कभी न कभी हर किसी को होने वाली समस्या है। पेट गैस को अधोवायु बोलते हैं। यह तब होती है जब शरीर में भारी मात्रा मे गैस भर जाती है। इसे पेट में रोकने से कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी आदि। पेट में गैस बनने के कई कारण हो सकते हैं जिसके बारे में हम यहां आज चर्चा करेगें।

कारण-

बैक्टीरिया का पेट में ओवरप्रोडक्शन होना ।

जिस आहार में बहुत ज्यादा फाइबर होता है।

मिर्च-मसाला, तली-भुनी चीजें ज्यादा खाने से।

पाचन संबधी विकार

बींस, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल, फास्ट फूड, ब्रेड और किसी-किसी को दूध या भूख से ज्यादा खाने से। खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक लेने से क्योंकि इसमें गैसीय तत्व होते हैं। इसके साथ बासी खाना खाने से और खराब पानी पीने से भी गैस हो जाती है।

घरेलू उपचार-

* भोजन के साथ सलाद के रूप में टमाटर का प्रतिदिन सेवन करना लाभप्रद होता है। यदि उस पर काला नमक डालकर खाया जाए तो लाभ अधिक मिलता है। पथरी के रोगी को कच्चे टमाटर का सेवन नहीं करना चाहिए।

* 1/2 चम्मच सूखा अदरक पाउडर [सौंठ] लें और उसमें एक चुटी हींग और सेंधा नमक मिला कर एक कप गरम पानी में डाल कर पीएं।

* गैस के कारण सिर दर्द होने पर चाय में पिसी कालीमिर्च डालें। वही चाय पीने से लाभ मिलता है।

* कुछ ताजा अदरक स्लाइस की हुई नींबू के रस में भिगो कर भोजन के बाद चूसने से राहत मिलेगी।

* पेट में या आंतों में ऐंठन होने पर एक छोटा चम्मच अजवाइन में थोड़ा नमक मिलाकर गर्म पानी में लेने पर लाभ मिलता है। बच्चों को अजवायन थोड़ी दें।

*भोजन के एक घंटे बाद 1 चम्मच काली मिर्च, 1 चम्मच सूखी अदरक और 1 चम्मच इलायची के दानो को 1/2 चम्मच पानी के साथ मिला कर पिएं।

* वायु समस्या होने पर हरड़ के चूर्ण को शहद के साथ मिक्स कर खाना चाहिए।

* अजवायन, जीरा, छोटी हरड़ और काला नमक बराबर मात्रा में पीस लें। बड़ों के लिए दो से छह ग्राम, खाने के तुरंत बाद पानी से लें। बच्चों के लिए मात्रा कम कर दें।

* अदरक के छोटे टुकड़े कर उस पर नमक छिड़क कर दिन में कई बार उसका सेवन करें। गैस परेशानी से छुटकारा मिलेगा, शरीर हलका होगा और भूख खुलकर लगेगी।

योग
वज्रासन : खाने के बाद घुटने मोड़कर बैठ जाएं। दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें। 5 से 15 मिनट तक करें।
गैस पाचन शक्ति कमजोर होने से होती है। यदि पाचन शक्ति बढ़ा दें तो गैस नहीं बनेगी। योग की अग्निसार क्रिया से आंतों की ताकत बढ़कर पाचन सुधरेगा।–

क्यों जरूरी है ब्रेकफास्ट - जाने इसके फायदे



संजना को सुबह उठने में रोज देर हो जाती है। जाहिर है, देर से उठने के बाद हर काम के लिए वह लेट हो चुकी होती है। बस, वह यही सोचती है कि उसे ऑफिस ठीक साढ़े नौ बजे पहुंचना है, वरना वह नौकरी से हाथ धो बैठेगी। वह तेज गति से जैसे-तैसे तैयार होती है। बैग उठाया और सीधे गाड़ी में सवार। ऑफिस तो वह रोज समय से पहुँच जाती है, पर इस भागा-दौड़ी में उसका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है और इसकी खास वजह है सुबह का नाश्ता न करना।

  ब्रेकफास्ट के लिए टाइम नहीं बचता, यह दलील वह पिछले पांच वर्षो से देती आ रही है। जाने-अनजाने ब्रेकफास्ट न करना उसके स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक है। घड़ी की सुइयों की नोक पर टिकी रीना की जिंदगी में बहुत से ऐसे काम हैं जो छूटते जा रहे हैं। अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भी उनमें से एक है।

बढ़ती प्रवृत्ति

महानगरों या शहरों में यह कहानी सिर्फ सीमा की नहीं है, बल्कि अधिकतर कामकाजी स्त्रियों की है। क्यों छूट रही है नाश्ते की आदत? महानगरों के तेज रफ्तार जीवन को देखते हुए यह बात और भी स्पष्ट हो जाती है कि परंपरागत रूप से दिनचर्या में शामिल होने वाले कामों की सूची अब आधी से भी कम रह गई है। सूर्य नमस्कार, पेड़-पौधों को जल डालना, पूजा-अर्चना की बातें तो इतिहास बन ही चुकी हैं, जिंदगी की तेज रफ्तार ने बे्रकफास्ट या सुबह के नाश्ते जैसी स्वास्थ्य के लिए जरूरी चीज को भी पीछे छोड़ दिया है। महानगरों में लगभग 40 प्रतिशत वयस्क सुबह का नाश्ता बिना किए घर छोड़ते हैं।
 
   नाश्ता न करने के दो मुख्य कारण होते हैं- समय की कमी या डाइटिंग। पुरुष जहां समय की कमी के कारण चाहते हुए भी नाश्ता नहीं कर पाते, स्त्रियाँ मुख्यत: स्वैच्छिक रूप से नाश्ता नहीं करतीं, क्योंकि वे डाइटिंग कर रही होती हैं। या फिर ऑफिस जल्दी पहुँचने के चक्कर में वे नाश्ते को प्राथमिकता नहीं देतीं। कुछ स्त्रियाँ तो पाश्चात्य संस्कृति की दुहाई देते हुए ब्रेकफास्ट न करने को बहुत आधुनिक समझती हैं।

क्या है ब्रेकफास्ट

ब्रेकफास्ट अंग्रेजी का शब्द है जो दो शब्दों को जोड़कर बना है- ब्रेक (तोड़ना)+फास्ट (उपवास) यानी ऐसा भोजन, जो उपवास को तोड़ता है। शाब्दिक अर्थ अपने आप में महत्वपूर्ण तथ्य लिए है, जिसका स्वास्थ्य से गहरा संबंध है। भारतीय परंपरा में भी सुबह के नाश्ते को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि नाश्ता शरीर द्वारा रखे गए रात भर के उपवास को सुबह तोड़ता है और शरीर को दिन भर कार्य करने की क्षमता व ऊर्जा प्रदान करता है। ऐसे में कामकाजी स्ति्रयों के लिए यह बहुत जरूरी है कि दफ्तर जाने से पहले वह नाश्ता कर लें, ताकि दिन भर काम के लिए उनको उचित ऊर्जा मिले।

वैज्ञानिक तथ्य

वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, मनुष्य का मैटाबॉलिज्म रेट, यानी शरीर की वह क्रिया जिससे भोजन जीवित पदार्थो में बदल जाता है, सोते वक्त धीमी हो जाती है और शरीर में जमा कैलोरीज बहुत धीरे जलती हैं। जबकि मनुष्य की जागृत अवस्था में यही क्रिया तेज गति से होती है और कैलोरीज भी जल्दी जलती हैं, जिससे शरीर स्फूर्तिमय रहता है। यह एक भ्रामक धारणा है कि ऐसा न करने से कैलोरीज घटती हैं। सच तो यह है कि ब्रेकफास्ट न करने से शरीर में वसा का बढ़ना शुरू हो जाता है क्योंकि शरीर का मौलिक मैटाबॉलिक रेट तथा ऊर्जा अत्यंत कम हो जाती है।

  रात भर सोने के बाद जब आप सुबह उठती हैं तो शरीर प्राप्त संकेतों के अनुसार कार्य करना शुरू कर देता है। मस्तिष्क शरीर के मैटाबॉलिज्म के अनुसार संकेत लेता है और शरीर की गतिविधियों के अनुसार इच्छित व सही बदलाव शरीर में लाता है। यदि आप सुबह के समय सुस्ती या आलस्य महसूस करती हैं तो बहुत संभव है कि दिन भर आपकी कैलोरीज जलने की मात्रा बहुत कम होगी।

घातक है नाश्ता न करना

ब्रेकफास्ट न करने से शरीर में कैलोरीज का जमाव होता रहता है। कभी-कभी सुबह भूख न लगने के कारण नाश्ता करने की इच्छा नहीं होती और बहुत से लोग इसी वजह से नाश्ता नहीं करते। पर ऐसा करने से शरीर में मैटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण कैलोरीज जलने के बजाय शरीर में जमा होती रहती हैं। कैलोरीज का जमा होना यानी चर्बी का बढ़ना। जो स्त्रियाँ खुद को फिट रखने की या पतला होने की इच्छा से ब्रेकफास्ट नहीं करतीं, दरअसल उनकी यह आदत उनके उद्देश्य की विपरीत दिशा में कार्य कर रही होती है।

   यदि नाश्ता न करने के कारण या किसी अन्य वजह से आप शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं तो शरीर इस अवस्था को भूख से ग्रस्त स्थिति समझ लेता है। शरीर की ऊर्जा शरीर द्वारा अत्यंत कम मात्रा में ग्रहण की जाती है और इसका दुष्परिणाम यह होता है कि आपकी इच्छा वसायुक्त भोजन करने की होती है। अत: ब्रेकफास्ट न करने से जो कैलोरीज या शक्ति शरीर के अंदर नहीं गई थी, वह दोपहर के भोजन या लंच द्वारा दुगनी मात्रा में या उससे भी अधिक मात्रा में (वसायुक्त भोज्य पदार्थो के खाने से) शरीर में पहुँच जाती है। अत: डाइटिंग का असर शरीर के अनुकूल होने के बजाय प्रतिकूल होता है। इसके विपरीत, 'ब्रेकफास्ट में यदि आपने कम वसा वाला भोजन लिया है तथा मैटाबॉलिज्म को बढ़ाने वाले प्रोटीन से भरपूर चीजें खाई हैं, जैसे बिना मलाई वाला दूध, कम वसा वाली चीज या दही, तो लंच में बहुत ज्यादा खाने की इच्छा स्वत: ही खत्म हो जाएगी,' ऐसा कहना है डाइटीशियनस का....

शरीर के लिए जरूरी है

आहार विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेकफास्ट करने का अर्थ है, शरीर को दिन भर गतिशील और आलस्य से दूर रखना, ताकि शरीर व मस्तिष्क द्वारा किए गए काम सुचारु रूप से किए जा सकें। यदि आप सुबह बे्रकफास्ट नहीं करती हैं तो शरीर को पर्याप्त ईधन नहीं मिलता और बार-बार कुछ न कुछ खाने की इच्छा उत्पन्न होती रहती है, जो आमतौर पर लोगों की आदत बन जाती है।

   इस आदत के शिकार लोगों का स्वास्थ्य प्राय: ठीक नहीं रहता और वे अधिकांशत: ज्यादा वजन वाले होते हैं। जबकि दिन में तीन मुख्य भोजन बे्रकफास्ट, लंच व डिनर करने वाले व्यक्तियों का स्वास्थ्य सामान्य व अच्छा होता है। इन भोजनों के बीच कुछ तरल खाद्य पदार्थो का सेवन जैसे चाय, कॉफी, जूस आदि उतना हानि नहीं पहुँचाते, जितना स्नैक्स पहुँचाते हैं। यह भी सच है कि ब्रेकफास्ट में आपने क्या खाया है, इसका असर आपकी दिनचर्या पर भी पड़ता है। यदि आप ताजा और पौष्टिक नाश्ता करती हैं तो दिन भर आप स्वस्थ और स्फूर्ति से भरपूर रहेंगी। ऐसे में सुबह घर से निकलने से पहले पौष्टिक नाश्ता करना आवश्यक है। ब्रेकफास्ट करने वाले व्यक्तियों का वजन न करने वालों की अपेक्षा तो कम होता ही है, साथ ही रक्तचाप का स्तर भी ऐसे व्यक्तियों का सामान्य पाया गया है।

क्या कहती हैं आहार विशेषज्ञा

आहार विशेषज्ञ ब्रेकफास्ट करने की सलाह इसलिए देते हैं क्योंकि इससे दिन की शुरुआत स्फूर्तिमय होती है। शरीर की रासायनिक प्रक्रिया को भली-भांति समझते हुए ही डॉक्टरों व आहार विशेषज्ञों द्वारा ऐसी राय दी जाती है, 'लिवर या यकृत सुबह के वक्त अपनी शक्ति ईधन ग्लाइकोजन से लगभग 75 प्रतिशत वंचित रहता है। लिवर को यह ईधन ग्लूकोज से प्राप्त होता है। अपनी क्षतिपूर्ति के लिए लिवर यह ग्लूकोज मांसपेशियों के प्रोटीन से प्राप्त करना चाहता है। मांसपेशियों के प्रोटीन को बचाने के लिए जरूरी है कि सुबह शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पहुंचा दी जाए, ताकि लिवर को ग्लाइकोजन मिल सके।

   ऐसा करने से मस्तिष्क भी बेहतर काम करता है क्योंकि मस्तिष्क को जटिल कार्यो को करने में ग्लूकोज की आवश्यकता होती है। संक्षेप व सरल भाषा में यह कहा जा सकता है कि यदि ब्रेकफास्ट में कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन किया जाए तो आप दिन भर न थकान महसूस करेंगी और न ही सुस्ती। साथ ही एकाग्रचित्त होकर काम भी कर पाएंगी।'

क्या खाएं क्या नहीं

सुबह ब्रेकफास्ट करना अच्छा ही नहीं आवश्यक है, यह बात तो स्पष्ट हो जाती है, पर यह जानना भी जरूरी है कि ब्रेकफास्ट कैसा हो। हलका, पौष्टिक तथा संतुष्टिदायक ब्रेकफास्ट स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा है। उत्तर भारत में प्रचलित व पसंदीदा नाश्ता परांठे, समोसे या तले हुए अन्य स्नैक्स होते हैं या फिर व्हाइट ब्रेड, उबले अंडे या बेकन, सैंडविच इत्यादि। डॉक्टरों की राय में दोनों ही प्रकार के नाश्ते स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं, क्योंकि इनमें तेल और चिकनाई की मात्रा अधिक होती है।

  आदर्श ब्रेकफास्ट में ताजे फल, गेहूं का बे्रड या हलके वसायुक्त मक्खन वाले टोस्ट या मार्जरिन होते हैं। जैम के साथ टोस्ट, मलाई रहित दूध के साथ कोई भी सीरियल (कार्नफ्लेक्स आदि), ताजे फलों का रस, अंकुरित अनाज, उबले या पोच्ड अंडे और नारियल पानी होना चाहिए। यदि वजन को नियंत्रित करने के लिए आप ब्रेकफास्ट नहीं करतीं तो यह ठीक नहीं है। वजन कम करने वाले लोगों को भी ब्रेकफास्ट करना चाहिए, बस इस बात का ध्यान रखें, उसमें 10 ग्राम से अधिक वसा की मात्रा न हो। दिन में भोजन कम मात्रा में करें लेकिन ब्रेकफास्ट जरूरी है।
 
   बेहतर होगा किसी डाइटीशियन या न्यूट्रीशनिस्ट की सलाह से ब्रेकफास्ट चार्ट तैयार करें जिससे हर भोजन से मिलने वाली कैलोरीज, वसा, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट व खनिज पदार्थो की सही मात्रा आपको पता लग सके.......

Monday, 27 April 2015

जो आज करोगे वो 'आपका कल' बन सामने होगा



क्या गुजरी होगी उस बुढ़ी माँ के दिल पर जब उसकी बहु ने कहा -:
"माँ जी, आप अपना खाना बना लेना, मुझे और इन्हें आज एक पार्टी में जाना है ...!!"

बुढ़ी माँ ने कहा -: "बेटी मुझे गैस चुल्हा चलाना नहीं आता ...!!"

तो बेटे ने कहा -: "माँ, पास वाले मंदिर में आज भंडारा है , तुम वहाँ चली जाओ ना खाना बनाने की कोई नौबत ही नहीं आयेगी....!!!"

माँ चुपचाप अपनी चप्पल पहन कर मंदिर की ओर हो चली.....
यह पुरा वाक्या 10 साल का बेटा रोहन सुन रहा था ।

पार्टी में जाते वक्त रास्ते में रोहन ने अपने पापा से कहा -:

"पापा, मैं जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ना तब मैं भी अपना घर किसी मंदिर के पास
ही बनाऊंगा ....!!!

माँ ने उत्सुकतावश पुछा -: क्यों बेटा ?
रोहन ने जो जवाब दिया उसे सुनकर उस बेटे और बहु का सिर शर्म से नीचे झुक गया जो अपनी माँ को मंदिर में छोड़ आए थे.....

रोहन ने कहा -: क्योंकि माँ, जब मुझे भी किसी दिन ऐसी ही किसी पार्टी में जाना होगा
तब तुम भी तो किसी मंदिर में भंडारे में खाना खाने जाओगी ना और मैं नहीं चाहता कि तुम्हें कहीं दूर के मंदिर में जाना पड़े....!



अनिद्रा की समस्या को दूर करते है - संतरे के छिलके



जब हम संतरे को खाते हैं तो सामानयत: हम उसके छिलके को फेंक देते हैं या उसके छिलके का उपयोग एक दूसरे की आंखों में डालने व रुलाने के लिए मस्ती में करते हैं जो एक तरह से एक उपयोगी चीज का नुकसान करना ही कहलाएगा। जी हां आपको ये सुनकर आश्चर्य जरूर हो रहा होगा लेकिन यह सच है।
संतरे का छिलका इतना उपयोगी है कि जब आप इसके गुण जान जाएंगे तो कभी इसके छिलके फेंकना नहीं चाहेंगे।


बालों को खूबसूरत बनाता है-
अगर आपके बाल एकदम रफ और बेजान दिखाई देते हैं तो संतरे के छिलके आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। संतरे के छिलकों को पीसकर बालों में लगाकर कुछ देर रखें और फिर बाल धो लें। बाल चमकीले और मुलायम हो जाएंगे। संतरे के छिलकों को पीस कर उसमे गुलाब जल मिलाकर चहरे पर लगाने से दाग व धब्बे मिटते हैं।

स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं-
संतरे के छिलके में क्लीजिंग, एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कि पिंपल और एक्ने से लडऩे में सहायक होते हैं। संतरे के छिलके को सुखाकर पीसकर उसे दही मिलाकर स्किन पर लगाने से स्किन ग्लोइंग व स्मूथ बनती है। संतरे के छिलकों को बेसन में मिलाकर लगाना ऑइली स्किन वालों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है और पिंपल्स को खत्म कर देता है।

कोलेस्टॉल के रोगियों के लिए फायदेमंद है -
एक अध्ययन के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल की प्रॉब्लम हो तो ऐसे में संतरे के छिलके उपयोगी साबित हो सकते हैं। संतरे के छिलको में ऐसा गुण पाया जाता है जिससे उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर है जो मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों को फायदा हो सकता है। साथ ही ये कैंसर व हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं में भी विशेष रूप से लाभदायक है।

पाचन शक्ति बढ़ाता है-
इसके छिलके में पाचनशक्ति बढ़ाने की क्षमता होती है। यह पाचन में सुधार, गैस, उल्टी, हार्ट बर्न और अम्लीय डकार को दूर करने में मदद करता है। यह भूख बढाता है और मतली से राहत दिलाने का काम करता है साथ ही संतरे का छिलका कृमि का नाश करने वाला व बुखार को मिटाने वाला भी होता है। इसलिए इन सभी रोगों के रोगियों को संतरे का छिलका पीसकर खिलाने पर फायदा होता है।

अनिद्रा की समस्या को दूर करता है-
नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। जी हां नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। इस तेल का उपयोग तंत्रिकाओं को शांत करने व गहरी नींद के लिए किया जाता है। नहाने के पानी में इसका दो से तीन बूंद तेल डालिए और फिर देखिए कितनी मीठी नींद आती है।

How to Create a Facebook Business Page



How to Make a Facebook Fan Page for Your Blog

1. Go to http://www.facebook.com/pages/create.php to get started. You’ll see a screen like this:

2. Click on Brand or Product in the upper right box. You’ll be prompted to choose a category.

3. In the category dropdown, select Website.

4. Type in your blog name under the Category dropdown box, check the box to agree to Facebook’s  TOS, and click Get Started.

5. You’ll be asked to provide some basic information about your page. Fill in a description, your website URL if you have one, and choose a unique Facebook URL for your fan page. You’ll also be asked if your page represents a real business, product, or brand – no worries if yours doesn’t! It really depends on whether you consider your blog a business or brand, but answering “no” is fine if your blog is just a hobby.

6. Next you’ll be prompted to upload a profile picture. If you have a logo, this would be a good time to upload it. If you don’t, feel free to skip this step – you can always add a picture later.

7. Add your page to your Favorites. This option will place a link to your fan page in the left sidebar when you’re signed into Facebook. It’s totally optional but makes it really easy to find your page later!

8. You’ll be taken to your page, which has the admin panel across the top. Feel free to explore the various settings and options. There are all kinds of prompts to help you understand what to do.

9. You’re all done! There are some other things you’ll need to do, like mention your Facebook fan page on your blog, with a link or button so people can go “like” it, but other than that, your fan page is all set up and ready for you to post.


शेयर बाजार में कैसे करें निवेश की शुरुआत













दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वॉरेन बफेट का कहना है, 'जब सभी लोगों को डर और आशंका सता रही है तो आपको लालची बनना चाहिए और जब सभी लोग लालची और अवसरवादी दिखें तो आपको सतर्कता और डर के साथ काम करना चाहिए।

इक्विटी मार्केट में कैसे करें निवेश की शुरुआत और कैसे बनाएं अपना मजबूत पोर्टफोलियो आइए जानते हैं

इक्विटी निवेश के लिए बैंक एकाउंट, डीमैट एकाउंट, ट्रेडिंग एकाउंट होना चाहिए। इक्विटी में आईपीओ, सेकेंडरी मार्केट या म्युचुअल फंड के जरिए निवेश किया जा सकता है। आईपीओ या लिस्टेड शेयर में निवेश करने से पहले निवेशकों को रिसर्च करके खुद की समझ से कंपनी के परफॉर्मेंस, मैनेजमैंट को देखकर निवेश करना चाहिए।

शेयर बाज़ार में निवेश से पहले मदद लें
निवेश की की शुरुआत में कई लोग आपके मददगार साबित होंगे। आप वित्तीय योजनाकार या फाईनेन्शियल एडवाइज़र (financial advisior) की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप निवेश को लेकर इंटरनेट पर रिसर्च (खोज) कर सकते हैं। इंटरनेट पर ऐसी कई वेबसाइट्स हैं जहाँ आपको काफी जानकारी मिल सकती है।

अपनी मदद खुद कीजिए
यदि आप निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो इंटरनेट पर आपको मुफ्त में कई जानकारियां मिल जाएंगी। इस तरह आप अपनी मदद खुद कर सकते हैं, और एक कुशल निवेशक बन सकते हैं। आपके पास जितनी ज़्यादा जानकारी होगी, उतने ही सफल निवेशक बन सकेंगे। निवेश की जानकारी आपको सार्वजनिक पुस्तकालय (लाइब्रेरी), मैगज़ीन्स (पत्रिका), अख़बारों और किताबों की दुकान के जरिए इकट्ठा करनी चाहिए।

शेयर ब्रोकर की मदद लें
शेयर ब्रोकर को लाइसेंस मिला होता है कि वे शेयर मार्केट में किसी का शेयर खरीद या बेच सकते हैं। वे आपको बाज़ार की स्थिति के बारे में बताएंगे, ताकि आप ये निर्णय ले सकें कि लंबी अवधि के लिए निवेश का लक्ष्य कैसे तय किया जाए। जब आपका शेयर खरीदा या बेचा जाता है उस पर शेयर ब्रोकर कुल क़ीमत का कुछ हिस्सा लेता है। ये कमीशन कहलाता है।

वित्तीय सलाहकार से मदद लें
वित्तीय सलाहकार या फाइनेन्शियल एडवाइज़र (financial advisior) आपके पैसों को सही ढंग से निवेश करने में मददगार होते हैं। फाइनेन्शियल एडवाइज़र आपको आपकी ज़रूरत के मुताबिक सही इन्वेस्टमेंट की सलाह देंगे। इस काम के लिए वो आपसे फीस भी लेंगे।

प्रशिक्षण लें
अपने आसपास मौजूद उच्च शिक्षा संस्थानों का पता करें। निवेश से संबंधित कोर्स (पाठ्यक्रम) कई जगह कराए जाते हैं, ताकि आप अपने पैसों का सही इस्तेमाल करना सीख सकें। आप ऑनलाइन कोर्स भी कर सकते हैं।

अपना पोर्टफोलियो तैयार करें
निवेश के मामले में कुछ लोग बड़े जोखिम उठाने से नहीं घबराते, जबकि कुछ लोग सुरक्षा को ध्यान में रखकर निवेश करना पसंद करते हैं।
आपका पोर्टफोलियो निवेशों का संग्रह (कलेक्शन) है। आप निवेश में जोखिम कम कर सकते हैं अगर आपने अलग-अलग जगह या संपत्ति में निवेश किया हो। निवेश की शुरुआत करते वक्त दो बाते बहुत मायने रखती हैं। ये हैं - डायवर्सिफिकेशन और एसेट अलोकेशन।

सिंहस्थ २०१६ (कुम्भ) महापर्व उज्जैन



 उज्जैन धार्मिक अस्थाओ व परंपरा के सम्मलेन का एक अनूठा शहर जो कि न केवल भारत अपितु समस्त संसार कि धार्मिक अस्थाओ का केंद्र कहा जा सकता है यह वह पवित्र नगरी है जहा ८४ महादेव, सात सागर,९ नारायण ,२ शक्ति पीठो के साथ विश्व मै १२ जोतिलिंगो मै से एक राजाधिराज महाकालेश्वर विराजमान है यह वह पवन नगरी है जिसमें गीता जैसे महान ग्रन्थ के उद्बोधक श्री कृष्ण स्वयं शिक्षा लेने आए अपने पैरों कि धुल से पाषणों को भी जीवटी कर देने वाले प्रभु श्री राम स्वयम अपने पिता तर्पण करने शिप्रा तट पर आए यही वह स्थान है जो कि रामघाट कहलाता है इस प्रकार विश्व के एक मात्र राजा जिसने कि सम्पुर्ण भारत वर्ष के प्रत्यक नागरिक को कर्ज मुख्त कर दिया वह महान शासक विक्रमादित्य उज्जैन कि हि पवन भूमि पर जन्मे | पवन सलिला मुक्तिदायिनी माँ शिप्रा यही पर प्रवाहित होती है एवं विश्व का सबसे बड़ा महापर्व महाकुम्ब /सिंहस्थ मेला विश्व के ४ स्थान मै से एक उज्जैन नगर मै लगता है इस नगरी कि महात्मा वर्णन करना उतना हि कठिन है जितना कि आकाश मै तारा गानों कि गिनती करना जय श्री महाकाल !!!

 सिंहस्थ (कुम्भ) हमारी धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना का महा पर्व है| सनातन कल से यह संसार का सबसे बढ़ा मेला कहा जा सकता है| पुराणोंमें कुम्भ पर्व मनाये जाने के संभंध में कई कथाएँ है| सबसेप्रामाणिक कथा समुद्र मंथन की है | देव और दानवों ने आपसी सहयोग से रत्नाकर आर्थात समुद्र के गर्भ में छिपी हूई अमूल्य सम्पंदा का दोहन करने का निश्चय किया | मंदराचल पर्वत को मथनी, क्चछप् को आधार एवं वासुकी नाग को मथनी की रस्सी बनाया| उसके मुख की तरफ दानव व पूंछ की तरफ देवतागण उसे पकडकर उत्साह के साथ समुद्र मंथन के कार्य में जुट गए| इन दोनों पक्षों की संगठनात्मक शक्ति के सामने समुद्र को झुखना पढ़ा | उसमे से कुल १४ बहुमूल वस्तुए, जिन्हें रत्न कहा गया, निकली| अंत में अमृत कुम्भ निकला | अमृत कलश को दानवों से बचाने के लिए देवताओं ने इसकी सुरक्षा का दायित्व बृहस्पति,चंद्रमा,सूर्य और शनि को सौप दिया|अमृत कलश प्राप्त हो जाने से चारो और प्रसन्ता का वातावरण छा गया| देवता एवं दानव दोनों अपनी अपनी थकावट भूल गए | देव एवं दानव दोनों पक्ष इस बात में उलझ गए की अमृत कुम्भ- (कलश) का कैसे हरण किया जावे| स्कन्दपुराण के अनुसार इन्द्र ने अपने युवा पुत्र जयंत को कलश लेकर भागने का संकेत दिया| इस चाल को दानव समझ गए| परिमाणस्वरूप देवता व दानवों में भयंकर संग्राम छिड़ गया| यह संग्राम १२ दिन तक चला | देवताओं का एक दिन मनुष्यों के एक वर्ष के बराबर होता है |आर्थात १२ वर्ष तक देव – दानवों का युद्ध चला | इस युद्ध में अमृत कुम्भ की छिना झपटी में मृत्युलोक में अमृत की कुछ बुँदे छलक पड़ी थी


 वे चार स्थान प्रधान तीर्थ हरिद्वार , प्रयाग, नासिक और उज्जैन है, इस संग्राम में दानवों ने इन्द्र पुत्र जयंत से अमृत कलश छुडाने का असंभव प्रयास किया था, किन्तु देवताओं में सूर्य ,गुरु और चंद्र के विशेष प्रयत्न से अमृत कलश सुरक्षित रहा और और भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर दानवों को भ्रमित करके सारा अमृत देवताओं में वितरित कर दिया था | सूर्य , चंद्रएवं गुरु के विशेष सहयोग से अमृत कलश सुरक्षित रहने के कारण इन्ही ग्रहों की विशिष्ट स्थितियों में कुम्भ पर्व मनाने की परम्परा है|

 यह धार्मिक मान्यता है की अमृत कलश से छलकी बूंदों से ये चारो तीर्थ और यहाँ की नदियॉं (गंगा, जमुना, गोदावरी, एवं क्षिप्रा ) अमृतमय हो गई है| अमृत कलश से हरिद्वार ,प्रयाग, नासिक, और उज्जैन में, अमृत बिंदु छलकाने के समय जिन राशियों में सूर्य,चंद्र एवं गुरु की स्थिति उस विशिष्ट योग के अवसर पर रहती है, तभी, वहाँ कुम्भ पूर्व इन राशियों में ग्रहों के योग होने पर ही होते है|