Showing posts with label HEALTH NEWS. Show all posts
Showing posts with label HEALTH NEWS. Show all posts

Thursday, 28 May 2015

पेट की चर्बी घटाने में मदद करेंगे ये आसान टिप्स



यदि आप मोटे हैं तो कम खाइये और ज्‍यादा से ज्‍यादा व्‍यायाम कीजिये। पर ऐसा नहीं है, यदि ऐसा होता तो काफी लोग अपना वजन आसानी से कम कर चुके होते। अगर आप भी मोटापे का शिकार हैं और आपका वजन व्‍यायाम करने के बाद भी कम नहीं हो रहा है तो कहीं ना कहीं कुछ कमी रह गई है। यानी इसका यह मतलब नहीं है कि आप जरुरत से कम खाने लगे या फिर बहुत ज्‍यादा व्‍यायाम करने लगें। इसका यह मतलब होता है कि आपको अपनी लाइफस्‍टाइल में कुछ मामूली और जरुरी परिवर्तन करने होंगे। आज हम आपको कुछ ऐसे ही आसान तरीके बताएंगे जिन्‍हें अपना कर आप मोटापे से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं। पर आप को ख्‍याल रखना होगा कि अगर आपको मोटापा घटाना है तो इसे नियमित करना होगा नहीं तो आपको केवल निराशा के और कुछ हांसिल नहीं होगा।

 1- तुलसी के पत्तो का रस 10 बूंद व दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी मे मिलाकर कुछ दिन पीने से मोटापा कम होता है!

2-नीबू का रस 15 ग्राम, 15 ग्राम शहद व 125 ग्राम गरम पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट 2 या 3 महीने तक लगातार पीये मोटापा कम होगा!

3-तली-भुनी व मैदे से बनी चीजे न खाये! ताजी सब्जियां व ताजे फल लें!

4-अधिक मीठा व अधिक नमक न लें; नमक व मीठा दोनों एकदम बन्द कर देने से मोटापा तीव्रता से कम होता है !

5-रात को सोने से पहले कम से कम 2 घन्टा पहले डिनर करें!

6-खाने के बाद एक कप तेज गरम पानी घूंट लेकर पीये; मोटापा कम होगा!

7-खान-पान मे नियंत्रण रखें; पैदल घूमने जायें व साइकिलिंग करें! मोटापा घटाने वाले आसन करने से विशेष लाभ होता है। जैसे-उत्तानपदासन; हलासन; धनुरासन; भुजंगासन; सूर्य नमस्कार आदि! सूर्य नमस्कार एक पूर्ण व्यायाम है, जो शरीर के सभी अंगो को स्वस्थ रखता है व मोटापा कम करता है!

Saturday, 23 May 2015

चाय पीने वाले इस खबर को पढ़कर खुश हो जाएंगे...ना पीने वाले भी जरूर पढ़ें



चाय पीना और पिलाना आज हमारे दैनिक आवभगत के पेय में सम्मिलित हो चुका है,क्या गांव शहर शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो, जिसने अपने जीवन में चाय की चुस्कियों का एहसास न लिया हो,अभी हाल के ही एक शोध में यह बताया गया है, कि प्रतिदिन तीन कप काली चाय (बिना दूध वाली) पीना रक्तचाप को कम करने में मददगार होता है।

यह खबर उन लोगों के लिए एक खुशखबरी हो सकती है,जो अपने दिन की शुरुआत ही चाय से करते हैं। युनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने बिना दूध वाली काली चाय पर किये गए अध्ययन से इस बात की पुष्टि की है(दूध डालकर बनायी गयी चाय पर ऐसे परिणामों की पुष्टि अभी बाकी है), पूर्व में भी ऐसे कई परिणाम सामने आ चुके हैं, जो चाय के हृदय पर अच्छे प्रभाव की पुष्टि कर चुके हैं।

प्रमुख शोधकर्ता जोनाथन होजसन ने आस्ट्रेलिया के अखबार डेली मेल को बताया कि यह अध्ययन चाय और हृदय रोगों के बीच के सम्बन्ध को स्थापित करने कि दिशा में एक महत्वपूर्ण खोज होगा। हृदय द्वारा सम्पूर्ण शरीर को रक्त छोडऩे के दौरान उत्पन्न धड़कन का दबाव सीसटोलिक एवं हृदय द्वारा रक्त को लेने की स्थिति में उत्पन्न धड़कन का दवाब डायस्टोलिक को रक्तचाप के दौरान मापा जाता है।

35 से 75 आयु के 95 लोगों में कराये गए अध्ययन, जिनको प्रतिदिन तीन कप काली चाय पिलाई गई और एक दूसरा प्लेसिबो समूह जिसे किसी और स्रोत से प्राप्त कैफीन पिलाया गया में इस परीक्षण के परिणाम छ: महीने के बाद उक्त प्लेसीबो समूह से तुलनात्मक रूप में अध्ययन द्वारा देखे जाने पर यह पाया गया कि जिन लोगों ने काली चाय पी थी उनका सीसटोलिक एवं डायस्टोलिक रक्तचाप 2-3  घट गया। शोधकर्ताओं का मानना है, कि दो से तीन की रक्तचाप में कमी, उच्च रक्तचाप एवं हृदयरोगों की संभावना को दस प्रतिशत तक कम कर देती है। यह अध्ययन आर्चीव ऑफ इंटर्नल मेडीसिन में प्रकाशित हुआ है ...।

Monday, 18 May 2015

इन हेल्थ टिप्स को आजमा कर आप भी रह सकते हे स्वस्थ - Easy Health Tips

इन दिनों लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल ऐसी बना ली है कि दिनों दिन वे नई-नई परेशानियों और बीमारियों से घिरते जा रहे हैं। चाहे खान-पान हो या आरामदायक जीवनशैली। और तो और शहरी वातावरण भी उन्हें इस तरह की दिनचर्या बनाने में काफी मदद की है। सभी ऐशोआराम की चीजें उन्हें घर बैठे हासिल हो जाती है। उन्हें उठकर कहीं जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती। नतीजा....

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां। आइए नये साल पर अपनी आरामदायक जीवनशैली को बदलने के लिए कुछ संकल्प लें। यहां 15 आसान हेल्थ टिप्स दिये जा रहें हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी फिगर को मेंटन तो कर ही सकती हैं। साथ ही इन्हें अपनाकर आप दिन भर तरोताजा भी महसूस करेंगीं।

प्रतिदिन वॉक करें। अगर हो सके तो फुटबॉल खेलें यह एक प्रकार का एक्सरसाइज ही है।

ऑफिस में या कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बदले सीढिय़ों का इस्तेमाल करें।

अपने कुत्ते को वॉक पर खुद लेकर जाएं। बच्चों के साथ खेलें, लॉन में नंगे पांव चलें, घर के आसपास पेड़ पौधे लगाऐं, यानि कि वो सब करें जिनसे आप खुद को एक्टिव रख सकें।

ऐसी जगह एक्सरसाइज न करें जहां भीड़भाड़ ज्यादा हो।

तले-भुने भोजन, और अन्य फैटी चीजों से परहेज करें यह बहुत से बीमारियों की जड़ होती है।
डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। जैसे कि चीज, कॉटेज चीज, दूध और क्रीम का लो फैट प्रोडक्ट आदि।

यदि खाना ही है तो, मक्खन ,फैट फ्री चीज और मोयोनीज का लो फैट उत्पाद प्रयोग में लाऐं।

तनाव हमारी जिंदगी में काफी निगेटिव असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव कम करने के लिए सकारात्मक विचार बहुत मददगार साबित हो सकते हैं।

तनाव कम करने के लिए रोज कम से कम आधा घंटा ऐसे काम करें, जिसे करने में आपको मन लगता हो। तनाव कम करने के लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं।

गुस्सा तनाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है इसलिए गुस्सा आने पर स्वंय को शांत करने के लिए एक से दस तक गिनती गिनें।

उन लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो आपके तनाव को बढ़ाते हों।

धूम्रपान से परहेज करें। धूम्रपान से शरीर और उम्र पर असर तो पड़ता ही है, साथ ही फेफड़ों का कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है।

धूम्रपान में कमी लाने के लिए उसकी तलब लगने पर सौंफ आदि का सेवन करें।मार्केट में भी आजकल बहुत से प्रोडक्ट मिलने लगे हैं जो धूम्रपान की तलब को कम करते हैं।

पहचानिये आमला की शक्‍ति को वजन घटाने से लेकर तेज दिमाग तक,



हमारे देश में बहुतायत से मिलने वाला फल ,जिसे धात्रीफल ,अमृत फल भी कहते हैं ! अमृत जिसके सेवन से देवता अमर और चिरयुवा हो गए ! और इस अमृत फल के सेवन से वृद्ध च्यवन ऋषि पुनः युवा हो गए थे ! आयुर्वेद के अनुसार ये त्रिदोषनाशक है ! इसके गुण इसके अमृत फल नाम को सार्थक करते हैं !

वय स्थापक (शरीर को युवा रखने वाले ) द्रव्यों में यह सर्वश्रेष्ठ है ! यह शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढाता है ! आंवले में नारंगी से 20 गुना अधिक vitamin c होता है ! यह एक बेहतर antioxident है जो शरीर को युवा और स्वस्थ रखता है !

बालों के रोग : -आंवले का चूर्ण पानी में भिगोकर रात्रि में रख दें। सुबह इस पानी से रोजाना बाल धोने से उनकी जड़े मजबूत होंगी, उनकी सुंदरता बढ़ेगी और मेंहदी मिलाकर बालों में लगाने से वे काले हो जाते हैं।

आंवला एक उत्तम रक्तशोधक है ! खून में जमा हुए विजातीय तत्वों को दूर करता है ! इसलिए रक्तविकार (फोड़े-फुंसी ) नाशक है !

यह एक श्रेष्ठ रसायन है ,जो शरीर की कोशिकाओं को लम्बे समय तक स्वस्थ और युवा रखता है ! इसका सेवन बालों एवं आँखों के लिए लाभकारी है !

शारीर में महसूस होने वाली झूठी गर्मी ,दाह (acidity ),और पुरुषों में वीर्य की गर्मी को दूर करता है !

त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) से पैदा होने वाली उल्टी में आंवला तथा अंगूर को पीसकर 40 ग्राम खांड, 40 ग्राम शहद और 150 ग्राम जल मिलाकर कपड़े से छानकर पीना चाहिए।

हरे आंवले का रस 50 ग्राम, शक्कर या शहद 25 ग्राम थोड़ा पानी मिलाकर सुबह-शाम पीएं। यह एक खुराक का तोल है। इससे पेशाब खुलकर आयेगा जलन और कब्ज ठीक होगी। इससे शीघ्रपतन भी दूर होता है।

इसके रस को मिश्री के साथ लेने से गुर्दों में जमा मल दूर होता है ! शरीर में होने वाली थकान ,विबंध (constipation),यकृत विकार ,महिलाओं में अत्यधिक रक्तस्राव ,प्रदर ,गर्भाशय की दुर्बलता और पुरुषों में प्रमेह और शुक्रमेह को दूर करता है ! पोरुष को बढाता है !

आंवला सुप्रसिद्ध योग च्यवनप्राश और त्रिफला का मुख्य घटक है ! चूर्ण,मुरब्बा ,केन्डी ,आमलकी रसायन ,स्वरस(मिश्री या शहद मिला कर ) ,च्यवनप्राश किसी भी रूप में इसका सेवन किया जा सकता है !

आंवले के रस को आंखों में डालने अथवा सहजन के पत्तों का रस 4 ग्राम तथा सेंधानमक लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग इन्हें एक साथ मिलाकर आंखों में लगाने से शुरुआती मोतियाबिंद (नूतन अभिष्यन्द) नष्ट होता है।

Wednesday, 13 May 2015

बायो ऑइल क्या है ? इसे कौन इस्तेमाल कर सकता है ? बायो ऑइल के फायदे



बायो ऑइल क्या है ? इसे कौन इस्तेमाल कर सकता है ? बायो ऑइल के फायदे
क्या आप खिंचाव के निशान और असमान त्वचा टोन से पीड़ित हैं? इसके लिए बायो ऑइल अच्छा समाधान है। बायो ऑइल त्वचा की देखभाल के लिए बनाया गया उत्पाद है। इसका मुख्य घटक है पर्सल्लिन तेल जो त्वचा की समस्याएँ, निर्जलित त्वचा और बढती उम्र का त्वचा पर असर कम करने के लिए प्रभावी ढंग से काम करता है। विटामिन ए, कैलेंडुला तेल, रोजमेरी तेल, विटामिन ई, लैवेंडर का तेल और कैमोमाइल तेल जैसे कुछ प्राकृतिक चीजें बायो ऑइल में निहित हैं। बायो ऑइल में कोई प्रेसरवेटिव नहीं होता है और ये सभी प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्त है।

बायो ऑइल गर्भावस्था के बाद के निशान कम करने, चेहरे और शरीर की झुर्रियों वाली त्वचा, बढती उम्र का त्वचा पर असर, निर्जलित त्वचा के निशान, खिंचाव कम करने में मदद करता है। बायो ऑइल तेजी से अवशोषित होता है और कोई अवशेष नहीं छोड़ता है।

बायो ऑइल विटामिन ए का समृद्ध स्रोत होता है जो स्वस्थ त्वचा देता है।

बायो ऑइल मॉइस्चराइजिंग तेल है जो त्वचा के निशान मिटाकर त्वचा साफ़ करता है । नहाने के बाद इसे त्वचा पर लगायें । चेहरे के लिए २ बूंदें काफी होती हैं ।

बायो-ऑइल कैसे इस्तेमाल करें ?
बायो ऑइल निशान कम करने के लिए तीन महीनों के लिए दिन में दो बार लगायें । बायो ऑइल उँगलियों पर लेकर निशान पर मालिश करें | बायो ऑइल में सनस्क्रीन ना होने से वह त्वचा में शोषित होने के बाद ही सनस्क्रीन लगायें । टूटी हुई त्वचा पर बायो ऑइल का उपयोग न करें।

परिणाम देखने के लिए कितनी देर लगती है ?
हाल ही में बने निशान पुराने निशान की तुलना में जल्दी कम हो जाते हैं । हर एक की त्वचा अलग होती है और इसलिए हर व्यक्ति में इसका परिणाम अलग दिखता है । यह त्वचा की स्थिति पर ज्यादा निर्भर करता है। चेहरे के निशान या असमान त्वचा टोन के लिए कम से कम चार सप्ताह के लिए बायो ऑइल इस्तेमाल करें ।

बायो ऑइल कौन इस्तेमाल न करें?
बच्चे २ साल के होने तक उन पर बायो ऑइल इस्तेमाल न करें | उनकी त्वचा अतिसंवेदनशील होने के कारण बायो ऑइल २ साल के बाद ही प्रयोग करें |
बायो ऑइल के फायदे

स्नान: यह सभी प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्त है | नहाने के बाद अपनी त्वचा पर और शरीर पर थोडा तेल लगायें । बायो ऑइल आसानी से सोख लिया जाता है और अच्छे मॉइस्चराइजर के रूप में कार्य करता है।

लिप बाम : होटों को नरम और नम करने के लिए थोडा बायो ऑइल दिन में २ बार लगायें
बालों का इलाज : थोडा बायो ऑइल लेकर अपने बालों की जड़ों में लगाने से त्वचा शांत हो जाती है|
मेकअप से पहले लगाना : बायो ऑइल की 1 बूंद चेहरे पर फाउंडेशन लगाने से पहले लगायें | यह शुष्क त्वचा के लिए अच्छा है |

शियल : बायो ऑइल की ५ बूंदें एक कटोरे में लेकर उसमे गरम पानी मिलाएं | इस पानी में एक कपडा भिगोकर ५ मिनट चेहरे पर रखें |

खों का मेकअप निकालने के लिए : थोडा बायो ऑइल कपास पर लेकर आँखों का मेकअप निकालें |
विंग के पहले बायो ऑइल लगायें |

यो ऑइल नाखुनो पर लगाने से उनका स्वास्थय सुधरता है |
हनी की त्वचा शुष्क होने पर वहां बायो ऑइल लगाने से वह नरम और नम हो जाती है |

गर्दन पर पड़ी झुर्रियों को ऐसे करें ठीक Tips to treat the neck wrinkles



गर्दन पर पड़ी झुर्रियों को ऐसे करें ठीक Tips to treat the neck wrinkles
गर्दन पर झुर्रियां पड़ना काफी आम सी बात है। यह उम्र के साथ साथ और भी ज्‍यादा बढ़ती जाती हैं, लेकिन आप चाहें तो इनका बढ़ना कुछ कम कर सकती हैं। यह झुर्रियां गर्दन के साथ ही माथे, आंखों के आस पास और अन्‍य जगहों पर पड़ने लगती हैं। यदि आप बहुत ज्‍यादा धूप में रहती हैं तो यह झुर्रियां और बढ़ सकती हैं। ऐसे कई प्राकृतिक तरीके हैं
जिनकी मदद से आप गर्दन पर पड़ रही झुर्रियों को दूर कर सकती हैं। आइये जाने इसके बारे में-

पोषण
गर्दन पर झुर्रियां पड़ने का एक और कारण यह भी है कि आपके शरीर में कुछ पोषणों की कमी भी है। आपको सिट्रस फल, हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां, लो फैट दूध, गहरी हरी रंगों वाली सब्‍जियां और गाजर खाने की आवश्‍यकता है। इन आहारों में विटामिन ए, सी और ई होता है जो त्‍वचा को टाइट बनाती हैं।
गले के कालेपन से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्खे

हाइड्रेशन 
वे लोग जो दिन में बहुत ही कम मात्रा में पानी का सेवन करते हैं उनकी त्‍वचा रूखी बन जाती है और समय के साथ साथ ढीली पड़ने लगती है। अगर आपको झुर्रियों से मुक्‍ती पानी है तो खूब सारा पानी पियें। लगभग 7 से 8 गिलास पानी पीना काफी जरुरी है।

सनस्‍क्रीन 
चेहरे या गरदन पर झुर्रियों का एक और कारण सूरज की तेज धूप भी है। इससे बचने के लिये एक अच्‍छी सनस्‍क्रीन क्रीम खरीदें। यह आपको सूरज की घातक किरणों से बचाएगी।

ऑलिव ऑइल
नारियल तेल या जैतून का तेल सभी घरों में मौजूद होता है। यह त्‍वचा को प्राकृतिक रूप से नमी प्रदान करता है। इससे रोजाना अपने गरदन की ऊपर की ओर मालिश करें। यह गरदन से झुर्रियों को हटाने में मदद करेगें।

गरदन का व्‍यायाम
यदि आप चाहती हैं कि आपकी गरदन बिल्‍कुल टाइट बनी रहे तो आपको रोजाना व्‍यायाम करना चाहिये। अपनी गरदन को 2-3 बार घंटी की सूई की तरह पूरा घुमाइये। उसके बाद ऊपर नीचे कीजिये।

Tuesday, 12 May 2015

'कुछ मीठा हो जाए कहीं लत तो नहीं लग गयी आपको मिठास की?



'कुछ मीठा हो जाए कहीं लत तो नहीं लग गयी आपको मिठास की?

हम सभी मिठास के शिकार होते हैं ज़िन्दगी में, कभी न कभी. केक हो या गुलाब-जामुन, भई कुछ मीठा ज़रूर होना चाहिए, हैं ना?
हमारे दैनिक जीवन-शैली में ये 'मिठास' की चाहत एक कमज़ोरी सी बनती जा रही है. आधुनिकीकरण ने हमें मेहनतकश बनने से रोक रखा है, और खाने की चाहत हमारी उतनी ही रह गयी है जितना कि एक मेहनतकश इंसान दिनभर की मजदूरी के बाद खाता है. नतीजा 'डाईटरी- इम्बैलेंस'. भोजन में शर्करा यानि कार्बोहाईड्रेट की अधिकता हमारे स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव डालती है. उधाहरण के तौर पर, अत्यधिक शर्करा सेवन:
१. सीधा प्रभाव करती है वसा (Fat) के तौर पर जमा होकर, जो कि ओवरवेट या मोटापे का मुख्य कारण है.
२. रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा सामान्य से बहुत ऊंचे स्तर पर रहती है, जिससे इंसुलिन का स्राव बढ़ता है और मधुमेह की स्थिति बनती है.
३. ग्लूकोज़ की ऊंची मात्रा मस्तिष्क को और अधिक शर्करा सेवन के लिए लालायित करती है, और ये कुचक्र चलता ही रहता है.

शोधकर्ताओं ने ये पाया है कि शर्करा के जो तत्व और ज्यादा खाने के लिए दिमाग में लालसा/craving बढाते हैं, उनकी तुलना मोर्फीन या हेरोइन जैसे लत से की जा सकती है. यानी कि आज के सन्दर्भ में 'मिठास' इच्छा से कहीं ऊपर, एक लत की संज्ञा लेती जा रही है.  एक ऐसी लत जो कोकेन जैसे ड्रग्स से भी ज्यादा प्रभावकारी है. शर्करा की इस लत का कारण 'लेप्टीन' नामक हार्मोन है जो मीठे चीज़ों के प्रति हमारा आकर्षण बढाता है. शर्करा जब वसा के तौर पर कोशिकाओं में जमा होती है, तो उसके साथ ही 'लेप्टीन' का रक्त में अत्यधिक स्राव होता है. और धीरे-धीरे हमारा तंत्र अत्यधिक लेप्टीन का आदि हो जाता है. नतीजा ये कि दिमाग को सिग्नल ही नहीं मिलता कि 'पेट भरा हुआ है और भूख नहीं लगी है'. हमेशा कुछ न कुछ खाने की इच्छा होती रहती है. और इस तरह ये कुचक्र हमारे तंत्र में स्थापित हो जाता है.
अब सवाल ये उठता है कि मिठास के इस लत से बचा कैसे जाए. क्योंकि अगर हमने ये लत छोड़ दी तो एक स्वास्थ्यकर जीवन जीने के उद्देश्य को हम आसानी से पा सकते हैं. लेकिन लत चाहे किसी भी चीज़ की हो- सिगरेट, शराब या ड्रग्स की, छोड़ना थोडा मुश्किल ज़रूर होता है. फिर भी कुछ मुख्य बिन्दुओं पर हम गौर कर सकते हैं:
१. लो-फैट और फैट फ्री को टा-टा: जिन प्रोसेस्ड फ़ूड में फैट की मात्रा कर की जाती है, उनमे अधिकांशतः शर्करा की मात्रा ज्यादा कर देते हैं. ऐसी चीज़ें हमें जितना लाभ नहीं देती, उससे ज्यादा हानि पहुंचती हैं.
२. एक्स्ट्रा मीठा- नो नो: प्राकृतिक तौर पर मीठी चीज़ें जैसे फल, डेट्स आदि सुपाच्य होते हैं और रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा नहीं बढाते. कृत्रिम शर्करा का सेवन (जैसे कि चौकलेट, मिठाइयाँ, केक, कूकीज, जिनमे बहुत अधिक मात्रा में शक्कर डालते हैं) कम-से-कम करना चाहिए.
३. व्यायाम और योगा: हल्का फुल्का व्यायाम न सिर्फ वसा को कम करने के लिए ज़रूरी है, बल्कि इससे रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा भी कम रहती है और शर्करा की लत धीरे-धीरे घटती है.
४. खाएं और बिलकुल खाएं: भोजन नियमित करें. पेट भरा होता है तो मिठास की Craving कम होती है. संतुलित आहार की आदत डाईटिंग जैसे नुस्खों से ज्यादा कारगर होता है, ये भी शोध में पाया गया है. कुछ मीठा खाने की इच्छा हो तो ड्राई-फ्रूट्स या मीठे फल खाएं.
 स्वस्थ जीवन जीना जितना आसान है उतना ही मुश्किल. अपने आहार के प्रति सदैव सचेत रहना अति-आवश्यक है. अगर मिठास की बहुत बुरी लत लगी हुई है तो ऐसा भी होता है कि कुछ विटामिन्स शरीर को उचित मात्रा में नहीं मिल पा रहे हैं. ऐसी स्थिति में संतुलित और नियमित आहार सर्वोत्तम है, न कि डाईटिंग!

Monday, 11 May 2015

आम को फलों का राजा क्यों कहा जाता है जानिए इसके चमत्कारी गुण का राज



आम का वैज्ञानिक नाम अंबज और फारसी में अम्ब कहा जाता है आम को हिंदी और बंगाली में आम, मराठी में आम्बा, गुजराती में आम्बी, सिन्धी और पंजाबी में अम्ब, कन्नड़ में अम्भ और तमिल में मंगा नाम से जाना जाता है | आम एनाकार्डीऐसी परिवार का वृक्ष है |

आम के वृक्ष सदाबहार और छायादार होता है | इसके आकार अलग-अलग जातियों के आधार से इसकी उंचाई १० मीटर से लेकर ४५ मीटर तक हो सकती है | लगभग १० वर्षों बाद फल देना शुरू कर देता है फिर लम्बे समय तक फल देता है | कई स्थान पर तो इसके आयु लगभग १०० भी पर कर चूका होता है | आम मूल रूप से गर्म भागों का वृक्ष है | यह शुष्क तथा आर्द्र दोनों प्रकार के जलवायु में उगाया जा सकता है |

मूल रूप से आम के वृक्ष दो प्रकार के होते है जंगली और फलदार | जंगली आम के वृक्ष पर फल नहीं लगते | आम के फलदार वृक्षों को भी दो भागों में विभाजित किया जा सकता है | स्वतः और सप्रयास | सप्रयास लगाए गए आम के वृक्ष दो प्रकार के होते है कलमी और बीजू | १५ दिन के अन्दर अगर आम के गुठलियों को जून या जुलाई माह में मॉनसून आते ही बो दिया जाता है | ऐसे में वृक्ष को बड़ा होने और फल देने में ८ से १० साल लग जाता है | इस प्रकार से वृक्षों से प्राप्त होने वाले आम को बीजू आम कहते है |

सामान्य रूप से आम गर्मी के मौसम में फलता और पकता है, परन्तु मुंबई और दक्षिण भारत के आसपास के क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में भी आम फलता है

आम के वृक्ष का औषधीय गुण :- इसके तने और शाखाओं की छाल से अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियां तैयार की जाती है |

१- वृक्ष के ताजे छाल का रस पेचिश में लाभदायक होता है |

२- छाल के काढ़े से धोने पर पुराने से पुराना घाव भरने लगता है | यह घाव के दर्द को भी कम करता है |

३- आम के वृक्ष से बाबुल के सामान ही गोंद निकलता है और इसका उपयोग भी बाबुल के गोंद के सामान किया जाता है | बाजार में आम के गोंद के नाम से बिकता है |

४- आम के हरे व ताजे पत्ते को चबाने से मशुढ़े मजबूत होते है और दाँत के बहुत सारे रोग को जड़ से समाप्त कर देते है |

५-आम की ताज़ी पत्तियों को तोड़कर उन्हें साफ़ करके छाया में सुखा कर, इन्हें कूट-पीसकर बारीक़ चूर्ण बना ले | यह चूर्ण २-३ ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से मधुमेह के रोगियों के लिए रामबाण औषधि जैसे निश्चित रूप से लाभ होता है |

६- आम के छिलके को ताजे पानी में पीसकर पिलाने से हैजे के रोगी को विशेष लाभ होता है |

७- कच्चे आम के छिलकों को साफ़ करके सुखा कर फिर कूट-पीसकर महीन चूर्ण बना ले | इस चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से खुनी पेचिस ठीक हो जाती है |

८- पका हुआ आम का फल ह्रदय रोगी के लिए विशेष लाभ दायक होता है | इसका सेवन शरीर स्वास्थ्य,बलशाली,पाचनशक्ति बढाने और शुक्राणु सम्बंधित दोषों को दूर करने की क्षमता होती है |
९- गर्मियों के मौसम में पका हुआ फल का सेवन से प्यास और थकान का अनुभव नहीं होता है | आम को लम्बी आयु प्रदान करने वाला फल कहा गया है |

१०- आम के पके हुए फल में ग्लूकोज, कार्बोहाईड्रेट, सुक्रोस, फ़्रकट्रोस, माल्टोस,विटामिन A , लंगड़ा में विटामिन C आदि प्रचुर मात्रा में होते है |

एक चमत्कारयुक्त वनस्पति है एलो वेरा ( ग्वारपाठा)



एलो वेरा ( ग्वारपाठा) एक चमत्कारयुक्त वनस्पति

किसी ने सच ही कहा है स्वास्थ्य ही धन है | वास्तव में बगैर अच्छे स्वास्थ्य के कुछ भी ठीक नहीं लगता | अच्छा स्वास्थ्य पाना मुश्किल नहीं है बस जरुरत है संयमित और अनुशासित जीवन व्यतीत करने की | मनुष्य को इसके महत्व को समझना आज समय की आवश्यकता बन गई है | बेहतर स्वास्थ्य हम किस प्रकार से पा सकते है और क्या कोई ऐसा आयुर्वेदिक वनस्पति है जिसका सेवन मात्र से हम चुस्त-दुरुस्त रह सकते है

घी ग्वार जिसे ग्वारपाठा भी कहते है , अपने देश में ही नहीं अपितु दुनिया के प्रत्येक देश में इसकी पैदावार होती है | इसके रस को सुखाकर भरी मात्रा में एक पदार्थ बनाया जाता है, जिसे आमतौर पर मुसब्बर कहा जाता है और संस्कृत में कुमारी रस हिंदी में एल्बा कहते है |

भाषा और क्षेत्र के आधार पर इनके अलग-अलग नाम से जाना जाता है जैसे- संस्कृत में घृतकुमारी, हिंदी में घी गुवार, घृतकुमारी, मराठी में, कोरफड, कोरकांड, गुजरती में कुंवार्पथा, बंगला में घृत कोमरी, तेलगु में चित्रकट बांदा, कलबंद, तमिल में चिरुली, कतालै , चिरुकतारें, मलयालम में कुमारी, कन्नड़ में लोलिसार, फारसी में दरख्ते सिब्र, अंग्रेजी में एलो, लेटिन में एलोवेरा |

ग्वारपाठा के गुणधर्म के बारे में तो हजारों साल से प्रायः दुनिया के प्रत्येक धर्मग्रंथ और पौराणिक किताबे में चर्चा की गई है |

कहीं इसे घर का वैद्य, कहीं इसे भुत भगाओ पौधा, तो कहीं इसे संजीवनी लता, तो कहीं इसे घरों के गमले में रखने से घर को प्रदूषित रहित बनाने आदि अनेक प्रकार के काम के लिए मनुष्य इसे अपने जीवन में उपयोग कर रहे है | वैसे एलोवेरा मानव शरीर के लिए सम्पूर्ण पौष्टिक आहार है |

इसका सेवन से शरीर में शीतलता, नेत्रों के लिए हितकारी,बलवीर्यवर्धक, पलीहा व यकृत के विकार, अंड वृद्धि, रक्तविकार, त्वचा रोग, आंत सम्बंधित रोग आदि अनेक प्रकार के विकारों को दूर करने में बहुत ही उपयोगी औषधि का काम करता है |

इस पौधे के पते ही होते है जो जमीन से ही निकलते है, यह २ से ३ फिट लम्बे और ३ से ४ इंच चौड़े होते है जिनके दोनों तरफ नुकीली कांटे होते है | इनके पते गहरे हरे रंग के मोटे, चिकने और गूदेदार होते है | जिन्हें काटने या छिलने पर घी जैसे गुदा ( जेल ) निकलता है | इसीलिए इस पौधे को घृतकुमारी व घी ग्वार भी कहा जाता है |

वैसे इसका प्रयोग कई प्रकार के रोगों की चिकित्सा में किया जाता है जिसके वर्णन निचे दिया जा रहा है :-

फोड़ा व गाँठ :- इसके पतों का गुदा करके जरा सी पीसी हल्दी मिलकर पुल्टिस तैयार करें और गांठ,फोड़े पर रखकर पट्टी बांध दे | फोड़ा पक कर स्वतः फुट जायेगा और मवाद निकल जायेगा |

जले हुए स्थान पर तुरंत इसके गुदे का लेप कर देने से जलन शांत होती है और फफोले नहीं पड़ते है | शहद के साथ मिलकर जेल का प्रयोग करने से जले का निशान भी चला जाता है |

कान दर्द में इसके गुदे का रस को आंच पर गर्म कर जो आराम से सहन कर सके जिस कान में दर्द हो उसकी दूसरी तरफ के कान में दो बूंद रस डालने से कान दर्द ठीक होता है |

सिरदर्द के लिए इसके जेल को सर लगाने से सिरदर्द दूर होता है |

बवासीर रोगीं के लिए तो यह रामबाण औषधि है | इसकी सब्जी बनाकर खाने से लाभ होता है और इसका रस पिने से पेट ठीक रहेगा |

गठिया रोगों में इसके दो फांक कर इसमें हल्दी भरकर हल्का गर्म करें और प्रभावित भाग पर लगातार पट्टी करने से गठिया, जोड़ो में दर्द,मोच या सुजन में विशेष लाभ होता है |

जोड़ो के दर्द में एलोवेरा जूस का सेवन सुबह-शाम खली पेट करें और प्रभावित जोड़ो पर लगाने से विशेष फायदा होता है |

कब्ज़ में रोज एलो वेरा जूस का सेवन करें बहुत ज्यादा फायदा होगा

यकृत की सुजन में इसके गुदे का सुबह-शाम सेवन से यकृत की कार्यक्षमता बढती है वो पीलिया रोग दूर होता है |

छोटे बच्चों के कब्ज़ के लिए जूस व हिंग मिलकर नाभि के चरों और लगा दे ,इससे लाभ मिलेगा |

गुदा का सेवन खली पेट करने से यदि मलेरिया का प्रकोप बार-बार होता है तो ठीक होता है |

त्वचा सम्बंधित रोगों में इसका महत्वपुर भूमिका है | एलोवेरा का प्रयोग बहुतायत से सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग किया जाता है, एलो वेरा जेल चेहरे पर लगाने से चेहरे पर कांटी आभा व मुहांसे, झाइयाँ दूर होती है | इसके बाहरी प्रयोग से त्वचा में निखार आती है |

बालों के लिए भी इसके जूस को सिर में लगाने से बाल मुलायम, घने, काले व बालो का झाड़ना बंद होता है | अगर बाल जड़ चूका है तो इसका रस नियमित सिर पर लगाते रहने से नए उगने लगते है |

यह रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूती प्रदान करती है | इसका सेवन से बुढ़ापा समय से पहले नहीं आता |

ह्रदय रोग होने का मुख्य कारण मोटापा कोलेस्ट्रोल का बढ़ना और रक्तवाहिनियों में वसा का जमाव होना है | ऐसी स्थिति में इसका जूस बेहद फायदेमंद है |

अतः यह औषधि बहुमूल्य है ,इसमें गुणों का भंडार है इस औषधि के बारे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जानी चाहिए |

Sunday, 10 May 2015

जब महंगी दवाओं के लिए न हों पैसे , तो अजमाए ये नुस्खे



जब महंगी दवाओं के लिए न हों पैसे , तो अजमाए ये  नुस्खे 

आज का समय विज्ञान का है, लेकिन व्यक्ति के कब शारीरिक समस्याएं हो जाती हैं पता नहीं चलता। लोग बिना सोचे-समझे बाजार से भागकर माॅडर्न दवाएं ले आते हैं और खा लेते हैं। बाद में सेहत प्रॉब्लम ज्यादा हो जाती हैं। ऐसे में आधुनिक मेडिसन के नुकसान या महंगे खर्च से बचने के लिए आप घरेलू उपाय याद कर सकते हैं। यहां कुछ आजमाए हुए नुस्खे बताए जा रहे हैं जिन्हें विकट परिस्थिति में यूजकर हालात संभाल सकते हैं –

1. यदि आपकी स्किन रूखी और बेजान लगती है तो जौ का आटा, हल्दी, सरसो का तेल पानी में मिलाकर उबटन बनाकर रोजाना शरीर में मालिश कर गुनगुने पानी से नहाएं। दूध को केसर में मिलाकर पिएं, रूप निखर जाएगा।
2. धनिया, जीरा और चीनी तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त या एसिडिटी के कारण होने वाली जलन शांत हो जाती है।
3. आधा चम्मच चिरौंजी को 2 चम्मच दूध में भिगोकर पीसकर पेस्ट बनाकर लगाएं। 15 मिनट बाद धो लें। इसे नियमित रूप से डेढ़ महीने लगाए जाने पर रंग निखरता है व चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।
4. मुंह के छाले की समस्या परेशान कर रही हो तो दिन में कम से कम तीन बार कच्चे दूध से अच्छी तरह से गरारे करें, छाले मिट जाएंगे।

5. प्याज के बीजों को सिरका में पीसकर प्राप्त रस को दाद-खाज और खुजली पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है। हमें पता है कि अंग्रेजी दवाएं हर कोर्इ नहीं खरीद पाता है, इसलिए 20 और घरेलू उपाय यहां बताए जा रहे है। गैलरी में पिक्स पर क्लिक कर जानें प्राकृतिक उपचार के टिप्स ..

6. पुदीना सिरदर्द की समस्या में एक रामबाण औषधि माना जाता है।पुदीने का रस लेने से या पुदीने की चाय पीने से सिरदर्द में तुरंत आराम मिलता है। इसके अलावा अगर सिरदर्द बहुत ज्यादा तेज हो तो पुदीना का तेल हल्के हाथों से सिर पर लगाने से सिरदर्द बंद हो जाता है। 10. सफेद जीरे को घी में भूनकर इसका हलुआ बनाकर प्रसुता को खिलाने से स्तनों के दूध में बढ़ोतरी होती है।

7. जीरे को मिश्री की चाशनी बनाकर उसमें या शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है। 15. दो चम्मच ईसबगोल की भूसी छ: घंटे पानी में भिगोकर रख दें। रात को सोने से पहले ईसबगोल में मिश्री मिलाकर लें। इसके बाद थोड़ा पानी जरूर पिएं। कब्ज दूर हो जाएगी।

8. दस ताजे हरे करी पत्तों को सुबह खाली पेट खाएं। तीन महीनों तक नियमित रूप से ये प्रयोग करने पर डायबिटीज कंट्रोल में आ जाती है व मोटापा घटने लगता है। आगे के फोटो पे चलिए….

Saturday, 9 May 2015

जानिए पाचन तंत्र को पुष्ट कैसे करता है “पुदीना”



पूरे भारत वर्ष में पाया जाने वाला पौधा पुदीना किसी परिचय का मोहताज नही है | हाँ इतना जरुर है कि विभिन्न भाषाओं में यह भिन्न भिन्न नामों से जाना जाता है | हिंदी में इसे पुदीना और पोदीना, मराठी में पंदिना, बंगला में पुदीना, संस्कृत में पूतिहा, पुदिन:, गुजराती में फुदिनो, अंग्रेजी में स्पियर मिंट तथा लैटिन भाषा में मेंथा सैटाइवा व मेंथा विरिडस इत्यादि नामों से जाना जाता है|
गुण धर्म व प्रयोग की दृष्टि से देखा जाये तो यह कफ वात शामक, वातानुमोलक, कृमिघ्न, हृदयोत्तेजक, दुर्गन्धनाशक, वेदना स्थापक, कफ नि:सारक है|

>> अरुचि, अपच, अतिसार, अफारा, श्वास, कास, ज्वर, मूत्ररोग इत्यादि में अति उत्तम माना गया है| वैसे तो पुदीना पूरे वर्ष पाया जाता है किन्तु इसका सर्वाधिक उपयोग गर्मियों में होता है| पुदीने में पाया जाने वाला एपटाइजर गुण उदर सम्बन्धी समस्याओं के लिए अमृत का काम करता है, जिससे पाचन तंत्र संतुलित रहता है| पुदीने के अन्दर पाए जाने वाले सुगंध मात्र से ही “लार ग्रंथि” (स्लाइवा ग्लैंड) सक्रिय हो जाता है जो पाचन क्रिया में अहम् भूमिका निभाता है| पुदीने का नित्य थोडा सा किसी न किसी रूप में सेवन तथा योगासन के अंतर्गत आने वाला वज्रासन पाचन तंत्र को सक्रिय रखने के लिए सर्वोत्तम है| यह याद रहे कि भोजनोपरांत दस मिनट तक वज्रासन में बैठने से पाचन क्रिया तीव्र व संतुलित रहती है| गर्मियों में चलने वाली लू (गर्म हवा) द्वारा शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावो को भी पुदीना मिश्रित “पना” नाकाम करता है| पुदीना का एक सबसे महत्वपूर्ण गुण यह भी है कि यह एसिडिटी के कारण उत्पन्न होने वाले पेट में जलन व सूजन को भी ठीक करता है| पुदीने की पत्ती को पीस कर माथे पर लेप करने से माईग्रेन के दर्द में भी राहत मिलती है| पुदीने के सेवन से श्व्वास की बदबू भी पूरी तरह से नियंत्रित हो जाती है| आमतौर पर उच्च रक्तचाप व निम्न रक्तचाप दोनों की दवा अलग – अलग होती है किन्तु पुदीना रक्तचाप की ऐसी औषधि है जो निम्न और उच्च दोनों ही रक्तचाप के लिए लाभकारी है| यह ध्यान रहे कि उच्चरक्तचाप के मरीज पुदीना सेवन में शक्कर व नमक का प्रयोग न करें| तथा निम्न रक्तचाप के मरीज को पुदीने में कालीमिर्च व सेंधा नमक मिला कर सेवन करना चाहिए|

जानिए मशरूम को क्यों कहा जाता है जडी-बूटियों का राजा



चाहे आप वेजिटेरियन हों या फिर नॉन वेजिटेरियन, मशरूम की सब्‍जी हर किसी को खानी पसंद है। डॉक्‍टरों का कहना है कि मशरूम का सेवन मानव सेहत के लिए रामबाण है। इसके सेवन से जहां उच्चरक्तचाप नियंत्रित होता है तो वही मोटापा को कम करता है। तो फिर आइये जानते हैं इसके गुणों के बारे में-

1. प्रतिरक्षा प्रणाली बढा़ए- मशरूम में मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट हमें भंयकर फ्री रेडिकल्‍स से बचाता है। इसको खाने से शरीर में एंटीवाइरल और अन्‍य प्रोटीन की मात्रा बढती है, जो कि कोशिकाओं को रिपेयर करता है। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो कि माइक्रोबियल और अन्‍य फंगल संक्रमण को ठीक करता है।

2. कैंसर- यह प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाता है। इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। यह कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।
 3. हृदय रोग- मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं इसलिये ये दिल के लिये अच्‍छे होते हैं। इसमें कुछ तरह के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो कि कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।

 4. मधुमेह- मशरूम वह सब कुछ देगा जो मधुमेह रोगी को चाहिये। इसमें विटामिन, मिनरल और फाइबर होता है। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन को बनाती है।
5. मोटापा कम करे- इसमें लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में बडा़ कारगर होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट पर रहने को बोला जाता है, जिसमें मशरूम खाना अच्‍छा माना जाता है।

 6. मैटाबॉलिज्‍म- मशरूम में विटामिन बी होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी2 और बी3 इस कार्य के लिये उत्‍तम हैं।

Friday, 8 May 2015

अपने दिमाक को तेज करें ब्रेन गेम खेल कर ( brain games)



जिस तरह Body को Fit करने के लिये Exercise की आवश्‍यकता होती है, उसी प्रकार हमारे Mind को भी Fit रहने के लिये Exercise की आवश्‍यकता होती है । कहते हैं कि एक आम इन्‍सान अपने पूरे जीवन में केवल 10 प्रतिशत हिस्‍से का ही प्रयोग कर पाता है, यह सही है कि नहीं यह तो कह नहीं सकते। लेकिन इतना कह सकते हैं कि अगर हम अपने Mind की Exeercise कराते रहें तो हम ज्‍यादा तेज सोच सकते हैं, और अपने निर्णय को भी तेज तरीके से ले सकेंगें।

यह तो बात रही दिमाग की, अब बात आती है कि दिमाग की Exercise कैसे करायी जाये। क्‍योंकि शरीर की Exercise के लिये तो हम जिम चले जाते हैं। लेकिन अभी दिमाग के लिये कोई जिम नहीं बना है। लेकिन हॉ एक ऑनलाइन जिम है जहॉ आप अपने दिमाग को Exercise करा सकते हैं। इसका नाम है गेम्‍स फॉर द ब्रेन इस साइट पर दिमागी कसरत के लिये 40 से ज्‍यादा गेम्‍स दिये गये हैं, जिन्‍हें आप बडी ही अासानी से ख्‍ोल सकते हैं, लेकिन हॉ आपके दिमाग को थोडी कसरत करनी होगी। 

दिमाग भी लेता है सांस, जानिए कैसे



दिमाग भी लेता है सांस, जानिए कैसे

जब हम सांस लेते हैं तो वायु प्रत्यक्ष रूप से हमें तीन-चार स्थानों पर महसूस होती है। कंठ, हृदय, फेफड़े और पेट। कान और आंख में गई वायु का कम ही पता चलता है लेकिन मस्तिष्क में गई हुई वायु का हमें पता नहीं चलता। मस्तिष्क में वायु को महसूस करेंगे तो मस्तिष्क में जाग्रति फैलेगी और दिमाग तेज होने लगेगा। कैसे...

हम जब श्वास लेते हैं तो भीतर जा रही हवा या वायु पांच भागों में विभक्त हो जाती है या कहें कि वह शरीर के भीतर 5 जगह स्थिर हो जाती है। ये पंचक निम्न हैं- (1) व्यान, (2) समान, (3) अपान, (4) उदान और (5) प्राण।

उक्त सभी को मिलाकर ही चेतना में जागरण आता है, स्मृतियां सुरक्षित रहती हैं, मन संचालित होता रहता है तथा शरीर का रक्षण व क्षरण होता रहता है। उक्त में से एक भी जगह दिक्कत है तो सभी जगह उससे प्रभावित होती है और इसी से शरीर, मन तथा चेतना भी रोग और शोक से ‍घिर जाते हैं। चरबी-मांस, आंत, गुर्दे, मस्तिष्क, श्वास नलिका, स्नायुतंत्र और खून आदि सभी प्राणायाम से शुद्ध और पुष्ट रहते हैं।

(1) व्यान : व्यान का अर्थ जो चरबी तथा मांस का कार्य करती है।
(2) समान : समान नामक संतुलन बनाए रखने वाली वायु का कार्य हड्डी में होता है। हड्डियों से ही संतुलन बनता भी है।
(3) अपान : अपान का अर्थ नीचे जाने वाली वायु। यह शरीर के रस में होती है।
(4) उदान : उदान का अर्थ ऊपर ले जाने वाली वायु। यह हमारे स्नायुतंत्र में होती है।
(5) प्राण : प्राणवायु हमारे शरीर का हालचाल बताती है। यह वायु मूलत: खून में होती है।

 महसूस करें : जब हम सांस लेते हैं तो वायु प्रत्यक्ष रूप से हमें तीन-चार स्थानों पर महसूस होती है। कंठ, हृदय, फेफड़े और पेट। मस्तिष्क में गई हुई वायु का हमें पता नहीं चलता। कान और आंख में गई वायु का भी कम ही पता चलता है।

श्वसन तंत्र से भीतर गई वायु अनेक प्रकार से विभाजित हो जाती है, जो अलग-अलग क्षेत्र में जाकर अपना-अपना कार्य करके पुन: भिन्न रूप में बाहर निकल आती है। यह सब इतनी जल्दी होता है कि हमें इसका पता ही नहीं चल पाता।

हम सिर्फ इनता ही जानते हैं कि ऑक्सीजन भीतर गई और कार्बन डाई ऑक्सॉइड बाहर निकल आई, लेकिन भीतर वह क्या-क्या सही या गलत करके आ जाती है इसका कम ही ज्ञान हो पाता है। सोचे ऑक्सीजन कितनी शुद्ध थी। शुद्ध थी तो अच्‍छी बात है वह हमारे भीतरी अंगों को भी शुद्ध और पुष्ट करके सारे जहरीले पदार्थ को बाहर निकालने की प्रक्रिया को सही करके आ जाएगी।

प्रत्येक जगह वायु को महसूस करने के लिए कपालभाति और भस्त्रिका का अभ्यास नाड़िशोधन प्राणायाम के अभ्यास के बाद करें। फिर ध्यान में बैठकर मस्तिष्क में वायु की ठंडक को महसूस करें।
 वायु का प्रभाव : यदि हम जोर से श्वास लेते हैं तो तेज प्रवाह से बैक्टीरियां नष्ट होने लगते हैं। कोशिकाओं की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। 'बोन मेरो' में नए रक्त का निर्माण होने लगता है। आंतों में जमा मल विसर्जित होने लगता है। मस्तिष्क में जाग्रति लौट आती है जिससे स्मरण शक्ति दुरुस्त हो जाती है।

न्यूरॉन की सक्रियता से सोचने-समझने की क्षमता पुन: जिंदा हो जाती है। फेफड़ों में भरी-भरी हवा से आत्मविश्वास लौट आता है। सोचे जब जंगल में हवा का एक तेज झोंका आता है तो जंगल का रोम-रोम जाग्रत होकर सजग हो जाता है। ‍सिर्फ एक झोंका।

इनसे होगा मस्तिष्क शुद्ध : कपालभाति या भस्त्रिका प्राणायाम तेज हवा के अनेक झोंके जैसा है। बहुत कम लोगों में क्षमता होती है आंधी लाने की। लगातार अभ्यास से ही आंधी का जन्म होता है। 10 मिनट की आंधी आपके शरीर और मन के साथ आपके संपूर्ण जीवन को बदलकर रख देगी। हृदय रोग या फेफड़ों का कोई रोग है तो यह कतई न करें।

 प्राणायाम करते समय तीन क्रियाएं करते हैं-1. पूरक, 2. कुंभक, 3. रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं।

(1) पूरक : अर्थात नियंत्रित गति से श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब भीतर खींचते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

(2) कुंभक : अंदर की हुई श्वास को क्षमतानुसार रोककर रखने की क्रिया को कुंभक कहते हैं। श्वास को अंदर रोकने की क्रिया को आंतरिक कुंभक और श्वास को बाहर छोड़कर पुन: नहीं लेकर कुछ देर रुकने की क्रिया को बाहरी कुंभक कहते हैं। इसमें भी लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

(3) रेचक : अंदर ली हुई श्वास को नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब छोड़ते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

Thursday, 7 May 2015

नोनी फल क्या हे जाने सेहत के लिए इसके क्या फायदे है



यह एक प्रकार का पौधा है, इसे मोरिन्डा सिट्रीफोलिया के नाम से जाना जाता है। यह औषधि की क्षमता को बेहतर बनाता है। इसे अन्य औषधियों के साथ भी लिया जा सकता है।

नोनी फल आम लोगों के लिए जितना गुमनाम है, सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद। नोनी के रूप में वैज्ञानिकों को एक ऐसी संजीवनी हाथ लगी है, जो मधुमेह, अस्थमा, गठिया, दिल के मरीजों सहित कई बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित हो रहा है।

नोनी फल : यह त्वचा के घाव भरने में मदद करता है। यह मुहांसों के उपचार में भी सहायक है।

Wednesday, 6 May 2015

वजन कम करना है तो कीजिए सेक्स...



सेक्स एक प्रकार का व्यायाम है। इसके लिए खास किस्म के सूट, शू या महंगी एक्सरसाइज सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है बस बेडरूम का दरवाजा बंद करने की। सेक्स व्यायाम शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को दूर करता है और शरीर को लचीला बनाता है। एक बार का हेल्दी सेक्स किसी थका देने वाले एक्सरसाइज या स्विमिंग के 10-20 चक्करों से अधिक असरदार होता है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा दूर करने के लिए सेक्स काफी सहायक सिद्ध होता है।

 390 बार चुंबन लेने से आधा किलो वजन कम

सेक्स से शारीरिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे चर्बी घटती है। एक बार के सेक्स में 500 से 1000 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। सेक्स के समय लिए गए चुंबन भी मोटापा दूर करने में सहायक सिद्ध होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स के समय लिए गए एक चुंबन से लगभग 9 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। इस तरह 390 बार चुंबन लेने से 1/2 किलो वजन घट सकता है।

क्योंकि स्वास्थ्य ही सेक्स का आधार है
विशेषज्ञों का कहना है कि वजन कम करने के लिए खाना छोडऩा तो दूर की बात है, एक सीमा से अधिक खाना कम कर देना भी स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है, क्योंकि स्वास्थ्य ही स्वस्थ सेक्स का आधार होता है। परफेक्ट फिगर की चाह  को हम एक बीमारी कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जो दुबले हैं वे वजन बढ़ाने के लिए फैट्स आदि ज्यादा मात्रा में खाने लगते हैं और जो मोटे हैं वे वजन घटाने के लिए खाना-पीना छोड़कर डाइट व ड्रग्स लेने लगते हैं। दोनों ही बातें सेहत की दृष्टि से गलत है।

मधुमेह, अस्थमा व हृदयरोग इन जानलेवा रोगों के मूल में हैं अधिक स्टार्चयुक्त व फैट्स वाला भोजन व शारीरिक श्रम का अभाव। आज हम अपने पाचनतंत्र की डाइजेस्टिव कैपेसिटी से कई गुना अधिक खा रहे हैं। यह अतिरिक्त भोजन हमारे शरीर में तरह-तरह के विकार पैदा करता है। आधुनिक जीवनशैली के तहत वक्त-बेवक्त खाना मधुमेह, अस्थमा व हृदयरोग जैसी बीमारियों को जन्म देता है।

सुबह व शाम की सैर के साथ खुली हवा में व्यायाम से पाचनतंत्र के सभी विकार दूर होते हैं जिससे संपूर्ण शरीर हलका-फुलका, स्वस्थ व स्फूर्तिदायक बन जाता है। सुबह जल्दी उठकर खुली हवा में सांस लेने से फेफड़ों में स्वस्थ वायु का प्रवेश होता है। फेफड़े स्वस्थ रहने से न केवल हृदय को बल मिलता है बल्कि खांसी, दमा, श्वास रोग व एलर्जी आदि से भी छुटकारा मिलता है।
बदलती जीवनशैली में काम के प्रेशर के चलते स्त्री-पुरुष अपनी रूटीन लाइफ में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि सेक्स जैसी महत्वपूर्ण क्रिया से दूर होते जाते हैं। उनकी सेक्सुअल इच्छा कम होती जाती है। पति-पत्नी में आकर्षण का अभाव अनेक पारिवारिक और सेक्स संबंधी समस्याओं को जन्म देता है।

गंभीर समस्या श्वेत प्रदर थोड़ी सी सावधानी व उपचार बचा जा सकता है



गंभीर समस्या श्वेत प्रदर
ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) की बीमारी महिलाओं की आम समस्या है। संकोच में इसे न बताना कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। थोड़ी सी सावधानी व उपचार के जरिए इसके घातक परिणामों से बचा जा सकता है। अन्यथा यह कैंसर का कारण बन सकती है। सामान्य तौर पर गर्भाशय में सूजन अथवा गर्भाशय के मुख में छाले होने से यह समस्या पैदा होती है। उपचार न कराने से पीडि़ता को कई तरह की मानसिक व शारीरिक समस्याओं का शिकार होना पड़ता है। इसलिए महिलाएं को श्वेत प्रदर की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण स्त्रियां बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है। ये गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला स्त्राव होता है। यह खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण होता है। श्वेत प्रदर वास्तव में एक बीमारी नहीं है बल्कि किसी अन्य योनिगत या गर्भाशयगत व्याधि का लक्षण है; या सामान्यत: प्रजनन अंगों में सूजन का बोधक है।

 कारण

अत्यधिक उपवास
उत्तेजक कल्पनाए
अश्लील वार्तालाप
सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना
सम्भोग काल में अत्यधिक घर्षण युक्त आघात
रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास
सहवास के बाद योनि को स्वच्छ जल से न धोना व वैसे ही गन्दे बने रहना आदि इस रोग के प्रमुख कारण बनते हैं।
बार-बार गर्भपात कराना भी एक प्रमुख कारण है।
असामान्य योनिक स्राव से कैसे बचा जा सकता है?

ल्यूकोरिया में आयुर्वेदिक इलाज

आंवला
आंवले को सुखाकर अच्छी तरह से पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसी बने चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा को लगभग 1 महीने तक रोज सुबह-शाम को पीने से स्त्रियों को होने वाला श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) नष्ट हो जाता है।

झरबेरी
झरबेरी के बेरों को सुखाकर रख लें। इसे बारीक चूर्ण बनाकर लगभग 3 से 4 ग्राम की मात्रा में चीनी (शक्कर) और शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम को प्रयोग करने से श्वेतप्रदर यानी ल्यूकोरिया का आना समाप्त हो जाता है।

नागकेशर
नागकेशर को 3 ग्राम की मात्रा में छाछ के साथ पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है।
केला
2 पके हुए केले को चीनी के साथ कुछ दिनों तक रोज खाने से स्त्रियों को होने वाला प्रदर (ल्यूकोरिया) में आराम मिलता है।

गुलाब
गुलाब के फूलों को छाया में अच्छी तरह से सुखा लें, फिर इसे बारीक पीसकर बने पाउडर को लगभग 3 से 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह और शाम दूध के साथ लेने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) से छुटकारा मिलता है।

मुलहठी
मुलहठी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी के साथ सुबह-शाम पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) की बीमारी नष्ट हो जाती है।

बड़ी इलायची
बड़ी इलायची और माजूफल को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर समान मात्रा में मिश्री को मिलाकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम को लेने से स्त्रियों को होने वाले श्वेत प्रदर की बीमारी से छुटकारा मिलता है।

ककड़ी
ककड़ी के बीज, कमलककड़ी, जीरा और चीनी (शक्कर) को बराबर मात्रा में लेकर 2 ग्राम की मात्रा में रोजाना सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।

जीरा
जीरा और मिश्री को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इस चूर्ण को चावल के धोवन के साथ प्रयोग करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ मिलता है।

चना
सेंके हुए चने पीसकर उसमें खांड मिलाकर खाएं। ऊपर से दूध में देशी घी मिलाकर पीयें, इससे श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) गिरना बंद हो जाता है।

जामुन
छाया में सुखाई जामुन की छाल का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ कुछ दिन तक रोज खाने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।

फिटकरी
चौथाई चम्मच पिसी हुई फिटकरी पानी से रोजाना 3 बार फंकी लेने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाते हैं। फिटकरी पानी में मिलाकर योनि को गहराई तक सुबह-शाम धोएं और पिचकारी की सहायता से साफ करें। ककड़ी के बीजों का गर्भ 10 ग्राम और सफेद कमल की कलियां 10 ग्राम पीसकर उसमें जीरा और शक्कर मिलाकर 7 दिनों तक सेवन करने से स्त्रियों का श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग मिटता है।

गाजर
गाजर, पालक, गोभी और चुकन्दर के रस को पीने से स्त्रियों के गर्भाशय की सूजन समाप्त हो जाती है और श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग भी ठीक हो जाता है।

नीम
नीम की छाल और बबूल की छाल को समान मात्रा में मोटा-मोटा कूटकर, इसके चौथाई भाग का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम को सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ मिलता है। रक्तप्रदर (खूनी प्रदर) पर 10 ग्राम नीम की छाल के साथ समान मात्रा को पीसकर 2 चम्मच शहद को मिलाकर एक दिन में 3 बार खुराक के रूप में पिलायें।

मेथी
मेथी के चूर्ण के पानी में भीगे हुए कपड़े को योनि में रखने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) नष्ट होता है। रात को 4 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी को सफेद और साफ भीगे हुए पतले कपड़े में बांधकर पोटली बनाकर अन्दर जननेन्द्रिय में रखकर सोयें। पोटली को साफ और मजबूत लम्बे धागे से बांधे जिससे वह योनि से बाहर निकाली जा सके। लगभग 4 घंटे बाद या जब भी किसी तरह का कष्ट हो, पोटली बाहर निकाल लें। इससे श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है और आराम मिलता है। मेथी-पाक या मेथी-लड्डू खाने से श्वेतप्रदर से छुटकारा मिल जाता है, शरीर हष्ट-पुष्ट बना रहता है। इससे गर्भाशय की गन्दगी को बाहर निकलने में सहायता मिलती है। गर्भाशय कमजोर होने पर योनि से पानी की तरह पतला स्राव होता है। गुड़ व मेथी का चूर्ण 1-1 चम्मच मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से प्रदर बंद हो जाता है।

कैसे बच सकते है हम माइग्रेन दर्द से जाने - cure for migraine



माइग्रेन सिरदर्द का एक गंभीर रूप है, जो एक सामान्य और स्वस्थ जीवन को काफी मुश्किल बना देता है। इस विकार के लक्षण हैं मतली आना, प्रकाश-संवेदनशीलता बढ़ जाना, धुन्धले धब्बे, रौशनी की चमक और गर्दन में दर्द। हालांकि माइग्रेन एक गंभीर बीमारी है, कुछ सरल उपायों की मदद से इसका प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है। माइग्रेन को कम करने के लिए सबसे प्रभावी तरीकों में से कुछ नीचे दिए गए हैं।

माइग्रेन की पहचान:-

क्या आपको सिर के एक हिस्से में बुरी तरह धुन देने वाले मुक्कों का एहसास होता है, और लगता है कि सिर अभी फट जाएगा?

क्या उस वक्त आपके लिए अत्यंत साधारण काम करना भी मुश्किल हो जाता है?

क्या आपको यह एहसास होता है कि आप किसी अंधेरी कोठरी में पड़े हैं, और दर्द कम होने पर ही इस अनुभव से निजात मिलती है?

अगर इनमें से किसी भी प्रश्न का उत्तर हां में है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपको माइग्रेन हुआ है। इसलिए फौरन डॉक्टर के पास जाकर इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए।

अगर दर्द माइग्रेन का है तो, (cure for migraine)

आइस पैक रखें माइग्रेन का सिरदर्द कम करने के लिए एक सबसे सरल उपचार है अपने सिर पर आइस पैक रखें। आइस पैक मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करता है और दर्द को कम कर देता है। प्रभावित क्षेत्र, कनपटी और गर्दन पर प्रभावी राहत के लिए आइस पैक को धीरे-धीरे रगड़ें।

बड़ी इलाइची का छिलका या लौंग अच्‍छे से पीसकर उसे हल्‍का गर्म करें और सिर पर लेप की तरह लगाएं।

अगर अक्‍सर दर्द उठता है तो दिन में दो बार दही और चावल खाएं।

गाय का घी सुबह शाम नाक में डालें।

केसर को घी में पीसकर सूंघने से भी आराम पड़ता है।

अगर दर्द सूर्योदय के साथ घटता बढ़ता है तो सूर्योदय से पहले दही, चावल और मिश्री मिलाकर खाएं।

सामान्‍य सिर दर्द,  (How to cure Normal headache )

अगर गर्मी की वजह से दर्द हो रहा है तो घीया का गूदा निकालकर पीस लें और उसे माथे पर लगाएं। धनिया या तुलसी के पत्‍तों को पीसकर भी उसका लेप लगा सकते हैं।

अगर गैस की वजह से सिर में दर्द है तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पिएं।

अगर सर्दी जुकाम की वजह से दर्द है तो साबुत धनिया और मिश्री का काढ़ा बनाकर पिएं।

वात की वजह से पैदा होने वाले सिर दर्द को रोकने के लिए लहसुन की दो चार कलियां चुटकी भर नमक के साथ खाने के साथ खाएं।

सुबह खाली पेट सेब खाने से राहत मिलती है।

दालचीनी को पीसकर उसका लेप लगा सकते हैं।

गुड का शर्बत पिएं।

एक कप दूध में पिसी इलाइची पिएं।

Tuesday, 5 May 2015

जाने भोजन के बाद में क्यों नहीं पीना चाहिए पानी



जाने भोजन के समय पानी पीने के क्या गुण है

भोजन के पहले पानी पीने से आँखों पर कालापन या अतिसार (दस्त) होता है और दुबलापन आता है। भोजन के अन्त में पानी पीने से मोटापा बढ़ता है, कफ होता है। बीच में जलपान से धातु-निर्माण होता है और सुख मिलता है।

अधिक पानी पीने से अन्न पचता नहीं है। पानी न पीने से भी वही दोष होता है। इसलिए मनुष्य को (जठर) अग्नि बढ़ाने के लिए बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी पीना चाहिए। प्यास लगे तो खाओ मत, भूख लगे तो जल मत पियो। प्यास से परेशान रहने वाले को तिल्ली हो जाती है और भूखा रहने वाले को भगन्दर (पाइल्स) हो जाते हैं।

साँझ होने तक चाहे तो हजार घड़े पानी पी लें। परन्तु सूर्यास्त के बाद एक बूँद पानी भी एक घड़े के समान होता है। रात्रि-भोजन के समय थोड़ा पानी भी विष है। रात में प्यास लगे तो ठण्डे पानी से कुल्ले कर लेने चाहिए। रात में मैथुन से थके या सम्भोगलीन लोगों को पानी तत्काल तृप्ति देता है। वह धातु तथा इन्द्रिय को बल प्रदान करता है। कभी गर्म पानी से शीतल जल का निवारण न करें। अन्न पच जाने पर तृप्ति तक शीतल जल पियें।

पानी से जलन शान्त हो जाती है। शेष अन्न पच जाता है। अजीर्ण होने पर पानी दवाई है और पच जाने पर पानी बल प्रदान करता है। पानी भोजन में अमृत है। परन्तु भोजन के बाद वह विष है।

जल पचने के काल तीन प्रकार के बताये गये हैं- कच्चा पानी एक प्रहर (तीन घंटे) में पचता है, गरम से ठंडा किया पानी आधे प्रहर (डेढ़ घंटे) में और गरम पानी उसके भी आधे समय (पौन घंटे) में पच जाता है।

धूप में तपा पानी कफ और वात दूर करता है। खुजली नहीं करता, पित्त को तोड़ता है, पाण्डु (पीलिया) दूर करता है और शुक्ल (आँखों के सफेद भाग का रोग) दूर करता है।

ब्रेस्ट कैंसर / स्तन कैंसर के लक्षण और बचाव



ब्रेस्ट कैंसर / स्तन कैंसर के लक्षण और बचाव

 हमारे शरीर के सभी अंग सेल्स से बने होते हैं। जैसे-जैसे शरीर को जरूरत होती है, ये सेल्स आपस में बंटते रहते हैं और बढ़ते रहते हैं, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि शरीर को इन सेल्स के बढ़ने की कोई जरूरत नहीं होती, फिर भी इनका बढ़ना जारी रहता है। बिना जरूरत के लगातार होने वाली इस बढ़ोतरी का नतीजा यह होता है कि उस खास अंग में गांठ या ट्यूमर बन जाता है। असामान्य तेजी से बंटकर अपने जैसे बीमार सेल्स का ढेर बना देने वाले एक सेल से ट्यूमर बनने में बरसों, कई बार तो दशकों लग जाते हैं। जब कम-से-कम एक अरब ऐसे सेल्स जमा होते हैं, तभी वह ट्यूमर पहचानने लायक आकार में आता है।

शर्म हावी न हो समस्या पर
ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर समस्या है, इसलिए सिर्फ शर्म की वजह से न तो इसको नजरअंदाज करें और न ही इस समस्या के बारे में चुप्पी साधें। इस विषय पर अपने आसपास के लोगों से चर्चा करें और इसके बारे में ज्यादा जानकारी लेने का प्रयास करें। जानकारी से इस रोग से बचाव संभव है। यदि आपको इस संबंध में किसी प्रकार की शंका हो तो डॉक्टर के पास जाकर सलाह अवश्य लें। कहा जाता है कि किसी बीमारी के इलाज से लाख गुना बेहतर होता है कि उससे बचाव की सावधानी बरती जाए। जुकाम से लेकर कैंसर तक इस सूत्र की सत्यता को झुठलाया नहीं जा सकता। बात ब्रेस्ट कैंसर की करें, तो हर युवती को 20 साल की उम्र से ही इस तरफ ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए। वह स्वयं ही अपने ब्रेस्ट की जांच समय-समय पर करे, जैसे उसमें कोई गांठ न हो या ब्रेस्ट अनावश्यक रूप से मोटा न हुआ हो। इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है खानपान का ध्यान रखना। अगर अपने खानपान का लगातार ध्यान रखा जाए और कुछ एक्सरसाइज भी की जाए तो इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है।

 ट्यूमर दो तरह के हो सकते हैं - बिनाइन और मैलिग्नेंट।

क्यों होता है कैंसर
वैसे तो ब्रेस्ट कैंसर के 100 में से 10 मामलों में ही अनुवांशिकता काम करती है, लेकिन कैंसर होने में जीन के बदलाव का 100 फीसदी हाथ होता है। जींस, एनवायरनमेंट और लाइफस्टाइल- ये तीन कारक मिलकर किसी के शरीर में कैंसर होने की आशंका को बढ़ाते हैं।

20 साल की उम्र से हर महिला को हर महीने पीरियड शुरू होने के 5-7 दिन बाद किसी दिन (मीनोपॉज में पहुंच चुकी महिलाएं कोई एक तारीख तय कर लें) खुद ब्रेस्ट की जांच करनी चाहिए। ब्रेस्ट और निपल को आईने में देखिए। नीचे ब्रा लाइन से लेकर ऊपर कॉलर बोन यानी गले के निचले सिरे तक और बगलों में भी अपनी तीन उंगलियां मिलाकर थोड़ा दबाकर देखें। उंगलियों का चलना नियमित स्पीड और दिशाओं में हो (यह जांच अपने कमरे में लेटकर या बाथरूम में शॉवर में भी कर सकती हैं)।
देखें कि ये बदलाव तो नहीं हैं :

ब्रेस्ट या निपल के साइज में कोई असामान्य बदलाव

कहीं कोई गांठ (चाहे मूंग की दाल के बराबर ही क्यों न हो) जिसमें अक्सर दर्द न रहता हो, ब्रेस्ट कैंसर में शुरुआत में आम तौर पर गांठ में दर्द नहीं होता
   
कहीं भी स्किन में सूजन, लाली, खिंचाव या गड्ढे पड़ना, संतरे के छिलके की तरह छोटे-छोटे छेद या दाने बनना
   
एक ब्रेस्ट पर खून की नलियां ज्यादा साफ दिखना
   
निपल भीतर को खिंचना या उसमें से दूध के अलावा कोई भी लिक्विड निकलना ब्रेस्ट में कहीं भी लगातार दर्द

(नोट : जरूरी नहीं है कि इनमें से एक या ज्यादा लक्षण होने पर कैंसर हो ही। वैसे भी युवा महिलाओं में 90 पर्सेंट गांठें कैंसर-रहित होती हैं। लेकिन 10 पर्सेंट गांठें चूंकि कैंसर वाली हो सकती हैं, इसलिए डॉक्टर से जरूर जांच कराएं।)

गलतफहमियां न पालें

कैंसर छूत की बीमारी नहीं है जो मरीज को छूने, उसके पास जाने या उसका सामान इस्तेमाल करने से हो सकती है।

कैंसर के मरीज का खून या शरीर की कोई चोट या जख्म छूने से कैंसर नहीं होता।

कैंसर डायबीटीज और हाई बीपी की तरह शरीर में खुद ही पैदा होनेवाली बीमारी है। यह किसी इन्फेक्शन से नहीं होती, जिसका इलाज एंटी-बायोटिक्स से हो सके।
   
चोट या धक्का लगने से ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता।
   
20 साल की उम्र से किसी भी उम्र की महिला को ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।
   
ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों को भी होता है। 100 में से एक ब्रेस्ट कैंसर का मरीज पुरुष हो सकता है।
  
खान-पान और लाइफस्टाइल में सुधार कर कैंसर होने की आशंका को कम किया जा सकता है। लेकिन एक बार कैंसर हो जाने के बाद उसे बिना दवा या सर्जरी के ठीक नहीं किया जा सकता। इसका प्रामाणिक इलाज अलोपथी ही है।

ज्यादातर (100 में से 90) मामलों में ब्रेस्ट कैंसर खानदानी बीमारी नहीं है। कई वजहें मिलकर कैंसर बनाती हैं।

ब्रेस्ट की 90 फीसदी गांठें कैंसर-रहित होती हैं। फिर भी हर गांठ की फौरन जांच करानी चाहिए।

ज्यादातर मामलों में कैंसर की शुरुआत में दर्द बिल्कुल नहीं होता।

कैंसर का इलाज मुमकिन है और इसके बाद भी सामान्य जिंदगी जी सकते हैं।

जागरूकता जरूरी
पहले ब्रेस्ट कैंसर विकसित देशों की, खाते-पीते परिवारों की महिलाओं की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब यह हर वर्ग की महिलाओं में देखा जा रहा है। खास यह है कि ब्रेस्ट कैंसर के 50 फीसदी मरीजों को इलाज करवाने का मौका ही नहीं मिल पाता। कैंसर के सफल इलाज का एकमात्र सूत्र है - जल्द पहचान। जितनी शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान होगी, इलाज उतना ही सरल, सस्ता, छोटा और सफल होगा। इसकी पहचान के बारे में अगर लोग जागरूक हों, अपनी जांच नियमित समय पर खुद करें तो मशीनी जांचों से पहले ही बीमारी के होने का अंदाजा हो सकता है।